बच्ची को निमोनिया होने पर झगड़ते थे पति-पत्नी, हुए एक

Balod News - शनिवार को कुटुम्ब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 28 में से 19 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जहां कई रोचक भी...

Jul 14, 2019, 06:45 AM IST
शनिवार को कुटुम्ब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 28 में से 19 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जहां कई रोचक भी मामले सामने आए। पारिवारिक, भरण पोषण मामलों का निराकरण जज श्री वासनीकर की सुलह से किया गया। वर्तमान में जिला बालोद में कुटुम्ब न्यायालय स्थाई रूप से नहीं है। छत्तीसगढ़ शासन, विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक माह के द्वितीय सप्ताह में दुर्ग कुटुम्ब न्यायालय के अधिकारी एवं कर्मचारी श्रृंखला न्यायालय के तहत बालोद जिले के पारिवारिक प्रकरणों का निराकरण करने के लिए आते हैं। वर्तमान में कुटुम्ब न्यायालय में कुल 352 प्रकरण लंबित हैं। माह अगस्त में कुटुम्ब न्यायालय में 5 से 9 अगस्त तक विभिन्न मामलों में सुनवाई होगी। जुलाई में कुल 44 प्रकरण निराकृत हुए।

कराया समझौता: 19 मामलों का किया गया निराकरण

केस 1- खाना बनाने व काम करना नहीं आता कहकर मारते थे ताना

रनचिरई थाना के एक गांव की 21 वर्षीय महिला का विवाह 23 वर्षीय युवक के साथ अप्रैल 2017 में हुआ था। विवाह के बाद वह ससुराल जिला धमतरी गई। 15 दिनों बाद आवेदिका के पति व उसके परिवार वाले घरेलू बात को लेकर लड़ाई-झगड़ा करने लगे, कि तुम्हें खाना बनाने नहीं आता, घर का काम करने नहीं आता, तुम्हारे मां-बाप ने क्या सिखाया है इस प्रकार परेशान करने लगे। आवेदिका की शिकायत पर महिला परामर्श केन्द्र बालोद में दोनों के मध्य समझौता हुआ और आवेदिका फिर से ससुराल गई।

केस 3- छोटी बच्ची की खातिर पति-प|ी हुए एक

बालोद तहसील अंतर्गत एक गांव में 24 वर्षीय महिला का विवाह, भिलाई निवासी 30 वर्षीय व्यक्ति से मई 2017 में हुआ था, जो वर्तमान में जिला राजनांदगांव में आरक्षक के पद पर पदस्थ है। उनकी एक पुत्री का जन्म हुआ, जिसकी वर्तमान उम्र एक वर्ष है । ससुराल में आवेदिका का अनावेदक एवं उसके परिवार वालों से छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था। जिससे परेशान होकर प|ी अपनी एक वर्षीय पुत्री सहित मई 2019 से अपने मायके आ गई और पति के विरुद्ध भरण-पोषण राशि दिलाए जाने आवेदन पत्र पेश की। नेशनल लोक अदालत की खण्डपीठ में दोनों पति-प|ी से सुलहवार्ता की गई, जहां विवाद का कारण बताया गया कि पुत्री को निमोनिया हो गया था।

केस 2- महिला नहीं दे रही थी सास-ससुर को भरण-पोषण राशि

डौंडीलोहारा तहसील के एक गांव से सास-ससुर ने आवेदन दिया था। जिस पर सुनवाई कर सुलह कराया गया। आवेदक के पुत्र का विवाह मोहला तहसील निवासी अनावेदिका से 15 वर्ष पहले हुआ था। 2007 में एक पुत्री का जन्म हुआ। अनावेदिका का पति शिक्षाकर्मी था, जिसकी मार्च, 2010 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। जिसके बाद उसकी प|ी को सहायक शिक्षक के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। अनावेदिका ने आवेदक का समुचित भरण-पोषण करने का वचन दिया था।

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