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माघी पुन्नी मेला कल से शुरू, 19 को शाही स्नान पर नदी व घाट की नहीं हुई सफाई

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 02:05 AM IST

Balod News - जिला मुख्यालय बालोद से 22 किमी दूर ग्राम चौरेल (कुरदी) के गौरेयाधाम में 15 से 19 फरवरी तक माघी पुन्नी मेला (छोटा कुंभ)...

Balod News - chhattisgarh news maghi pini mela starting from tomorrow 19th on the royal bath the river and no cleanliness of the ghat
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जिला मुख्यालय बालोद से 22 किमी दूर ग्राम चौरेल (कुरदी) के गौरेयाधाम में 15 से 19 फरवरी तक माघी पुन्नी मेला (छोटा कुंभ) लगेगा। मुख्य शाही स्नान व मेला 19 फरवरी को सुबह 5 बजे होगा। हर साल मेला व स्नान में कई जिले के एक लाख से ज्यादा लोग यहां जुटते हैं। जिसकी तैयारी एक हफ्ते पहले से शुरू हो गई है। 2008 से इस धाम को शासन ने धार्मिक पर्यटन स्थल में शामिल किया है। लेकिन शासन इसका अब तक पूरा विकास नहीं कर पाया है। पांच दिन बाद हजारों लोग यहां तांदुला नदी में स्नान करेंगे। लेकिन नदी की सफाई हुई है, न घाट बन पाए हैं। कई साल से घाट व पिचिंग बनाने के लिए ग्रामीण शासन व पर्यटन मंडल से मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। इससे मेले में आने वाले लोगों को स्नान दान व अन्य काम में दिक्क्त होती है।

श्री विमल वैदिक सेवा आश्रम पैरी में 51 कुंडीय गायत्री यज्ञ 17 से 19 तक होगा। 18 को नि:शुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर होगा। 18 फरवरी की रात 10 बजे जंवारा पेण्ड्री (गुंडरदेही) के कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी। 17 से 19 तक रामायण मेला भी होगा। बता दें कि मुख्य मेला में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

पर्यटन स्थल:पिचिंग की मांग नहीं हुई पूरी, लाइटिंग भी नहीं

बालोद. तांदुला नदी का किनारा जहां न सफाई हुई, न पिचिंग।

गौरेय्या पक्षी, गौरी माता व शिव से जुड़ी है कहानी

बुजुर्गों के अनुसार यहां मेला कब से शुरू हुआ, किसी को पता नहीं। लेकिन इस धाम का नाम गौरेया क्यों पड़ा, इसके पीछे पीढ़ियों से ये कहानी बताई जाती है कि यहां सभी देवी-देवता तीर्थ भ्रमण करते हुए शिवरात्रि में आए और समाधि में लीन हो गए। भगवान शिव ने समाधि खुलने के बाद यह देखा कि माता गौरी व गौरैया पक्षी अपने हाथों में चंवर (चावल) लिए प्रभु की भक्ति में लीन हैं।

15 से 19 तक रोज 12 से 5 बजे तक चलेगी शिव कथा

श्री गौरेया धाम चौरेल में 15 से 19 फरवरी तक मांघी पुन्नी मेला लगेगा। जहां पांच दिन श्री शिव कथा होगी। प्रवचनकर्ता रितेशानंद महाराज ग्राम बरगा थानखम्हरिया (बेमेतरा) होंगे। 18 फरवरी की रात 10 बजे प्रसिद्ध कवि व गीतकार स्व लक्ष्मण मस्तूरिया की श्रद्धांजलि में सांस्कृतिक कार्यक्रम लोक धुन राजनांदगांव की प्रस्तुति होगी। 19 फरवरी को मुख्य मंदिर में रुद्राभिषेक, शाही स्नान सुबह 5 बजे से होगा। दिनभर मेला लगेगा। मोहलाई में कबीर सत्संग समागम होगा। सात्विक यज्ञ, सामूहिक चौका आरती होगी। यह आयोजन 17 से 19 फरवरी तक कबीर घाट मोहलाई में चलेगा। जिसके प्रवचनकर्ता ज्योतिकुंज मुरमंदा कुम्हारी के संत श्री महात्मा लेख चंद साहेब होंगे। 18 फरवरी की रात को हास्य कवि सम्मेलन होगा। जिसमें सीताराम साहू, केशव साहू व अन्य साथी प्रस्तुति देंगे। मेला स्थल पर रात में लाइट की भी कोई व्यवस्था नहीं रहती।

तांदुला नदी मोहलाई व पैरी घाट से भी जुड़ा पर नहीं ले रहे सुध

ग्रामीण राजेंद्र देशमुख, मोनेश हिरवानी, तुकेश्वर ठाकुर ने कहा धाम में तीन गांव के बीच विविध आयोजन होते हैं। मुख्य आयोजन चौरेल में होता है।तांदुला नदी मोहलाई व पैरी घाट से भी जुड़ा है। तीनों इलाके के बीच तांदुला नदी संगम के रूप में हैं। यहां कोंगनी की ओर से लोहारा नाला व भोथली से जुझारा नदी भी मिलती है। तीन गांवों के बीच तीन नदियों का संगम होता है। अब तक किसी ने नदी की सफाई नहीं कराई। बिना सफाई के ही पिछले दिनों मोहलाई स्टॉपडैम का गेट खोल दिया गया। जहां लोग नहाते हैं वहां पिचिंग भी नहीं बन पाई, न कोई सीमेंटीकरण हुआ है।

8 वीं से 11 वीं शताब्दी की हैं यहां 132 मूर्तियां

इस धाम में स्थित एक प्राचीन बावड़ी में खुदाई से 8वीं से 12वीं सदी की लगभग 132 पाषाण मूर्तियां निकली है। जिन्हें मंदिर प्रांगण में रखा है। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक परिदृष्टि से यह क्षेत्र फणी नागवंशी शासकों के अधीन था। यहां से प्राप्त मूर्तियों व भोरमदेव मंदिर में स्थित मुर्तियों में साम्यता है। प्राचीन मंदिरों का विशिष्ट समूह है। यहां राम-जानकी मंदिर, भगवान जगन्नाथ मंदिर, ज्योतिर्लिंग दर्शन, दुर्गा मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, बूढ़ादेव मंदिर, संत गुरु घासीदास मंदिर, संत कबीर मंदिर, वैदिक आश्रम हैं।

फंड की कमी इसलिए विकास नहीं हो पा रहा

गौरेया मंदिर समिति के अध्यक्ष लवण चंद्राकर ने कहा 2008 से पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद शासन से हमें सिर्फ सालाना एक लाख रुपए ही अनुदान मिल पाता है। इतना पैसा तो रंगरोगन व छोटे काम में खर्च हो जाते हैं। विधायक के जरिए पत्र लिखवाकर पर्यटन मंडल से पांच लाख रुपए अनुदान दिलाने की मांग की गई है। लेकिन मिला नहीं। मेला स्थल परलाइटिंग, पिचिंग, घाट बनाने की जरूरत है।

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