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दो जिले की सीमाओं पर बसे नक्सल क्षेत्र में होता है मैच

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 02:07 AM IST

Balod News - जिले के महामाया थाने की पुलिस ग्रामीणों से अपनी दोस्ती बढ़ाने व नक्सलियों का खौफ दूर करने के लिए क्रिकेट व कबड्डी...

Balod News - chhattisgarh news naxal area is situated on the boundaries of two districts
जिले के महामाया थाने की पुलिस ग्रामीणों से अपनी दोस्ती बढ़ाने व नक्सलियों का खौफ दूर करने के लिए क्रिकेट व कबड्डी का सहारा लेती है।

ये बात जानकर थोड़ा अजीब तो हर कोई को लगता है, लेकिन पुलिस यही तरीका अपनाकर तीन साल में अपने इलाके में लोगों के बीच से नक्सलियों का खौफ दूर कर रही है। जिले को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया गया है तो उसकी वजह है सिर्फ महामाया थाना। जो राजनांदगांव के मानपुर व मोहला जैसे धुर नक्सल ब्लाॅक के जंगलों से लगा हुआ है।

पुलिस को भलाई करने वाला समझें :- पड़ोस के इलाके में नक्सली उत्पात होता रहता है, जिसका असर महामाया क्षेत्र में भी रहता है। ऐसे में यहां की पुलिस के सामने ये चुनौती बनी रहती है कि कभी नक्सली घटना हो तो उससे कैसे निपटें और ग्रामीणों की सोच को भी कैसे पॉजिटिव बनाए रखें। सो पुलिस उन्हें खेल-खेल में दोस्ती बढ़ाकर विश्वास में लेती है ताकि वे पुलिस को अपना भला करने वाला और नक्सलियों को नुकसान करने वाला समझें।

क्रिकेट और कबड्‌डी के सहारे यहां पुलिस गांठ रही ग्रामीणों के साथ दोस्ती, मकसद नक्सलियों का खौफ खत्म करना, तीन साल में बदला धुर नक्सल ब्लॉक का माहौल

तीन साल से आयोजन, इस बार ये टीमें बनीं विजेता

खड़गांव थाना क्षेत्र व महामाया क्षेत्र दोनों में आने वाले 15 से ज्यादा गांव के ग्रामीणों के बीच ट्राॅफी में बाकायदा इनाम भी दिया जाता है। पुलिस वाले भी अपने वेतन से चंदा करते हैं। इस बार महामाया ट्राॅफी पुसावड़ (डौंडी) की टीम ने जीती। इसी तरह क्रिकेट में खड़गांव (राजनांदगांव) के महिला पुरुष दोनों टीम जीते। क्रिकेट में 12 हजार व 6 हजार व कबड्डी में 5 हजार व 3 हजार रुपए प्रथम द्वितीय इनाम दिया जाता है।

ऐसी व्यवस्था: पुलिस के वेतन से चंदा कर देते हैं इनाम

बालोद. महामाया ट्राॅफी इस बार पुसावड़ की टीम जीती।

ग्रामीणों में आई जागरूकता: महामाया ग्रामीण समिति के अध्यक्ष शोभित राम मंडावी ने कहा इस खेल के जरिए ग्रामीणों व पुलिस के बीच दोस्ती बढ़ी। वरना चार साल पहले क्षेत्र के गांवों में नक्सलियों की आवाजाही से दहशत में ग्रामीण पुलिस वालों से भी बात करने से घबराते थे। धीरे- धीरे ग्रामीणों ने पुलिस का साथ देना शुरू किया और नक्सलियों ने इलाके से अपना तंबू उखाड़ लिया। जो जंगलों में ठिकाना बनाकर रहते थे। खेल के जरिए दोनों जिले के नक्सल प्रभावित 15 से ज्यादा गांव के ग्रामीण नजदीक आते हैं। इसे ग्रामीणों के बीच भी दोस्ती बढ़ती है।

टीआई ने ही निकाली तरकीब, कैम्प लगाकर गश्ती शुरू करने के बाद बंद हुई यहां पर नक्सलियों की आमद

महामाया के टीआई मनोज बंजारे ने ही इस तरह खेल के जरिए लोगों को पुलिस के करीब लाने व नक्सलियों से आगाह करने के लिए तरकीब निकाली। तीन साल पहले उन्होंने ये बात गांव बैठक में रखी। ग्रामीण इस तरकीब को अपनाने तैयार हो गए। तब से आज तक साल में एक बार दिसंबर या फिर जनवरी में महामाया ट्राॅफी का आयोजन किया जाता है। टीआई ने बताया क्षेत्र के नारंगसुर सहित आसपास के गांव को नक्सलियों ने कुछ साल पहले छिपने का ठिकाना बना दिया था। गांव वाले जान के डर से पुलिस को खबर नहीं करते थे। लेकिन कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाई और हमने गांवों में कैंप लगाकर गश्त करना शुरू किया तो नक्सलियों की आवाजाही बंद हो गई। अब ग्रामीण निश्चिन्त होकर रहते हैं। नक्सलियों का खौफ खत्म हुआ पुलिस से उनकी दोस्ती बनी रहे। इसलिए पॉजिटिव माहौल बनाए रखने क्रिकेट व कबड्डी का आयोजन कराया जाता है।

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