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सरपंच बोले-विचार व्यक्त नहीं माहौल खराब कर रहे थे यदु

क्षेत्र में स्थापित श्री सीमेंट संयंत्र की तृतीय इकाई के विस्तार के लिए बुधवार को हुए जनसुनवाई के दौरान शिवसेना...

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2018, 02:06 AM IST
क्षेत्र में स्थापित श्री सीमेंट संयंत्र की तृतीय इकाई के विस्तार के लिए बुधवार को हुए जनसुनवाई के दौरान शिवसेना प्रत्याशी संतोष यादव द्वारा अपना विचार व्यक्त करने के बजाय माहौल खराब किए जाने का प्रभावित गांवों के सरपंचों ने जमकर आलोचना की है।

चंडी सरपंच द्वारिका वर्मा, खपराडीह सरपंच विनोद वर्मा, सेमराडीह सरपंच राजू ध्रुव एवं भरवाडीह सरपंच डीडी धृतलहरे सहित उक्त गांवों के नागरिकों ने कहा है कि शिवसेना के जिलाध्यक्ष ने जनसुनवाई में अपने विचार व्यक्त करने के बजाए राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति करने मंच में आए थे और अधिकारियों के बार-बार कहने के बावजूद विचार व्यक्त करने के बजाय माहौल को खराब करने का प्रयास करते रहे, इसकी हम भर्त्सना करते हैं।

भरवाडीह के मुंशी धृतलहरे ने कहा कि क्षेत्र में संयंत्र स्थापित होने से ना केवल पांच गांवों का अपितु बीस से बाईस गांवों के लोगों को रोजगार मिला है जिससे न केवल गांवों का विकास हुआ है बल्कि लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आया है।

चंडी के राजू ध्रुव ने मंच से कहा कि गत वर्ष पड़े भीषण अकाल के दौरान यदि संयंत्र में रोजगार नहीं मिलता तो क्षेत्र के लोगों के पास पलायन के अलावा कोई चारा नहीं था उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा की शिवसेना प्रत्याशी जिस गांव का निवासी है वहां भी सीमेंट संयंत्र स्थापित है परंतु जो अपने गांव वालों का भला नहीं कर सका वह हमारी भलाई के बारे में क्या सोचेगा। सिमगा जनपद की पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान सुहेला भाजपा मंडल की अध्यक्ष अदिति बघमार एवं सुहेला जनपद सदस्य शकुंतला बघमार विरोधी विचारधारा के होने के बावजूद संयंत्र के द्वारा किए गए कार्यों कार्यों की प्रशंसा करते हुए अपना समर्थन दिया है।

वहीं बलौदा बाजार के मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के राज प्रधान नरेंद्र कश्यप, भरवाडीह के पूर्व सरपंच गोपू शर्मा ने कहा कि निश्चित रूप से कुछ लोगों द्वारा संयंत्र के कार्यों की कमी की शिकायत, सुझाव एवं रोजगार की मांग के संबंध में विचार व्यक्त किए, परंतु संयंत्र के विस्तार का विरोध किसी ने नहीं किया। इसके विपरीत अब तक हुए दर्जनों जनसुनवाई में शिरकत कर चुके जनप्रतिनिधियों ने मंच से कहा कि ऐसी अनूठी एवं ऐतिहासिक जनसुनवाई हमने नहीं देखा, जिसमें प्रभावित गांवों के ग्रामीणों द्वारा संयंत्र के खिलाफत की बजाए अंत तक ना केवल समर्थन बल्कि जिंदाबाद तक के नारे लगाते रहे।

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