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मर्यादा व संस्कार की शिक्षा देता है रामचरितमानस

दरबारीनवागांव में शनिवार को एक दिवसीय मानस महोत्सव और पंडवानी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

मर्यादा व संस्कार की शिक्षा देता है रामचरितमानस
दरबारीनवागांव में शनिवार को एक दिवसीय मानस महोत्सव और पंडवानी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष जीआर राणा ने कहा कि प्रकृति द्वारा स्वतः एवं स्वाभाविक रूप से प्रदत्त उपहारों का प्रकृति के प्रति आत्मीयता या कृतज्ञता रखते हुये उपभोग करना ही रामराज्य का आदर्श है। वन क्षेत्रों को क्षति न पहुंचे। इतना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी नागरिक को जल जंगल जमीन को बचाने के आगे आना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या न होते हुए भी दशरथ, राम, सीता एवं लक्ष्मण द्वारा समय-समय पर पौध-रोपण कार्य किया गया है। प्रकृति के किसी भी अंग की उपेक्षा करके हम सुखी नहीं रह सकते।

वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश देशमुख ने कहा कि रामचरितमानस ऐतिहासिक रचना है। पूरी दुनिया में इसे पढ़ा जाता है। यह ग्रंथ मर्यादा और संस्कार की शिक्षा देता है। वाईके बारले ने कहा कि रामचरितमानस जीने का ग्रंथ है। अध्यक्षता अपर कलेक्टर एके धृतलहरे ने की। विशिष्ट अतिथि डिप्टी कलेक्टर जीएस नाग वाईके बारले, साहित्यकार जगदीश देशमुख, छगन यदु, राष्ट्रपति पुरूष्कृत शिक्षक सीताराम साहू, अबरार सिद्दिकी, त्रेता चंद्राकर, बीसी देशलहरे, बिसाल जैन, सरपंच ओमीन निर्मलकर रहे।कार्यक्रम में सत्य कबीर मानस परिवार पैरी, श्री रामलला मानस परिवार गुण्डरदेही, गुरुगीता भजन मंडली नरहरपुर, कांकेर गंगा सागर मानस मंडली कोरगांव कोंडागांव, नवदुर्गा मानस प्रचार समिति आमगांव बांधा बाजार, श्री मंगल माधुर्य संपूर्ण बालिका मानस मंडली गुरामी की मंडली ने प्रस्तुति दी। रात में अनुसुईया गंधर्व कृत पंडवानी कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई। इस दौरान सुरेश देशमुख, चंद्र कुमार देशमुख, जोगेश्वर साहू, जीवन साहू, रेवा उर्वशा मौजूद रहे।

उत्साह

दरबारीनवागांव में मनाया मानस महोत्सव, अनुसुईया गंधर्व ने दी पंडवानी की प्रस्तुति, सुनने के लिए जुटे क्षेत्र के श्रद्धालु

बालोद. दरबारी नवागांव में पंडवानी कार्यक्रम की प्रस्तुति देती अनुसुईया गंधर्व।

बिना पर्यावरण राम राज्य की स्थापना संभव नहीं

अपर कलेक्टर एके धृतलहरे ने कहा कि स्वस्थ एवं समृद्ध पर्यावरण के बिना राम राज्य की स्थापना सम्भव नहीं है। जीवन की प्रथम आवश्यकता है शुद्ध वायु। राम राज्य में वायु पूर्णतः शुद्ध थी। रामचरितमानस अच्‍छे रास्‍ते पर चलना सिखाता है। डिप्टी कलेक्टर जीएस नाग ने कहा कि समाज और परिवार व्यवस्था का सबसे अच्‍छा उदाहरण रामचरितमानस है। रामचरितमानस के आदर्श आज भी मौजूद है।

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