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बालोद से प्रेरित होकर अब 17 शहरों में भी खुलेगा संस्कार केंद्र, मुफ्त में मिलेगी शिक्षा

आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की पहल से छत्तीसगढ़ में सबसे पहले बालोद में ही बाल संस्कार केंद्र की शुरुआत की गई है। आठ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:00 AM IST

आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की पहल से छत्तीसगढ़ में सबसे पहले बालोद में ही बाल संस्कार केंद्र की शुरुआत की गई है। आठ महीने से यहां अन्नपूर्णा पैलेस में हर रविवार को संस्कार केंद्र की कक्षा लगती है। जहां 25 बच्चों को संस्कार की नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। अब बालोद से प्रेरित होकर राज्य के 17 शहरों में भी इस तरह का संस्कार केंद्र खोला जाएगा। इसके लिए आर्ट ऑफ लिविंग के वेद विज्ञान महाविद्यापीठ बेंगलुरु द्वारा संचालित श्रीश्री संस्कार केंद्र टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन पिछले दिनों बालोद में हुआ।

जिसमें ट्रेनिंग देने के लिए दिल्ली से आर्ट ऑफ लिविंग टीचर डॉ रश्मि गुप्ता पहुंची थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों से आए 43 लोगों को ट्रेनिंग दी। इन्हीं में से 17 लोगों ने ट्रेनिंग के बाद निर्णय लिया कि वे भी अपने शहरों में संस्कार केंद्र संचालित करेंगे।

बालोद. नगर में ट्रेनिंग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से अलग-अलग राज्यों से पहुंचे 17 शहर के 43 लोग।

बच्चों को सिखाएं अच्छी आदत

ट्रेनर डॉ गुप्ता ने कहा कि बचपन से ही बच्चों के मन मस्तिष्क में संस्कार के बीज बोते हैं तो वह वर्षों तक फलित होती है। इसलिए बचपन से ही बच्चों को अच्छी आदतें सीखानी चाहिए। उन्होंने कहा किमां बाप का तो यह फर्ज है ही, इसके अलावा हम एक समाज सेवक के रूप में संस्कार केंद्र चलाकर शिक्षक की भूमिका निभाकर बच्चों को संस्कारी बना सकते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग पहले से गरीब बच्चों के लिए निशुल्क ज्ञान मंदिर स्कूल भी चला रहा है। जहां शिक्षा दीक्षा, गणवेश व भोजन की सुविधा दी जाती है।

बनाना है श्रेष्ठ नागरिक

इस केंद्र का उद्देश्य बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास कर एक श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण करना है। ताकि जब बच्चे बड़े हो तो भी उन्हें संस्कार भरा रहे। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं उनमें संस्कार कम होते जाते हैं। बिना संस्कार के युवाओं को सही दिशा नहीं मिलती और वे गलत रास्ते पर चलने लगते हैं। स्कूल में तो हमें अक्सर पुस्तकी ज्ञान ही मिल पाता है। लेकिन संस्कार की शिक्षा जीवन के लिए जरूरी है। ताकि बच्चा बढ़ा होकर अच्चा नागरिक बन सके।

आधुनिकता के दौर में युवा भूल रहे संस्कार: डॉ. गुप्ता

डॉ गुप्ता ने कहा बच्चों में संस्कार पैदा करने के लिए इस तरह के केंद्र की बहुत ही जरूरत है। आज आधुनिकता के दौर में युवा संस्कार भूलते जा रहे हैं। यदि उन्हें बचपन से ही अच्छी चीजें, आदतें सिखाई जाए तो युवा पीढ़ी भी सही दिशा में जा सकती है। बालोद से प्रेरित होकर भिलाई, रायपुर, मुंगेली, राजिम, कवर्धा, अंबिकापुर, रायगढ़ से आए लोगों ने संस्कार केंद्र शुरू कर रहे हैं जो अच्छी पहल है।

हर रविवार को लगती है क्लास

बालोद में संस्कार केंद्र की शुरुआत करने वाले व्यापारी संतोष दुबे, अश्वनी मिश्रा ने कहा कि हर रविवार को सुबह दो घंटे बच्चों की क्लास लगती है। जहां उन्हें योग, प्राणायाम, आसन, दादी नानी के नुस्खे, प्रेरणादायक कहानियां, भारतीय संस्कृति संबंधित ज्ञान, श्लोक व मंत्र उच्चारण सिखाया जाता है। इसका लाभ 7 से 11 वर्ष के बच्चों को मिल रहा है। बालोद में शुरू हुए इस पहल को देखते हुए अब आर्ट ऑफ लिविंग संस्था ने संतोष दुबे को छत्तीसगढ़ में राज्य समन्वयक व धीरज शर्मा को विशेष सलाहकार बनाया है।

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