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नोटिस जारी होने के बाद 141 राशन दुकान के संचालकों ने कराया अनुबंध

एसडीएम की ओर से नोटिस जारी होने के बाद बालोद ब्लाॅक की 79 और गुरुर ब्लाॅक की 62 राशन दुकान के संचालकों ने अनुबंध करा...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:05 AM IST
एसडीएम की ओर से नोटिस जारी होने के बाद बालोद ब्लाॅक की 79 और गुरुर ब्लाॅक की 62 राशन दुकान के संचालकों ने अनुबंध करा लिया है। एसडीएम ने स्पष्ट कह दिया है कि बिना आदेश व अनुबंध के संचालित होने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिना आदेश पत्र के बालोद ब्लाॅक में 38, गुरुर ब्लाक में 11 उचित मूल्य (राशन) दुकान संचालित हो रही थी। बिना अनुबंध के बालोद ब्लाॅक में 41 और गुरुर ब्लाॅक में 51 राशन दुकानें चल रही थी। दोनों ब्लाॅक में बिना आदेश व अनुबंध के कुल 141 राशन दुकानें संचालित हो रही थी। यह खुलासा तब हुआ था जब एसडीएम ने पिछले साल दौरा कर व रिपोर्ट मंगाकर दोनों ब्लाक के सभी राशन दुकानों के दस्तावेज खंगाले। अधिकांश राशन दुकान के संचालक अनुबंध नहीं कराए थे। अनुबंध के लिए दो पक्षकार का होना जरूरी है लेकिन नियम का पालन ज्यादातर संचालकों ने नहीं किया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद भी खाद्य विभाग के अफसर इस मामले से अनजान रहे। इन दुकानों को खाद्य विभाग ने संचालन की अनुमति दी थी।

70 प्रतिशत दुकान पंचायत से संचालित

जिले में 442 जगह राशन दुकान संचालित हो रही है। जिसमें 70 प्रतिशत यानि 309 राशन दुकानों का संचालन पंचायत के माध्यम से हो रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि शर्त पूरा नहीं करने व जागरूकता के अभाव में स्व सहायता समूह दुकान चलाने में असमर्थ है। शासन के नियमानुसार पहली प्राथमिकता महिला स्व सहायता समूह की होती है। समूह जब तैयार ना हो तो पंचायत दुकान संचालित करती है। दोनों तैयार नहीं होने की स्थिति मार्कफेड दुकान संचालित करती है।

महिला समूह सिर्फ 30% राशन दुकान चला रहे

जिले में राशन दुकान संचालित करने के लिए महिला समूहों को जिम्मेदारी दी गई है लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। जिले में 3 हजार 376 महिला स्व सहायता समूह पंजीकृत है। एक समूह में 15 से अधिक महिलाएं है, यानि 55 हजार 140 महिलाओं के समूह होने के बाद भी अधिकांश जगहों में दुकानों का संचालन पंचायत कर रहे हैं।

अब सभी ने अनुबंध करा लिया है: एसडीएम हरेश मंडावी ने बताया कि बालोद व गुरुर ब्लाॅक में संचालित 141 उचित मूल्य की दुकानों का अनुबंध पहले नहीं हो पाया था। इसके लिए संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। अब सभी ने अनुबंध करा लिया है। आदेश अनुसार ही दुकानों का संचालन किया जा रहा है। पिछले साल कई जगह दौरा करने के बाद खामियां सामने आई थी। इसलिए संबंधित दस्तावेज के साथ अनुबंध, आदेश पत्र जमा करने कहा गया था। इसके बाद सभी ने अनुबंध करा लिया है।

गांव-गांव में समूह तैयार पर चला कोई और रहा

महज 30 प्रतिशत यानि 133 पंचायतों में ही समूह के माध्यम से राशन दुकानें संचालित हो रही है। जबकि गांव-गांव में महिला समूह तैयार किए गए है। एक छोटी गांव में दो से तीन महिला स्व सहायता समूह है। वहीं अधिक आबादी वाले गांव में 10-12 की संख्या में समूह बनी हुई है। इसके नाम की दुकानों का कोई और संचालन कर रहा है।