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मलयालम, तमिल व अंग्रेजी बोलना भी सीख गए

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 02:05 AM IST

Balod News - रविवार को दोपहर 12.30 नगर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर एक दिव्यांग ट्राइसिकल से अपने घर जाने को निकला। दिखने में...

Balod News - chhattisgarh news learned to speak malayalam tamil and english too
रविवार को दोपहर 12.30 नगर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर एक दिव्यांग ट्राइसिकल से अपने घर जाने को निकला। दिखने में तो वह आम दिव्यांगों की तरह लगा। लेकिन इस दिव्यांग की जो प्रतिभा थी, उसे लोगों ने जाना तो हैरान रह गए।

ये शख्स हैं तरौद के सागर सुमन देवांगन (35)। जिनमें ऐसी प्रतिभा छिपी है कि कोई उनकी दिव्यांगता को देखकर विश्वास नहीं कर सकता है कि वे भी ऐसा कर सकते हैं। बचपन से पोलियो के कारण अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते, न चल पाते हैं। बचपन से ट्राइसिकल का सहारा है। पर इतने कठिन हालात में भी वे केरल में चार साल से मैरिज ब्यूरो में काम कर रहे हैं। वहां रहते मलयालम, तमिल व अंग्रेजी बोलना भी सीख गए हैं। मैरिज ब्यूरो में भी दिव्यांगों की एक संस्था है। जहां दिव्यांगों की शादी करवाने का काम होता है। चार साल में सागर ने अपने जैसे 50 से ज्यादा जोड़ों की शादी कराई। वे खुद शादी नहीं करना चाहते हैं।

सागर ने कहा खुद की जिंदगी पर भी गजल लिखी है। रेत में लिखा नाम कभी टिकता नहीं, इसलिए मैं रेत पे नाम लिखता नहीं, लोग कहते हैं कितना पत्थर दिल है, मगर मेरे यारों पत्थरों पे लिखा नाम कभी मिटता नहीं”। अपनी लिखी कविता, गजल व गीतों को वे पुस्तक में प्रकाशित करने का सपना लेकर भी काम कर रहे हैं ताकि उनकी जिंदगी दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहे।

पोलियो से चल नहीं पाते पर अपने पैरों पर खड़ा होने चार साल से केरल में दिव्यांगों की शादी करवा रहे सागर सुमन

जज्बा: कविता गजल भी लिखते हैं, दो छत्तीसगढ़ी जसगीत एलबम भी बना चुके

आम दिव्यांगों की तरह साधारण से दिखने वाले सागर सुमन।

तरौद के दिव्यांग को केरल जाने का ऐसे मिला रास्ता

भिलाई में आस्था बहुउद्देशीय विकलांग संस्था के संस्थापक प्रकाश गेडाम ने बताया दिव्यांग सागर के हुनर को देख मुझे उसे आगे बढ़ाने की जिज्ञासा उठी। इसके लिए पैसों की जरूरत थी। सो मैंने उसे गीत लिखने के साथ काम करते रहने के लिए केरल की संस्था के बारे में बताया और वह काम करने राजी हो गया। सागर ने कहा पैसा जुटाकर सावन बैरी नाम से छत्तीसगढ़ी एलबम बना रहा हूं। खिलौना पइसा के फिल्म बनाने कहानी भी लिख रहा हूं। बड़ा भाई सत्यवान देवांगन कपड़ा बेचता है। पिता जैन कुमार खेती किसानी मजदूरी करते हैं। मां सुशीला बाई का पिछले साल निधन हो गया।

जुंगेरहिन दाई वो एलबम भी हुआ फेमस

सुंदरानी कंपनी की एलबम आई जुंगेरहीन दाई वो इसके शीर्षक व अन्य गीत को दिव्यांग सागर सुमन ने ही लिखा था। जिसे संगीत निर्देशन देने वाले बालोद के इमरान सिद्दीकी ने बताया गाना छग में चर्चित हुआ। सागर सुमन के ही गीत विराजे गंगा मैय्या को अमृता तालुकदार ने गाया।

किसी पर बोझ न बन जाऊं इसलिए कमाने जाता हूं

सागर ने कहा मेरे शिक्षक स्व. बंशी लाल भारद्वाज(अमलीडीह) व चतुर सिंह साहू (पाररास) प्रेरणास्रोत हैं। पढ़ाई के दौरान मेरी दिव्यांगता को देख दोनों शिक्षक मुझे अपने हुनर को पहचाने के लिए प्रेरित करते थे ताकि मैं भी अपने पैरों पर खड़ा हो सकूं। कविता, गीत लिखने में प्रतिभा को देख शिक्षकों ने मुझे इसे जिंदगी जीने का जरिया बनाने कहा। गरीबी व दिव्यांगता के कारण तरौद के देवी रामबति स्कूल में 10 वीं तक पढ़ पाया। गाने भी लिखता रहा।

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