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अरौद में कृषि विज्ञान खोलने के लिए मिली जमीन

अरौद में कृषि विज्ञान खोलने के लिए राजनांदगांव केवीके अफसरों ने रायपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को जमीन उपलब्ध...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:15 AM IST

अरौद में कृषि विज्ञान खोलने के लिए राजनांदगांव केवीके अफसरों ने रायपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को जमीन उपलब्ध करा दी है। अब केन्द्र शासन के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी यहां भवन निर्माण के साथ वैज्ञानिकों व कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा। इसके लिए खाका तैयार हो चुका है। खुलने वाले कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) में कुल 22 अधिकारी व कर्मचारियों की नियुक्ति होगी। जिसमें 12 वैज्ञानिक होंगे, जो किसानों को कृषि अनुसंधान से संबंधित जानकारी पहुंचाएंगे।

धान, गन्ना, चना, मटर, अरहर सहित किसानों के लिए अन्य उपयोगी फसलों के बारे में कृषि विभाग के अधिकारियों के माध्यम से सलाह देंगे। साथ ही खेतों में जाकर कीट की जानकारी लेकर फसल के बचाव के लिए आवश्यक सलाह देंगे। 12 वैज्ञानिक अपने स्तर पर एक-एक सहयोगी कर्मचारी भी रखेंगे। जो जिले में कृषि संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएंगे। जिले में डेढ़ लाख से अधिक किसान हैं। जिसे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि विज्ञान केंद्र का लाभ मिलेगा। प्रदेश में अभी 24 जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र का लाभ किसानों को मिल रहा है। इसी तर्ज पर बालोद जिले में केंद्र संचालित कर किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। नई दिल्ली कृषि अनुंसधान केन्द्र व रायपुर कृषि विश्वविद्यालय के अफसर अरौद पहुंचकर विभागीय प्रक्रियाओं को पूरा कर चुके हैं।

12 वैज्ञानिक करेंगे शोध, किसानों को तकनीकी सलाह देंगे, 22 अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी

वैज्ञानिक शोध करेंगे

जिले में जहां शुष्क इलाका है, वहां लगातार सूखे की हालत में फसलों के सतत विकास और उत्पादन बढ़ाने के लिए भी वैज्ञानिक शोध करेंगे। वैज्ञानिक शोध के नतीजे किसानों तक पहुंचाएंगे और सलाह देकर फसल उत्पादन कराएंगे।साथ ही जल संरक्षण की दिशा में किसानों को ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पानी की 70 फीसदी तक बचत होती है।

केंद्र की माॅनिटरिंग का जिम्मा इनको: कार्यक्रम समन्वयक एचएस तोमर का कहना है कि मेरे कार्यकाल में विभागीय प्रक्रिया पूरी चुकी है। अब मेरा ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया है। हमने जमीन संबंधित सभी कार्रवाई पूरी कर ली है। अब यूनिवर्सिटी के माध्यम से बाकी काम होंगे। केंद्र की माॅनिटरिंग केन्द्रीय शासन, कृषि मंत्रालय, व संबंधित कृषि मंत्री व उनसे जुड़े केन्द्र व राज्य शासन के अधिकारी करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अगुवाई में कृषि के क्षेत्र में नए अनुसंधान होंगे। इन अनुसंधानों का फायदा किसानों तक पहुंचे कृषि विज्ञान केंद्र की शुरुआत की जा रही है।

नई तकनीक बताएंगे

केन्द्र में सेवा देने वाले वैज्ञानिक जिले में क्षेत्रों की जलवायु के अनुसार ही कृषि की तकनीक और फसलें विकसित करेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसंधान का किसानों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र में कई कार्य होंगे। किसानों तक नवीनतम तकनीक या आधुनिक उपकरण पहुंचाया जाएगा। उन्नत बीज या सिंचाई के नए साधन उपलब्ध कराया जाएगा। नई-नई किस्मों की जानकारी देंगे।

खेत में होगा परीक्षण

खेतों में मिट्टी के बेहतर उपयोग के लिए ऑन फार्म टेस्टिंग यानी खेत पर परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत किसानों को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के जरिए भी की जाएगी। इसके लिए समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण भी कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।

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