विश्व शांति के लिए मंत्रों के साथ दी आहुति, कराए विविध संस्कार

Balod News - गायत्री शक्तिपीठ में बुधवार को गायत्री जयंती व गंगा दशहरा पर पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ व समाज में अच्छे कार्य...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 06:40 AM IST
Balod News - chhattisgarh news sacrifices offered with mantras for world peace
गायत्री शक्तिपीठ में बुधवार को गायत्री जयंती व गंगा दशहरा पर पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ व समाज में अच्छे कार्य कर रहे यज्ञाचार्यों का सम्मान किया गया। देवकन्याओं ने वेदमंत्रों के साथ संगीतमय प्रस्तुति दी गई। विभिन्न निशुल्क संस्कार कराए गए। विश्व शांति के लिए गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र की आहुति दी गई।

यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डालते हुए मंदिर परिव्राजक कृपाराम यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति का उद्गम, ज्ञान-गंगोत्री गायत्री ही है। भारतीय धर्म का पिता यज्ञ को माना जाता है, गायत्री को सद्विचार और यज्ञ को सत्कर्म का प्रतीक मानते हैं। इन दोनों का सम्मिलित स्वरूप सद्भावनाओं व सत्प्रवृत्तियों को बढ़ाते हुए विश्व शांति व मानव कल्याण का माध्यम बनता है और प्राणिमात्र के कल्याण की संभावना बढ़ती है। यज्ञ शब्द के तीन अर्थ हैं देवपूजा, दान, संगतीकरण। संगतिकरण का अर्थ है संगठन। यज्ञ का तात्पर्य है त्याग, बलिदान, शुभकर्म।

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बालोद. यज्ञ में शामिल गायत्री परिवार के लोग।

गोबर-गौमूत्र से बने उत्पाद लोगों तक पहुंचे यही प्रयास

चौथा स्वावलंबन आंदोलन के माध्यम से छोटे-छोटे कुटीर उद्योग को स्थापित करने का प्रयास, गौ-पालन से गौ आधारित कृषि व इनसे उपलब्ध गोबर-गौमूत्र से बने उत्पाद लोगों तक पहुंचे। पर्यावरण आंदोलन, नारी जागरण, व्यसन मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य अतिथि पदमिनी साहू कहा कि व्यक्ति, परिवार को संस्कारवान होना चाहिए। केशर देवांगन ने राष्ट्र निर्माण के लिए अपने समय, प्रभाव, ज्ञान, पुरुषार्थ को लगाए रहने की बात कहीं।

नपाध्यक्ष, ट्रस्टी ने दी जनजागृति अभियान की जानकारी

मुख्य अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष पदमिनी साहू थीं। विशेष अतिथि लोचन राम साहू, मंदिर मुख्य ट्रस्टी श्यामा साहू, केशर साव, ब्लाॅक समन्वयक आरपी यादव आदि ने जन जागृति अभियान की जानकारी दी।

जीवन में उपासना, साधना आराधना ये 3 चीजें जरूरी

जिला समन्वयक राजेंद्र कुमार सिन्हा कहा कि अखिल विश्व गायत्री का उद्देश्य मानव में देवत्व का उदय व धरती पर स्वर्ग का अवतरण इसी संकल्प को लेकर सातसूत्री कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सात आंदोलन चला रहे हैं। पहला साधना आंदोलन है। इसका तात्पर्य जीवन साधना से है, जो कि व्यापक अर्थों वाला शब्द है। जीवन साधना शब्द में उपासना, साधना, आराधना नाम की तीन क्रियाएं हैं। इन तीनों को साधने में लग जाएं तो उसे साधना करना कहते हैं। दूसरा स्वास्थ्य आंदोलन में स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन, सभ्य समाज बनाएंगे पर आधारित यह आंदोलन प्रत्येक नागरिक को उन्हीं के संसाधनों के अंतर्गत स्वस्थ जीवन जीने के सूत्र प्रदान करता है। तीसरा शिक्षा आंदोलन-स्वतंत्र भारत की आधी शताब्दी निकल जाने के बाद आज भी अशिक्षा जड़ें जमाए बैठी है। शिक्षा के अभाव में अशिक्षित का जीवन बोझिल बना हुआ है। इसके निदान के लिए पहल जारी है।

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