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किशोरियों के लिए आई एहसास की पुस्तकें तीन महीने से खा रही धूल, जिम्मेदार बोले बांटना भूल गए, अच्छा हुआ आपने याद दिलाया / किशोरियों के लिए आई एहसास की पुस्तकें तीन महीने से खा रही धूल, जिम्मेदार बोले बांटना भूल गए, अच्छा हुआ आपने याद दिलाया

Bhaskar News Network

Aug 09, 2018, 02:06 AM IST

Balod News - स्कूलों में किशोरी बच्चियों को महीने के उन दिनों में शारीरिक स्वच्छता के लिए जागरूक करने एहसास पुस्तक का वितरण...

किशोरियों के लिए आई एहसास की पुस्तकें तीन महीने से खा रही धूल, जिम्मेदार बोले बांटना भूल गए, अच्छा हुआ आपने याद दिलाया
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स्कूलों में किशोरी बच्चियों को महीने के उन दिनों में शारीरिक स्वच्छता के लिए जागरूक करने एहसास पुस्तक का वितरण किया जाना है। लेकिन अफसरों की लापरवाही जिले के डीईओ ऑफिस में देखने को मिल रही है। जहां डीईओ चेंबर के बगल में ही विवेकानंद सभागार के कोने में 4000 से ज्यादा पुस्तकें धूल खाती पड़ी हुई हैं। पुस्तकों की सप्लाई पाठ्यपुस्तक निगम से हुई है। इसे महिला बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तीनों के सहयोग से तैयार किया गया है। पुस्तक में महीने के उन दिनों में बरती जाने वाली सावधानियों पर जागरूकता कहानी, प्रेरक प्रसंग, यौन शिक्षा में कई सीखने वाली चीजें शामिल हैं। पर ये पुस्तक अफसरों की उदासीनता के चलते दीमक का शिकार हो रही हैं। 3 माह हो गए इन पुस्तकों की सप्लाई हुए लेकिन किसी ने इन्हें पलटकर नहीं देखा।

अफसर जागरूक नहीं

बेटियों की सुरक्षा व जागरूकता पर अफसरों को नहीं कोई एहसास, छात्राओं को बांटना थीं ये पुस्तकें, दीमक लगी

कबाड़ के बीच पड़ी पुस्तकें

एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी

वितरण के लिए अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने में लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग को तो इन पुस्तकों के बारे में कुछ पता ही नहीं है। बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू का कहना है कि पुस्तकें किशोरी बालिकाओं के लिए हैं। शासन की नई योजना है। लेकिन पुस्तक बंटवाना हमारा काम नहीं, यह शिक्षा विभाग का काम है।

इनका तो जवाब ही अनोखा, कहने लगे भूल गया था...

भास्कर ने जब जिला शिक्षा विभाग के पुस्तक वितरण प्रभारी संतोष शर्मा से कहा कि पुस्तकें कब बंटेगी? तो वे कहने लगे मुझे याद नहीं आ रहा था कि पुस्तक बंटवाना है। मैं भूल गया था। अच्छा किया आपने याद दिला दिया। प्रभारी के इस जवाब से ही समझ में आ रहा है कि वे सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में कितना गंभीर हैं।

सीधी बात| बीआर ध्रुव, डीईओ

मैं पुस्तक बंटवा दूंगा, उल्टा-सीधा मत लिखना


- क्या कहा, कहां पर पुस्तकें हैं, मुझे ध्यान नहीं है ,देखता हूं जाकर।


- देखिए, हम जिले में 50000 पुस्तकें बंटवा चुके हैं, यह अतिशेष पुस्तक होगा।


- अच्छा हां, याद आया, यह पाठ्य पुस्तक निगम ने भेजा है, गाइडलाइन का इंतजार है फिर बंटवा देंगे।


-देखिए, मेरी वजह से जिले में कई उपलब्धियां हासिल हुई। उल्टा-सीधा मत लिखना। मैं पुस्तक बंटवा दूंगा।

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