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49 साल तक लकड़ी के रथ पर यात्रा निकाल बांटते थे गजामूंग

शनिवार को रथयात्रा है। बालोद में पंचायती राज के दौर में रथ लकड़ी का बनता था और जनसहयोग यानि चंदा करके लोग यात्रा...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:05 AM IST
शनिवार को रथयात्रा है। बालोद में पंचायती राज के दौर में रथ लकड़ी का बनता था और जनसहयोग यानि चंदा करके लोग यात्रा निकालकर प्रसाद के रुप में गजामूंग बांटते थे। 1958 से 2006 तक लकड़ी की रथ से यात्रा निकाली गई। इसके बाद भिलाई से लोहे का रथ खरीदा गया। अब इसी को सजाकर अब तक बालोद के सार्वजनिक जगहों में भ्रमण कराया जाता है। पहले और अब का स्वरूप बदल चुका है। यात्रा निकालने से लेकर प्रसाद बांटने की जिम्मेदारी नगर पालिका की होती है

भले ही अब बालोद को दर्जा मिल गया है। लेकिन आज भी लोग पुराने दिनों को याद करते है। जब लकड़ी के रथ बनाए जाते थे, जो हर साल टूट जाता था। रखरखाव के अभाव में जब बार-बार रथ टूटने लगा तो नगर पालिका की ओर से भिलाई से लोहे का रथ खरीदकर लाया गया। जिसे सजाकर निकाला जाता है। आज रथ यात्रा का दिन है। पांडेपारा से निकलती थी रथयात्रा- रथयात्रा समिति के सचिव प्रेमचंद क्षीरसागर ने बताया कि 1958 की बात है जब पहलवान पांडेपारा निवासी प्रधानपाठक वीरेंद्र कुमार आर्य ने सबसे पहले रथयात्रा का जिम्मा उठाया। लोगों की भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की रथयात्रा में दिलचस्पी न लेता देख आर्य ने यह जिम्मा खुद ही उठा लिया।

श्री आर्य ने सन् 1958 से लगातार कई वर्षों तक इसकी जिम्मेदारी निभाई। पहले रथयात्रा समिति के खुद ही अध्यक्ष थे। पांडेपारा के कुछ लोगों को इस रथयात्रा में शामिल कर खुद ही इसका नेतृत्व करने लगे। तब यह रथयात्रा पांडेपारा से निकलती थी। समय के साथ यह रथयात्रा नयापारा व फिर अब कपिलेश्वर से निकालने लगी।

स्वास्थ्य गिरने की वजह से नगर पालिका को सौंपा जिम्मा

श्री आर्य की उम्र अधिक हो जाने के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। तत्कालीन नपाध्यक्ष राकेश यादव के पास जाकर उन्होंने रथयात्रा की जिम्मेदारी को न संभाल पाने की बात कही। फिर ट्रस्टी व बैंक के सारे कागजात व अन्य जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन को सौंप दिया। तब से अब तक नगरपालिका के तत्वावधान में रथयात्रा निकलती है।

स्व. वीरेंद्र आर्य

शहर में आज निकलेगी रथयात्रा

शनिवार को शहर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की रथयात्रा कपिलेश्वर मंदिर से निकाली जाएगी। इसके पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की जाएगी। यात्रा हलधर नाथ चौक, मोखला मांझी, जय स्तंभ चौक, नया बस स्टैंड, दल्ली चौक, फौवारा चौक, सदर बाजार होते हुए बुधवारी बाजार तक पहुंचेगी।

मंदिर बनाने किया गया भूमिपूजन पर नहीं बना

तत्कालीन नपाध्यक्ष राकेश यादव ने जगन्नाथ भगवान की मंदिर बनवाने के लिए भूमिपूजन शीतला सांई धाम के बगल में किया था। संतोष पाढ़ी ने 51 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। इसके अलावा कई दानदाताओं ने अपने इच्छानुसार पैसे दिए। छोटेलाल चंद्राकर, राज सोनी, तरूण बड़तिया, तुलसी यादव व दीपक देवांगन का भी सहयोग रहा। लेकिन मंदिर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।