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केंद्र शासन की दो आवास योजनाओं में दो साल से नहीं ढूंढ पा रहे 112 पात्र हितग्राही

गरीब लोगों को मकान उपलब्ध कराने केंद्र शासन की दो महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास और मलिन बस्ती विकास, जो...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:10 AM IST
केंद्र शासन की दो आवास योजनाओं में दो साल से नहीं ढूंढ पा रहे 112 पात्र हितग्राही
गरीब लोगों को मकान उपलब्ध कराने केंद्र शासन की दो महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास और मलिन बस्ती विकास, जो राज्य शासन व राजस्व विभाग के नियमों फेर में उलझकर अटक रहा है। लेटलतीफी का अालम ऐसा है कि शहर में दो हजार से ज्यादा गरीब परिवार निवासरत हैं लेकिन योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। अफसर भी नियमाें का हवाला देकर थमे विभागीय काम को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। आलम यह है कि एक योजना के तहत अब तक राजस्व मंडल रायपुर में सुनवाई का दौर चल रहा है, बार-बार तारीखें तय की जा रही हैं लेकिन हो कुछ नहीं रहा। वहीं दूसरी योजना में नामांतरण के चलते मामला अटका हुआ है, जो राजस्व विभाग के अधीन है।

दोनों योजनाओं में पात्र हितग्राहियों की तलाश कर रही है। पर सरकारी योजना में देर के चलते लक्ष्य अनुरूप पात्र हितग्राही का चयन नपा नहीं कर पाई है। नपा को आईएचएसडीपी के लिए 58 व पीएम आवास के लिए 54 पात्र हितग्राही का चयन करना है। जो दो साल से पेडिंग है। इसकी वजह भी सरकारी नियम ही है। सरकारी योजना को सरकारी नियम ही पूरा नहीं होने दे रहा है।

सुनवाई अधूरी: आईएचएसडीपी की सुनवाई 11 जून को

बालोद. कुंदरूपारा केे आवासों का अलाॅटमेंट नहीं हो पाया है।

मकान उपलब्ध कराने दोनों योजनाओं को ऐसे समझें

1. आईएचएसडीपी (मलिन बस्ती विकास)

अब तक क्या: शहर में वर्ष 2008 से लागू योजना के तहत कुंदरूपारा वार्ड में 174 मकान तैयार हो चुके हैं। वैसे तो 200 मकान बनाया जाना थे लेकिन राशि के अभाव में ऐसा नहीं हो पाया। मकान दिए जाने के लिए पात्र हितग्राहियों का चिन्हांकन हो चुका है।

वर्तमान स्थिति: योजना के तहत बने अधिकांश मकानों का उपयोग अपात्र हितग्राही कर रहे हैं, वहीं पात्र हितग्राही भटक रहे हैं।

अब 11 जून को रायपुर में सुनवाई: नगर पालिका की ओर से वकील भेषकुमार साहू ने बताया कि कुंदरूपारा में आईएचएसडीपी योजना के तहत बने आवास किस जमीन पर बना है, इसके लिए रायपुर में सुनवाई की तारीख अब 11 जून तय की गई है। जिस जगह पर आवास बना है, उसे एक आवेदक ने अपना बताया है। इसलिए यह मामला न्यायालय में जारी है।

शहर में अभी 40 जगह मकान बनाने का काम चल रहा है।

2. प्रधानमंत्री आवास योजना

अब तक क्या: 2016 में केंद्र शासन से अधिकृत दिल्ली की सर्वे टीम ने पीएम आवास योजना के लिए बालोद शहर में 2 हजार 400 फाॅर्म बांटे। फिर आवेदकों ने आवेदन नगर पालिका में जमा किए। नपा ने जांच कर पात्र हितग्राहियों की सूची शासन को भेजी। इसके बाद डीपीआर भेजा गया। जिसमें 96 ही पात्र हैं।

वर्तमान स्थिति: योजना के तहत 9 मकान बन पाए हैं। 20 से अधिक मामले नामांकरण के चलते अटके हैं। 15 से अधिक पात्र हितग्राही ऐसे हैं, जो वर्क आॅर्डर जारी करने के बाद भी मकान नहीं बना पा रहे हैं।

नामांतरण के बाद शुरू होगा काम: नपा सीएमओ रोहित कुमार साहू ने बताया कि जो पात्रता की श्रेणी में आ रहे हैं, उसे मकान बनाने लेआउट अनुमति दे रहे हैं, कई मकान बनाने का काम राजस्व नियमों के चलते नहीं हो पाया है। जब नामांतरण होगा, तभी काम शुरू होगा।

पहले थे पात्रता श्रेणी में दूसरी सूची में अपात्र

पीएम आवास: 96 का चयन, 54 की तलाश

शासन ने नपा को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहले चरण में 150 हितग्राहियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य दिया है। अब तक 96 पात्र हितग्राही मिल पाए हैं। 54 की तलाश जारी है, क्योंकि पहले जो पात्रता की श्रेणी में आए थे, वे दूसरी बार हुए सर्वे में अपात्र हो गए है।

आईएचएसडीपी: 116 का चयन, 58 की तलाश

केन्द्रीय शासन की महत्वाकांक्षी योजना आईएचएसडीपी (मलिन बस्ती विकास) के तहत बने आवास का आवंटन नहीं हो पाया है। झोपड़ी, कच्चे मकान में रहने वाले लोगों की समस्याओं के निराकरण को लेकर पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना लागू है।

क्रियान्वयन कैसे हो: शहर में 2 हजार 919 गरीब परिवार हैं लेकिन पीएम आवास योजना में मकान दिलाने लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो रही है। विभागीय अफसर भी असमंजस में है कि योजना का क्रियान्वयन कैसे किया जाए।

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