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रेलवे साइडिंग में नियम-कायदों की उड़ाई जा रही धज्जियां, डोलोमाइट लोडिंग की धूल से परेशानी

बाराद्वार। वार्ड नंबर 8 के पीछे घनी आबादी के बीच स्थित बाराद्वार रेलवे साइडिंग में रेक लोड के मानकों की अनदेखी हो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:05 AM IST

रेलवे साइडिंग में नियम-कायदों की उड़ाई जा रही धज्जियां, डोलोमाइट लोडिंग की धूल से परेशानी
बाराद्वार। वार्ड नंबर 8 के पीछे घनी आबादी के बीच स्थित बाराद्वार रेलवे साइडिंग में रेक लोड के मानकों की अनदेखी हो रही है। रेक में डोलोमाइट लोड किया जा रहा है, जिससे उड़ने वाले धूल के कारण लोगों का अपने घर में रह पाना या बाहर निकलना भी मुश्किल हो चुका है।

रोजाना बाराद्वार शहर के आसपास क्रेशरों द्वारा अन्य प्रदेश व पावर प्लांटों में डोलोमाइट की सप्लाई की जाती है। डोलोमाइट को क्रेशर से लाने व रेलवे साइडिंग में डंप किया जाता है। रेक में भरते समय भारी मात्रा में डोलोमाइट की धूल उड़ती है, जिससे वातावरण प्रदूषण हो रहा है। रेक में भरते समय पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा। शाम के समय इतनी ज्यादा धूल उड़ती है कि घरों से लोग निकल नहीं पाते। प्रदूषण का दुष्प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शेष पेज 19



धूल से त्रस्त पिछली रात करीब 7 बजे लोगों ने रेल्वे साइडिंग पहुंचकर क्रेशर संचालक द्वारा बिना पानी छिड़काव के किए जा रहे रेक लोडिंग को बंद करा दिया। उनकी मांग थी की पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव होगा, उसके बाद ही रेक लोड होगी। स्टेशन मास्टर एचएच दास से मामले की शिकायत की। स्टेशन मास्टर ने लोगों को आश्वस्त किया कि अब पानी छिड़काव के बाद ही रेक लोडिंग की जाएगी।

मानकों का हो रहा उल्लंघन, जिम्मेदार लापरवाह

रेलवे के जानकारों के अनुसार रेक पाइंट संचालन करने के लिए रेलवे को फिक्सड आईप वाटर स्प्रिंकलर, सीसी रोड, नियमित पानी छिड़काव के साथ केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की गाइड लाइन का पालन करना जरूरी है। तभी रेक पाइंट का संचालन किया जा सकता है, लेकिन बाराद्वार रेक पाइंट में इनमें से किसी भी मानकों का पालन नहीं किया जाता। हैं। नियमित रूप से न तो पानी का छिड़काव होता है न ही कोई सीसी रोड का निर्माण कराया गया है। स्प्रिंकलर की व्यवस्था भी नहीं है। रेल प्रबंधन को बाराद्वार रेक पाइंट से कमाई तो हो रही है लेकिन नियम-कायदों का पालन नहीं होने के बाद भी अधिकारी चुप बैठे हैं।

बाराद्वार रेलवे साइडिंग में उड़ती धूल

पर्यावरण संरक्षण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी के आदेश का असर नहीं

नगरवासियों और नगर पंचायत अध्यक्ष रेशमा विजय सूर्यवंशी ने रेलवे साइडिंग में प्रदूषण को लेकर कई बार रेलवे के उच्चाधिकारियों सहित पर्यावरण विभाग, मानव अधिकार आयोग, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, लोक निर्माण मंत्री, लोक सुराज अभियान, कलेक्टर जनदर्शन में इसकी शिकायत की गई है। छग पर्यावरण संरक्षण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी ने 21 फरवरी 2018 को रेलवे के डीआरएम को पत्र लिखकर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुरूप रेलवे साइडिंग का संचालन करने काे कहा गया था। सभी क्रेशर संचालकों को भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित पानी छिड़काव के साथ केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुरूप रेक लोडिंग करने निर्देशित किया था, लेकिन किसी ने अब तक कोई प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए कोई उपाय नहीं किए।

मानव अधिकार आयोग को की गई शिकायत

नगर के नवनीत कलानोरिया द्वारा मानव अधिकार आयोग दिल्ली 13 फरवरी 2018 को शिकायत की थी, जिस पर मानव अधिकार आयोग ने 20 फरवरी 2018 को रेलवे के जीएम बिलासपुर को पत्र लिखकर 2 माह के अंदर बाराद्वार रेलवे साइडिंग में प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए आवश्यक इंतजाम करने कहा है, लेकिन अमल आज तक नहीं हुआ।

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