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यहां पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने देते हैं लेगिंस

बुनियादी मिडिल स्कूल के प्रबंधन समिति के पालकों ने जनसहभागिता से बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 03:15 AM IST

यहां पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने देते हैं लेगिंस
बुनियादी मिडिल स्कूल के प्रबंधन समिति के पालकों ने जनसहभागिता से बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने इस सत्र से लेगिंस देने की शुरुआत की है। पहले इस स्कूल में सिर्फ बालक एडमिशन ले रहे थे। अब बालिकाएं भी पढ़ती है। अधिकतर बच्चे शहर के झुग्गी बस्ती जवाहर पारा और अन्य मोहल्लों से पढ़ने के लिए आते हैं।

शिक्षक केएल साहिरो, सरिता काबरा, प्रभावती साहू ने कहा दो साल पहले तक कई बच्चों की शिकायत रहती थी कि वे स्कूल जाने के लिए घर से तो निकलते थे लेकिन स्कूल ना पहुंचकर वे कहीं घूमने-फिरने तो खेलने के लिए चले जाते थे। उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। उन्हें कक्षा से जोड़ने के लिए प्रधान पाठक पीसी केसरिया ने प्रोत्साहित करने की प्लानिंग की। पहले उन्होंने खुद के वेतन से शुरुआत करते हुए बच्चों को टाई बेल्ट और जूता मोजा देना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे उनकी पहल को शाला प्रबंधन समिति ने अपना कर जन सहभागिता से बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए कई चीजें देने लगे। इस सत्र से यहां 24 बालिकाएं भी पढ़ रही हैं, 99 बालक हैं। शाला प्रबंधन समिति के पालक आपस में चंदा करने के अलावा स्कूल के नाम से संचालित व्यवसायिक काॅम्प्लेक्स से भी आय होती है। किसी से हर माह तो किसी से साल में 25 से 40000 तक आमदनी हो जाती है।

बुनियादी मिडिल स्कूल के प्रबंधन समिति के पालक बेटियों को लेगिंस देते हैं, ताकि कोई बीच में पढ़ाई न छोड़े

बालोद. बुनियादी मिडिल स्कूल में बेटियों को लेगिंस दिया गया।

जनसहभागिता से लेगिंस देने वाला पहला स्कूल

बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार किसी स्कूल में लेगिंस दिया गया। जिसे पहन कर बेटियां स्कूल आएंगी। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कन्हैया लाल मंडावी ने कहा कि बेटियां पढ़ेगी तो समाज को एक नई दिशा भी मिलेगी। हम देखते हैं कि कुछ पालक बेटों को ज्यादा पढ़ाते हैं और बेटियों को कम। लेकिन बड़े होकर वही बेटे अपने माता-पिता का साथ नहीं निभाते और बेटियां शादी के बाद भी अपने माता-पिता से पहले की तरह जुड़ी रहती हैं। अगर बेटियां अच्छी पढ़ी-लिखी हो तो वह शादी के बाद कहीं अच्छी नौकरी भी कर सकती हैं और अपने परिवार चला सकती है।

गरीब तबके के बच्चों को निजी स्कूल जैसी सुविधा

समिति उपाध्यक्ष शांतिलाल पटेल, सदस्य मोहन सारथी, संतोष राजपूत, मीणा, सुलोचना रामटेके, चुनेश्वर साहू ने कहा कि हमारे स्कूल में कई गरीब तबके के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। जिनके पास पहनने के लिए सही ढंग के कपड़े भी नहीं होते। बच्चों के इस मानसिकता को बदलने के लिए और उन्हें स्मार्ट दिखने के लिए शाला प्रबंधन समिति ने फंड जुटाया और शुरुआत टाई बेल्ट जूता मोजा से हुई। शासन द्वारा बच्चों को पढ़ाई के लिए पुस्तक तो निशुल्क मिल जाता है इसलिए समिति ने अपनी ओर से कॉपी पेन और स्टेशनरी का खर्च भी उठाया है।

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