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सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अब तक नहीं पहुंची पुस्तकें, दो महीने से पढ़ाई अटकी

इस शिक्षा सत्र से सरकार ने निजी स्कूलों की तर्ज पर सीबीएसई पैटर्न का अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोला है। लेकिन सरकार के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 02:05 AM IST

सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अब तक नहीं पहुंची पुस्तकें, दो महीने से पढ़ाई अटकी
इस शिक्षा सत्र से सरकार ने निजी स्कूलों की तर्ज पर सीबीएसई पैटर्न का अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोला है। लेकिन सरकार के सुस्त रवैय्ये के कारण दो महीने बाद भी इन स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। अब तक शासन से पुस्तकों की सप्लाई नहीं हुई। बच्चे व शिक्षक दोनों पुस्तक आने का इंतजार कर रहे हैं।

विभाग के जिम्मेदार अफसर पालकों को यही दिलासा दे रहे हैं कि एक-दो दिन में पुस्तक आ जाएगी। बिना पुस्तक बच्चों की सही ढंग से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कुछ स्कूल के शिक्षक अपने खर्चे से अपने लिए पुस्तक खरीद लिए हैं, ताकि पहले खुद पढ़ाने का अभ्यास कर सके। दो महीने से कक्षा औपचारिक रूप से निपट रही है।

50 बच्चों का बैच नहीं हुआ पूरा, 15 अगस्त अंतिम तारीख

बालोद. प्राइमरी स्कूल में बच्चों को बिना पुस्तक के हिंदी शब्दज्ञान िसखाया।

पालकों में नाराजगी, बच्चों को भेज रहे वापस निजी स्कूलों में: सरकार द्वारा समय पर स्कूल नहीं खोलने, पुस्तक, यूनिफाॅर्म व अन्य व्यवस्था नहीं बना पाने के कारण पालकों में भी नाराजगी है। वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालकर वापस निजी स्कूलों में भेजने लगे हैं। ऐसा बालोद शहर के मिडिल स्कूल में हुआ। जहां कुछ दिन पहले आठ बच्चों को उनके पालक वापस ले गए। यहां दर्ज संख्या 18 हो गई थी। अब 10 हो गए हैं।

गुंडरदेही में पहली व छठवीं की कक्षा एक साथ लग रही: गुंडरदेही के प्राइमरी स्कूल में सिर्फ एक छात्रा ने एडमिशन लिया है। मिडिल में 25 बच्चे हैं। एक बच्चे को अलग से कैसे बैठाएंगे ये सोचकर शिक्षकों ने कक्षा 6वीं के बच्चों के बीच बैठा दिया है। बच्चों को स्पोकन इंग्लिश की सामान्य जानकारी व अन्य चीजें सीखाई जा रही है। दोनों स्कूल में फिलहाल एक-एक शिक्षक हैं। समन्यवक किशोर साहू ने बताया कि जल्द तीन शिक्षकों की और नियुक्ति होने वाली है।

निजी स्कूल नहीं दे रहा टीसी, इच्छुक बच्चे भी सरकारी में नहीं आ पा रहे: बालोद अंग्रेजी मिडिल स्कूल के शिक्षक राजेश साहू ने कहा कि कुछ निजी स्कूल के संचालक अपने बच्चों को टीसी भी नहीं दे रहे हैं। वे सरकारी स्कूल में पढ़ने राजी है। लेकिन निजी स्कूल वाले अपनी कमाई देखने के लिए उन बच्चों के पालकों पर स्कूल न छोड़ने के लिए दबाव बना रहे हैं। ये भी कहा जा रहा है कि सरकारी में सही ढंग से पढ़ाई में नहीं होती।

जानिए, अंग्रेजी स्कूलों में कहां कितने बच्चे

ब्लाॅक प्राइमरी मिडिल

गुंडरदेही 01 25

डौंडीलोहारा 32 30

बालोद 14 10

गुरुर 05 04

डौंडी 03 09

ऐसा दिखा हाल

जब भास्कर ने कुछ स्कूलों का हाल जानने की कोशिश की तो ये तस्वीरे सामने आई। जवाहर पारा मिडिल स्कूल में खपरैल वाले भवन में 10 बच्चे पढ़ रहे थे। शिक्षक ने बताया रायपुर मीटिंग में गए थे तो सिर्फ एक सेट पुस्तक अभ्यास के लिए लाया था। उसी से बच्चों को पढ़ा रहा हूं। बच्चों के लिए पुस्तक नहीं आया है। कुर्मीपारा प्राइमरी स्कूल में न तो शिक्षक के पास पुस्तक है न बच्चों के पास, बच्चों को हिंदी के शब्द ज्ञान सीखाए जा रहे थे।

एक-दो दिन में रायपुर से आ जाएगी पुस्तकें: एडीईओ

एडीईओ जे मनोहरन ने कहा कि रायपुर से पुस्तक ले जाने बुलावा पत्र आया था। स्टाफ को पुस्तक लाने कहा गया था। नहीं आई होगी तो एक दो दिन में आ जाएगी। जानकारी लेकर बताता हूं, क्या हुआ है। प्रवेश की अंतिम तिथि 15 अगस्त है। यूनिफाॅर्म भी नहीं आई है। प्राइमरी में 5 व मिडिल में 9 प्रकार की पुस्तकें रहेगी।

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