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शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 27 दिन बीते, 11 शासकीय काॅलेजों में 113 सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त

शैक्षणिक सत्र शुरू लेकिन पढ़ाई नहीं, ऐसा हाल सभी काॅलेजों का है। जिले के शासकीय काॅलेजाें में शैक्षणिक सत्र 2018-19...

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 02:05 AM IST
शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 27 दिन बीते, 11 शासकीय काॅलेजों में 113 सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त
शैक्षणिक सत्र शुरू लेकिन पढ़ाई नहीं, ऐसा हाल सभी काॅलेजों का है। जिले के शासकीय काॅलेजाें में शैक्षणिक सत्र 2018-19 शुरू हुए 27 दिन बीत चुके है। लेकिन अब तक सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदों को भरने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती नहींं हो पाई है। कारण अब तक शासन व उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भर्ती को लेकर आदेश पत्र नहीं आया है। लिहाजा प्रबंधन आदेश आने का इंतजार कर रहा है और पढ़ाई भी शुरू नहीं हो पाई है। प्रबंधन तर्क दे रहा है कि 16 जून से सत्र शुरू होता है लेकिन जुलाई तक एडमिशन चलता है इसलिए नियमित कक्षाएं अभी नहीं लग रही है। दरअसल 31 मई से सत्र शुरू हो जाता है। एक जुलाई से नियमित कक्षाएं लगती हैं लेकिन इस बार देरी हो रही है। पिछले साल जुलाई के पहले सप्ताह में ही उच्च शिक्षा आयुक्त की ओर से प्रबंधन को आदेश जारी कर दिया था कि रिक्त पदों के हिसाब से अतिथि व्याख्याता की भर्ती करें। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। अभी सिर्फ सभी जगहों में फर्स्ट ईयर के लिए एडमिशन का दौर चल रहा है। अब तक ओवरआॅल सभी काॅलेजों में निर्धारित सीट की अपेक्षा 48 प्रतिशत स्टूडेंट ही एडमिशन ले पाए हैं।

स्टूडेंट नहीं पहुंच रहे तो किसे पढ़ाएं- गुरुवार को दोपहर 12.30 बजे भास्कर टीम लीड काॅलेज में पहुंची तो कक्षाओं में पढ़ाई नहीं हो रही थी। इक्का-दुक्का स्टूडेंट काउंटर के पास एडमिशन के लिए जरुरी दस्तावेज जमा कर रहे थे। पढ़ाई को लेकर जब एक प्रोफेसर से पूछा गया तो वे तर्क देने लगे कि अभी स्टूडेंट ही काॅलेज में पढ़ाई करने नहीं पहुंच रहे हैं, तो किसे पढ़ाए।

छात्र परेशान: अब तक अतिथि व्याख्याता की नियुक्ति के लिए आदेश नहीं, पढ़ाई शुरू नहीं, परीक्षा परिणाम पर असर

बालोद. शासकीय लीड काॅलेज बालोद में अभी एडमिशन लेने पहुंच रहे स्टूडेंट, यहां सहायक प्राध्यापक के 21 पद रिक्त हैं।

ऐसे समझें आखिर क्यों नहीं हो रही पढ़ाई अभी

1. परीक्षा परिणाम नहीं आया: यूनिवर्सिटी ने अब तक बीए, बीएससी, बीकाँम सहित अन्य संकाय के फर्स्ट, सेकंड ईयर का परीक्षा परिणाम यानि रिजल्ट जारी नहीं किया है। फाइनल ईयर का रिजल्ट जारी हुआ है। ऐसे में प्रबंधन व स्टूडेंट परिणाम आने का इंतजार कर रहे हैं।

जिनमें स्टूडेंट की दिलचस्पी, उसमें ही पढ़ाने वालों का टोटा बना हुआ

केमेस्ट्री, फिजिक्स, राजनीति विज्ञान, माइक्रो बायोलाँजी, हिन्दी, अंग्रेजी, इतिहास सहित अन्य विषयों के सहायक प्राध्यापकों की कमी है। जबकि इन्हीं विषयों के आधार पर स्टूडेंट एडमिशन लेते हैं। वहीं खेरथा काॅलेज में स्वीकृत 10 में दो पद पर ही भर्ती हो पाई है। इसी के भरोसे काॅलेज संचालित हो रही है। अतिथि व्याख्याता का सहारा लेते है।

सही जानकारी नहीं मिल रही: हकीकत यह है कि प्रबंधन ही अभी पढ़ाई कराने के पक्ष में नहीं है। इसलिए स्टूडेंट को एडमिशन लेने के दौरान किसी प्रकार की जानकारी नहीं दे रहे हैं कि कब से कक्षाएं लगेंगी। इसका कारण यह बता रहे हैं कि अभी कम स्टूडेंट ही एडमिशन लेने पहुंच रहे हैं, पढ़ाई शुरू कराएंगे तो बाद में आने वाले स्टूडेंट को नए सिरे से पढ़ाना होगा, ऐसे में पहले पढ़ने वाले स्टूडेंट को समय व्यर्थ हो जाएगा।

