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भवन को तोड़ा, एक बरामदे में लग रही 3 कक्षाएं

मंगलवार को ग्राम कोहंगाटोला के ग्रामीणों ने बीआरसी कार्यालय पहुंच कर प्राइमरी स्कूल के लिए नया भवन बनाने की मांग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 02:05 AM IST

भवन को तोड़ा, एक बरामदे में लग रही 3 कक्षाएं
मंगलवार को ग्राम कोहंगाटोला के ग्रामीणों ने बीआरसी कार्यालय पहुंच कर प्राइमरी स्कूल के लिए नया भवन बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि लगभग 5 साल पहले पुराने खंडहर हो चुके धवन को तोड़ दिया गया था। जिसके बदले आज तक नया भवन नहीं बनाया गया। इस वजह से अतिरिक्त भवन में क्लास लग रही है। लेकिन बच्चे 100 से ज्यादा होने के कारण उन्हें छोटे कमरे और एक बरामदे में बैठने में दिक्कत होती है। मजबूरी यह है कि एक बरामदे में दो से तीन कक्षा लग रही है। इससे पढ़ाई में भी व्यवधान उत्पन्न होता है। कई बार मांग के बाद भी शासन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश देवांगन, कांग्रेस नेता रोहित सागर, पूर्व स्कूल समिति अध्यक्ष युवराज सिन्हा ने भी बीआरसी केआर नेताम के समक्ष नाराजगी जाहिर करते कहा कि नया भवन बनाने बीआरसी की ओर से एक इंजीनियर ने स्कूल पहुंचकर सर्वे भी कर लिया है। लगभग 15 लाख की लागत से भवन बनाने का प्रस्ताव हो चुका है। लेकिन 2 साल हो चुके कोई काम नहीं हुआ है। अगर यही हाल रहा तो 15 अगस्त के बाद हम तालाबंदी कर आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। बच्चों को छोटी जगह में बैठने में बहुत दिक्कत होती है। खाना खाने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। शासन का आदेश था कि खपरैल वाले भवन जो बैठने के लायक नहीं है, उन्हें तोड़ा जाए। इसलिए पुराने भवन को तोड़ा गया लेकिन बदले में कोई नया भवन नहीं बना।ं

जिम्मेदार अधिकारी कह रहे नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर दो

बालोद. कोहंगाटोला में एक बरामदे में बैठे तीन कक्षा के बच्चे।

दोपहर 12 बजे बीआरसी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों को समझाइश देते हुए बीआरसीसी आरके नेताम ने कहा कि पहले क्या हुआ था? मुझे नहीं मालूम,मैं नया आया हूं। अगर कोई प्रस्ताव भेजा गया हो तो हमारे पास स्वीकृति के लिए कोई आदेश नहीं आया है। आदेश आया रहता तो अब तक स्कूल भवन बन गया होता। कई स्कूलों का प्रस्ताव इसी तरह से पेंडिंग है। पुराना क्या हुआ उसे भूल जाओ। नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर दो। तभी इस दिशा में कुछ कर पाऊंगा। अधिकारी के इस बात पर नाराज हुए ग्रामीण कहने लगे कि जब सब प्रस्ताव पहले हो चुका है तो दोबारा वही प्रक्रिया करवाने का क्या मतलब। अधिकारी ने कहा कि नए सिरे से प्रस्ताव भेजकर स्वीकृत करवाने का प्रयास करेंगे। कई स्कूलों का प्रस्ताव हर साल भेजा जाता है। लेकिन स्वीकृति नहीं मिली है।

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