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निर्माण के दौरान ही शुक्लाभाटा से सोनपुरी तक की 2.85 किमी सड़क में पड़ी थीं दरारें, अब उखड़ रहा डामर

बलौदाबाजार| प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 1 करोड़ 32 लाख रुपए की लागत से 2015 में बनी शुक्लाभाटा से...

Dainik Bhaskar

Jul 28, 2018, 02:16 AM IST
निर्माण के दौरान ही शुक्लाभाटा से सोनपुरी तक की 2.85 किमी सड़क में पड़ी थीं दरारें, अब उखड़ रहा डामर
बलौदाबाजार| प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 1 करोड़ 32 लाख रुपए की लागत से 2015 में बनी शुक्लाभाटा से सोनपुरी तक की 2.85 किलोमीटर से डामर उखड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण के दौरान ही सड़क में दरारें आने लगी थी। उस दौरान इसकी शिकायत कलेक्टर बसव राजू एस और पीएमजीएसवाई प्रमुख एन राजा से की गई थी तो जांच कर कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन कुछ कार्रवाई नहीं हुई।

इस मामले में पीएमजीएसवाई ईई कमल शर्मा ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की बात को खारिज करते हुए सड़क खराब होने की वजह ओवरलोड वाहनों में मुरुम के परिवहन को बताया। वहीं कलेक्टर जनक प्रसाद वर्मा ने मामले की जांच कर कार्यवाही की बात कही है। गांवों को शहर से जोड़ने वाली इस सड़क के खराब होने से ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। शुक्लाभाटा से सोनपुरी तक सड़क निर्माण का काम 11 जनवरी 2013 को शुरू हुआ था और 31 जनवरी 2015 को निर्माण पूरा हुआ था। इस दौरान ही डामर उखड़ने लगा था। जबकि उस समय भारी वाहन नहीं चलते थे। इसके बावजूद विभाग के ईई कमल शर्मा ने सड़क में भ्रष्टाचार की बात को दरकिनार कर उल्टे मरम्मत के लिए डिस्ट्रिक माइनिंग फंड से 65.79 लाख की मांग जिला प्रशासन सेे 24 अगस्त 2017 को की थी।

ईई बोले- ओवरलोड गाड़ियों की वजह से खराब हो रही सड़क

बलौदाबाजार. ऐसी हो गई है सड़क।

ईई ने कहा-मरम्मत के लिए फंड मांगा गया है

पीएमजीएसवाय के ईई कमल शर्मा का कहना है कि मैं हैदराबाद में हूं। यह सड़क बलौदाबाजार-रायपुर की सड़कों के निर्माण के दौरान भारी वाहनों के मुरुम परिवहन से खराब हुई है, जबकि हमारी बनाई सड़क की भार क्षमता 10 से 12 टन है। हमने कलेक्टर से डीएमएफ फंड से सड़क की मरम्मत के लिए फंड की मांग की है।

डीएमएफ से रोड के लिए फंड नहीं दिया जाता: कलेक्टर

कलेक्टर जेपी पाठक का कहना है कि डीएमएफ से रोड के लिए फंड नहीं दिया जाता। ईई को अपने विभाग से बजट से पैसा मांगना चाहिए। ये उनके विभाग का मामला है। सड़क की गारंटी ठेकेदार की होती है। अगर निर्माण में अनियमितता बरती गई है तो जांच कर ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।

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