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चिलमगोटा में हरेली पर हर घर बच्चे बनाते हैं गेड़ी

जिला मुख्यालय बालोद से करीब 45 किमी दूर एक गांव हैं डौंडीलोहारा ब्लाॅक का चिलमगोटा। जहां जिले के एक मात्र गेड़ी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 02:05 AM IST

चिलमगोटा में हरेली पर हर घर बच्चे बनाते हैं गेड़ी
जिला मुख्यालय बालोद से करीब 45 किमी दूर एक गांव हैं डौंडीलोहारा ब्लाॅक का चिलमगोटा। जहां जिले के एक मात्र गेड़ी नृत्य दल है। स्कूली बच्चों ने ही 2008 में दल बनाया था। जिसमें आज युवा भी जुड़े हैं। इस दल की प्रस्तुति छग सहित मप्र के कई बड़े मंचों पर हो चुकी है। वनांचल गेड़ी नृत्य दल के कारण ही इस गांव को गेड़ी का गांव का कहा जाता है। हरेली पर हर घर में यहां बच्चे व युवा गेड़ी सजाते हैं।

स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चे बड़े सभी गेड़ी का मजा लेते हैं। हरेली में लुप्त हो रही गेड़ी की परंपरा को सहेजने में 10 साल से यहां के युवा व ग्रामीण अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस बार भी हरेली पर 11 अगस्त को गांव के प्राइमरी स्कूल में सामूहिक पूजा-अर्चना होगी। जहां पारंपरिक कृषि यंत्रों व गेड़ी की पूजा के बाद छत्तीसगढ़ी व्यंजन चीला, गुलगुल भजिया, ठेठरी, खुरमी का प्रसाद बांटा जाएगा। बच्चों के लिए पारंपरिक लोक खेलों की प्रतियोगिता जिसमें गेड़ी दौड़, फुगड़ी, नारियल फेक, डंडा पिचरंगा, गिल्ली डंडा, गोटा बिल्लस, लंगड़ी जैसे विलुप्त खेलों में बच्चे अपना जौहर दिखाएंगे।

त्योहार आज

आज विलुप्त हो रहे कृषि यंत्रों के संग्रहण की भी होगी शुरुआत, जिले में गेड़ी नृत्य का पहला दल भी इसी गांव में

बालोद. स्कूली बच्चों को गेड़ी सीखाते शिक्षक।

ऐसे हुई गेड़ी नृत्य की शुरुआत

जिले में अकेले इसी गांव की गेड़ी नृत्य के नाम से पहचान है। इसकी शुरुआत 2008 से हुई। प्राइमरी स्कूल के शिक्षक सुभाष बेलचंदन ने बताया 2008 में उनकी यहां पहली पोस्टिंग हुई। हरेली के दिन ही उन्होंने देखा कि गांव के कुछ बच्चे कीचड़ में उत्साह के साथ गेड़ी नृत्य कर थे। उनकी कला देख वे बच्चों के पास गए, उन्होंने कहा मैं आप लोगों को गेड़ी नृत्य और अच्छे से सिखाऊंगा। इस तरह गांव की छिपी प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका मिला। शिक्षक ही इस दल के संचालक हैं। शुरुआत में सिर्फ छह बच्चे दल में थे।

इस हरेली से करेंगे कृषि यंत्रों को संग्रहित: इस हरेली से विलुप्त हो रहे कृषि यंत्रों को संग्रहित करने का काम शुरू किया जाएगा। गांव या फिर स्कूल परिसर में ही एक संग्रहालय बनाने की योजना है। कृषि यंत्रो में उन्हें शामिल किया जाएगा, जिन्हें आज किसान व अन्य वर्ग भी भूल चुके हैं या यूं कहे कि मशीनों के चलन से अब उन पारंपरिक यंत्रों की उपयोगिता नहीं के बराबर है।

दल में हैं 20 लोग, बेहतर प्रस्तुति पर मिला है अवाॅर्ड

युवाओं के इस गेड़ी दल की बेहतर प्रस्तुति पर कई मंचों में संचालक सुभाष बेलचंदन को कई अवाॅर्ड मिले हैं। जिसमें धरती पुत्र सम्मान, कुर्मी समाज से दाऊ ढाल सिंह दिल्लीवार सम्मान, छग क्रान्ति सेना की ओर से माटी पुत्र सम्मान प्रमुख है। गेड़ी नृत्य दल में अभी 20 लोग हैं। सुआ, ददरिया, माटी के बखान, डंडा नृत्य व अन्य विधा पर गीत पेशकर कलाकार गेड़ी नृत्य करते हैं। दल में शामिल शिक्षक दुर्गीटोला (खैरकट्टा) जितेन्द्र साहू गायक है। अशोक निषाद दफड़ा बजाते हैं। खोरबाहरा यादव मोहरी, मोरध्वज इश्दा डमऊ, टेकराम नायक गुदुम, अंकालू राम यादव खड़पड़ी हैं।

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