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महिला ने मामा के साथ सीखा काम

अमूमन देखने को मिलता है कि शासकीय भवन, शौचालय या निजी मकान निर्माण में पुरुष ही राज मिस्त्री का कार्य करते हैं।...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:00 AM IST
महिला ने मामा के साथ सीखा काम
अमूमन देखने को मिलता है कि शासकीय भवन, शौचालय या निजी मकान निर्माण में पुरुष ही राज मिस्त्री का कार्य करते हैं। लेकिन जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत अर्जुनी की 45 साल की सुशीला साहू को लोग राजमिस्त्री के रुप में पहचानते है। पिछले 15 साल से ठेका लेकर निर्माण कार्य करा रही है। साथ ही मालिक बनकर दूसरों को रोजगार दे रही है।

इनके काम की सराहना केन्द्र शासन भी कर चुकी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इनको सम्मानित किया गया था। साथ ही केन्द्रीय मंत्री व अफसरों ने देशभर के लोगोंं के लिए इससे प्रेरणा लेने की बातें भी कहीं थी। बावजूद यह महिला अपनी पहचान छिपाती है, कहती है अब महिला किसी पुरुष से कम नहीं, आज मैं पुरुषों के समान काम कर रही हूं, कल मेरे जैसे हजारों महिलाएं ऐसे काम करती नजर आएंगी। केन्द्र स्तर में सम्मानित होने के पहले का सफर काफी संघर्ष भरा रहा।

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सुरगी गांव में पिता बिंझवार, मां सुकवारो बाई के साथ मेरा बचपना बीता। फिर पिता चंद्रपुर में जाकर कमाने, खाने के लिए चले गए, क्योंकि आर्थिक स्थिति हमारी कमजोर थी, पैसे के लाले थे। इसलिए प्राथमिक स्तर तक ही मै पढ़ सकी और मामा पंचराम साहू के घर कठिया गांव में जाकर रहने लगी, वहीं 12 साल की उम्र में मामा का सहयोग करने लगी। मामा मिस्त्री का काम करते थे, इसी को देखते मैं भी उनके साथ काम करने लगी और धीरे-धीरे राज मिस्त्री बन गई। फिर शादी हो गई। तब ससुराल में भी काम जारी रखा, इसके लिए पति ने मुझे प्रोत्साहित किया। अब गांव की 10 से अधिक महिलाओं को अपने साथ जोड़कर रोजगार दे रही हूं। लोग शौचालय व अन्य निर्माण कार्य करने की जिम्मेदारी हमें देते हैं। (राजमिस्त्री सुशीला साहू, जैसा भास्कर को बताया)

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महिला को दिया शौचालय बनाने की जिम्मेदारी

अर्जुनी के सरपंच घनाराम साहू ने बताया कि 2016-17 में गांव और दूसरे गांव सुर्की में शौचालय बनाने का काम सुशीला को दिया था। इस महिला के जरिए 10-15 लोगों को रोजगार मिल रहा है। मंुबई में स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन ने इन्हें सम्मानित किया था। केन्द्र शासन ने पुस्तक तैयार किया है। जिसमें सुशीला का जिक्र हुआ है।

बालोद. अर्जुनी की निवासी सुशीला साहू शौचालय निर्माण कार्य करती है।

महिलाओं को प्रेरणा दे रही सुशीला

सामाजिक कार्यकर्ता अनिता उके ने बताया कि सुशीला के अंदर एक ऐसी कला है, जो कई महिलाओं को प्रेरणा दे रही है। यह एक राजमिस्त्री का कार्य करती है। इसने करीब 300 शौचालय और कई ऐसे कार्य किए हैं। जो महिलाओं के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

पंच के बाद स्वच्छता समिति प्रमुख

सुशीला के परिवार में पति के अलावा दो बेटे चोवाराम, मोहित कुमार, एक बहू है। अभी हाल में ही मोहित कुमार की शादी हुई है। 2004 से 2009 तक पंच भी रह चुकी है। अभी महिला कमांडो अध्यक्ष, आंगनबाड़ी स्वच्छता समिति प्रमुख है। पति किसान है।

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