2. अतिथि व्याख्याता की भर्ती नहीं : आदेश नहीं आने का हवाला देकर अब तक अतिथि व्याख्याता की भर्ती प्रबंधन की ओर से नहीं की गई है। स्टूडेंट भी अपना तर्क लगा रहे है कि अभी काँलेज जाएंगे तो कोई मतलब नहीं है क्योंकि पढ़ाने वाले नहीं है।

यूनिवर्सिटी बदली पर समस्या नहीं हुई दूर

नियमित स्टाफ नहीं होने के कारण पड़ रहा है प्रतिकूल प्रभाव

पढ़ाई प्रभावित, परीक्षा परिणाम पर असर, विषय के हिसाब से प्राध्यापकों की कमी के चलते मजबूरी में अधिकांश स्टूडेंट कला संकाय में एडमिशन ले रहे हैं। इस बार परिणाम नहीं आया है। इसलिए प्रबंधन कह रहा है कि पिछले साल जो परिणाम आया हो, उससे कोई मतलब नहीं। इस बार परिणाम बेहतर आएगा। मेरिट के आधार पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती होगी।

भले ही पहले पंडित रविशंकर यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहे जिले के सभी काँलेज दुर्ग यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आ चुके है। लेकिन पुरानी समस्या दूर नहीं हुई है। स्टूडेंट कह रहे है यूनिवर्सिटी बदलने से क्या होगा, नियमित प्राध्यापकों की भर्ती हो तो पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा। प्रबंधन कह रहे प्राध्यापकों के रिक्त सीटों को भरने प्रस्ताव भेजते है और उच्च शिक्षा विभाग का फरमान आता है कि अतिथि व्याख्याता की भर्ती कर पढ़ाई शुरू कराएं। इस सत्र में भी ऐसा ही होगा।

2. पढ़ाने वाले नहीं, जो है वे एडमिशन में व्यस्त: इस बार आँफलाइन सिस्टम से स्टूडेंट को एडमिशन दिया जा रहा है यानि सभी काम काँलेज प्रबंधन को करना है। इसलिए प्रोफेसर अभी एडमिशन में व्यस्त है। इसलिए वे स्टूडेंट को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है।

12

जिले में कुल शासकीय काॅलेज

हमारे जिले के 11 शासकीय काॅलेजों की स्थिति

कॉलेज रिक्त पद

घनश्याम सिंह गुप्त काॅलेज बालोद 18

शास. एनसीजे काॅलेज दल्लीराजहरा 12

शासकीय काॅलेज डौंडीलोहारा 08

शासकीय काॅलेज डौंडी 05

शासकीय काॅलेज खेरथाबाजार 08

शासकीय काॅलेज अर्जुन्दा 13

शासकीय काॅलेज गुंडरदेही 05

शासकीय काॅलेज गुरूर 09

शासकीय काॅलेज अरमरीकला 11

शासकीय काॅलेज मंगचुवा 06

शासकीय काॅलेज बैलौदी 09

अनुभव का फर्क तो पड़ता ही है

लीड काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. टीआर डेहरे का कहना है कि शासन की ओर से नियुक्त सहायक प्राध्यापक व अतिथि शिक्षक पढ़ाते है, इसमें अनुभव का फर्क तो पड़ता ही है। परिणाम थोड़ा प्रभावित होता है। अभी सिर्फ सभी जगहों में फर्स्ट ईयर के लिए प्रवेश हो रहा है। ओवरआॅल सभी काॅलेजों में निर्धारित सीट की अपेक्षा 48 प्रतिशत स्टूडेंट ही एडमिशन ले पाए हैं।

सीधी बात| डाॅ. टीआर डेहरे, प्राचार्य लीड काॅलेज

अब तक आदेश नहीं आया, हम क्या कर सकते हैं


- इस बार 14 जून से अब तक एडमिशन ही चल रहा है इसलिए पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है, 15 जुलाई के बाद नियमित कक्षाएं लगेंगी


- वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हर बार की तरह इस बार भी अतिथि शिक्षकों की भर्ती करेंगे


- एक-दो दिन में आदेश आ ही जाएगा, अब इसमें हम क्या कर सकते हैं। एडमिशन लेकर बच्चे क्यों घूमेंगे, फीस पटा दिए हैं, हम 15 जुलाई के बाद नियमित कक्षाएं लगाएंगे, भले ही क्यों न पांच बच्चे ही आए।

4,610

प्रथम वर्ष के लिए निर्धारित सीट

48%

अब तक हो चुका है एडमिशन

एक माह पिछड़ जाएगा कोर्स

कॉलेजों में अब तक नियमित स्टाफ की भर्ती नहीं हो पाई है। आलम यह है कि जिलेभर के 11 शासकीय काँलेजों में 113 सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त है। अतिथि व्याख्याता की भर्ती होने में जुलाई के बचे दिन भी बीत जाएंगे। ऐसे में कोर्स एक माह पिछड़ जाएगा।

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