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अासक्ति व स्वार्थ दोनों ही परमात्मा से मिलने में बाधा है: पंडित गोपेश शरण

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:50 AM IST

Balod News - गायत्री मंदिर चौक में श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन पंडित गोपेश शरण देवाचार्य ने भगवत गीता व तुलसी वर्षा का प्रसंग...

Devri Bangla News - chhattisgarh news unity and selfishness are both obstacles in meeting with god pandit gopesh saran
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गायत्री मंदिर चौक में श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन पंडित गोपेश शरण देवाचार्य ने भगवत गीता व तुलसी वर्षा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि आशक्ति व स्वार्थ ही परमात्मा से मिलने में बाधा है। आदमी स्वार्थ पूर्ति के लिए ही भक्ति करता है और स्वार्थ पूरा होने के बाद भक्ति बंद कर देता है। स्वार्थी व्यक्ति का कोई प्रभाव नहीं, स्वार्थी को कोई महत्व नहीं देता है। इसलिए हमारे विचार हमेशा सकारात्मक होना चाहिए। हमारा मन अगर निर्मल है तो हमारी काया भी निर्मल होगी तो हम अपने आप सत्कर्म करेंगे। मोह-माया से प्राणी को हमेशा दूर रहना चाहिए।

नर्मदाधाम में भी चल रही कथा: सुरसुली नर्मदाधाम में नर्मदा मैय्या प्रांगण में श्रीमद भागवत कथा दीदी अंजु शर्मा सुना रही है। दीदी ने कहा कि राग व द्वेष ही जीव के दुख का कारण है। इन्ही के कारण जीव भटकता है। भागवत कथा भक्त और भगवान की कथा है। भागवत कथा सुनने से पुण्य फल मिलता है। श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक, आध्यात्मिक विकास होता है। अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है।

भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है: भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई, कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। यह मुक्तिदाता है।

पंडित गोपेश शरण

इसी से मोक्ष: भागवत कथा प्रवचन सुनने से मिलता है पुण्य

देवरीबंगला. गायत्री मंदिर चौक में प्रवचन सुनतीं महिलाएं।

संस्कारवान बनाएं, सत्संग कथा के लिए करें प्रेरित

सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। वरना वह इस संसार में आकर मोह-माया के चक्कर में पड़ जाता है। इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। आज हमारे यहां भागवत रूपी रास चलता है, परंतु मनुष्य दर्शन करने को नहीं आते। वास्तव में भगवान की कथा के दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं।

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