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सभी सरकारी अस्पतालों में नहीं है सोनोग्राफी मशीन

जिले में सभी ब्लाक मुख्यालय के सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है। बाकी...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:05 AM IST
जिले में सभी ब्लाक मुख्यालय के सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है। बाकी मशीनों को आॅपरेट करने वालों की कमी है। रोजाना सैकड़ों लोग इस उम्मीद से पहुंच रहे हैं कि यहां बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। 32 साल पहले जब अस्पताल खोले गए थे, तब मशीनें उपलब्ध कराई गई थी।

बालोद के अस्पताल में डिजिटल एक्सरे, ईसीजी, बायस आॅपरेटर, ओपीजी, डेंटल सहित अन्य मशीनों के लिए आपरेटरों की कमी है। ऐसा ही हाल ब्लाॅक मुख्यालय में संचालित हो रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का है, जहां लोगों को सुविधा देने के लिए मशीन ही उपलब्ध नहीं है। एक जनवरी 1985 में शासन के माध्यम से मिली ज्यादातर मशीनें अभी बंद है, जो चालू है, उनका भी भरोसा नहीं है कि कब तक चलेगी। मशीन, पर्याप्त स्टाफ व सुविधा के अभाव में लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। जो इलाज व जांच की सुविधा शासकीय अस्पतालों में 100 रुपए में मिल सकता है। उसके लिए प्राइवेट अस्पताल जाकर 500 रुपए से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। सीएमएचओ डाॅ. ज्ञानेश चौबे का कहना है कि सोनोग्राफी मशीन की मांग शासन से की गई है। बाकी मशीनों से जांच की सुविधा मिल रही है। कई जगह स्टाफ की कमी है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

असुविधा

जिले में सभी ब्लॉक मुख्यालय के सरकारी अस्पतालों में 32 साल पहले जो मशीनें दी गई उसे ऑपरेट करने वालों की कमी

ऐसे समझें वास्तविक स्थिति और किस तरह लोग हो रहे हैं परेशान

1. जिला अस्पताल: जिला अस्पताल में रविवार को छोड़ सप्ताह के छह दिन रोजाना 200 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। जिसमें 70-80 लोग सोनोग्राफी मशीन, डिजिटल एक्सरे मशीन में जांच करवाने आते हैं। लेकिन सोनोग्राफी व डिजिटल एक्स-रे मशीन बंद है। जो नई मशीन पहुंची है, उसे चालू करने इंजीनियर का इंतजार हो रहा है। आॅपरेट करने रेडियोलाजिस्ट और एक सहायक पदस्थ है।

4. डौंडी स्वास्थ्य केंद्र: जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डौंडी में सोनोग्राफी मशीन नहीं है। बायस आॅपरेटर मशीन थी, जिसको कुछ माह पहले जिला अस्पताल भिजवाएं हैं। दो एक्सरे मशीन है। जिसमें एक मशीन एक जनवरी 1985 का है, जो अब बंद है।

2. गुरुर स्वास्थ्य केंद्र: जिला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर गुरुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी मशीन नहीं है। एक्स-रे, बायस आॅपरेटर मशीन चालू अवस्था में है। ईसीजी मशीन है लेकिन आॅपरेट करने वाला नहीं है। 8 विशेषज्ञ, मेडिकल आॅफिसर के पद रिक्त है। सुविधाओं का अभाव है। इमरजेंसी केस आने पर जिला अस्पताल या धमतरी के प्राइवेट अस्पताल रेफर किया जाता है।

5. डौंडीलोहारा स्वास्थ्य केंद्र: जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डौंडीलोहारा का हाल बेहाल है। यहां सोनोग्राफी, एक्सरे मशीन की सुविधा ही नहीं है। स्टाफ की भी कमी है। 8 विशेषज्ञ, एमबीबीएस डाॅक्टरों के पद रिक्त हैं।

3. गुंडरदेही स्वास्थ्य केंद्र: जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से लोग परेशान हो रहे हैं। पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में यहां के स्टाफ लोगों को सलाह देते हैं कि जिला मुख्यालय या दुर्ग के अस्पताल में बेहतर इलाज कराएं, क्योंकि जरूरी मशीन ही उपलब्ध नहीं है। एक्सरे मशीन है लेकिन इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

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