माचकोट एलओएस दोबारा सक्रिय, दो दिनों पहले नक्सली तिरिया पहुंचे, एक स्माॅल टीम से हुआ जवानों का सामना

Bastar Jagdalpur News - शहर सीमा से लगे माचकोट और तिरिया के जंगलों में लाल आंतक की सुगबुगाहट तेज होने के बाद डीआरजी और एसटीएफ के जवानों ने...

Jul 28, 2019, 07:05 AM IST
शहर सीमा से लगे माचकोट और तिरिया के जंगलों में लाल आंतक की सुगबुगाहट तेज होने के बाद डीआरजी और एसटीएफ के जवानों ने नक्सलियों पर तगड़ा प्रहार किया है। यहां तिरिया के जंगलों में जवानों ने सात नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सलियों के इस इलाके में मौजूदगी की खबर भास्कर ने एक साल पहले ही प्रकाशित की थी उस दौरान तत्कालीन अफसर इस बात को मानने को तैयार नहीं थे।

नक्सलियों ने पिछले एक साल में यहां अपने खत्म हो चुके माचकोट एलओएस को न सिर्फ जिंदा किया बल्कि इसका सफलता पूर्वक संचालन भी कर रहे थे। सूत्र बता रहे हैं कि नक्सलियों की दो टुकड़ी इस इलाके में घूम रही थी और दो दिनों पहले ही हथियारबंद नक्सली तिरिया गांव तक पहुंच गए थे। इसके बाद ही पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन लांच किया गया। जवान दो दिनों से नक्सलियों की तलाश में जंगल की खाक छान रहे थे बारिश होने की वजह से ऑपरेशन में दिक्कतें भी हो रही थीं। इसी बीच जब पार्टी वापस लौट रही थी तब पहाड़ी के किनारे नक्सलियों और जवानों का आमना सामना हो गया। इसकी जानकारी स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों को भी है जो जंगलों में काम कर रहे हैं। कुछ महीनों पहले ही यहां एक वन विभाग के कर्मचारी का मोबाइल नक्सलियों ने ले लिया था और इसे चेक करने के बाद उसे वापस करते जंगलों में नहीं आने की हिदायत दी थी।

वन विभाग के फील्ड अफसरों को पहले से पता था पर डर से सभी रहे चुप

तुलसीडोंगरी, दरभा, लोहांडीगुड़ा में दबाव बढ़ने के बाद माचकोट, तिरिया और ओडिशा बार्डर पर नया काॅरीडोर बनाने की थी शुरुआत

सबसे सुरक्षित इलाका मान रहे थे नक्सली

जगदलपुर से तिरिया करीब 40 किमी और माचकोट िसर्फ 18 किमी ही दूर है। वहीं विधानसभा चुनाव के लिए मतदान वाले दिन भी नक्सलियो ने गुम्मलवाड़ा में विस्फोट किया था। जो कि जगदलपुर से करीब 35 किमी पास है। तब भी पुलिस ने इस और ध्यान नही दिया था और पूरे मामले को ही दबा दिया था। तिरिया और माचकोट के इलाकों में सिर्फ जंगल ही मौजूद नहीं है बल्कि यहां पूरा इलाका ओडिशा से सटा हुआ है। बार्डर होने से नक्सलियों के लिए यह जंगल सबसे सेफ है। दरभा के तुलसीडोंगरी से सटे बार्डर एरिया में अभी सुकमा, ओडिशा और बस्तर पुलिस की नजरें बनी हुई हैं। बस्तर पुलिस कुम्माकोलेंग, कोटपदर इलाके में लगातार ऑपरेशन कर रही हैं। ऐसे में नक्सलियों के लिए माचकोट वाला इलाका बेहद सेफ है।

माचकोट का इलाका नक्सलियों ने लिए नया नहीं है। नक्सलियों ने यहां बाकायदा माचकोट एलओएस का गठन किया था और इसमें स्थानीय लोगों को जोड़ा था। इस एलओएस की कमान शंकर के हाथों में थी। उसके सरेंडर के बाद माचकोट एलओएस खत्म हो गया था। ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस के प्रेशर के बाद खत्म हो चुके इस एलओएस को नक्सली फिर से जिंदा करने में लगे हुए हैं।

शंकर के सरेंडर के बाद माचकोट एलओएस हो गया था खत्म

फोटो पर बैन, आज करेंगे खुलासा

इधर घटना के बाद देर शाम मारे गए नक्सलियों के शवों को पुलिस लाइन जगदलपुर में लाया गया। यहां लाशों को एक कमरे में बंद कर रखा गया है और इसकी तस्वीर या वीडियो लेने की इजाजत मीडियाकर्मियों को नहीं दी गई है। अफसर कहते रहे कि अभी एक टीम जंगल में है टीम के आने के बाद रविवार की सुबह पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

नगरनार को जहां से पानी सप्लाई होना है उसी इंटेकवेल के किनारे मिले नक्सली : इधर बताया जा रहा है कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए जिस स्थान से पानी की सप्लाई होनी है उसी स्थान के आसपास नक्सलियों ने अपना डेरा जमाया था। सूत्रों के अनुसार एनकाउंटर भी नगरनार स्टील प्लांट को पानी सप्लाई के लिए बनाए गए इंटेकवेल के पास हुई है।

तिरिया से ढाई किमी दूर पहाड़ी के पास नाले के किनारे मुठभेड़, एके-47 वाले को मारा

जगदलपुर | तिरिया गांव से करीब ढाई किमी अंदर जंगल में ऊपर पहाड़ी वाले इलाके में जवानों ने नक्सलियों को घेरा और फिर एक बड़ा एनकाउंटर हो गया। इस एनकाउंटर में जवानों ने एक एके 47 रायफल पकड़कर फायरिंग कर रहे नक्सली को भी मारा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जैसे ही एनकाउंटर शुरू हुआ तो एक नक्सली एके-47 से फायरिंग करने लगा। जवानों ने जब हैवी फायरिंग की तो उसे गोली लगी और बंदूक समेत नाले में जा गिरा। इसके बाद काफी देर तक यहां गोलीबारी चलती रही और फिर बचे नक्सली भाग खड़े हुए। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एनकाउंटर के बाद जवानों ने नाले में एके-47 की तलाश की यहां करीब एक घंटे तक जवान नाले में बंदूक ढूंढते रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। बताया जा रहा है कि नाले में पानी काफी ज्यादा था और इसका बहाव भी तेज था। सूत्र बता रहे हैं कि एनकाउंटर के दौरान एके-47 नाले में ही गिरी है।

27 अप्रैल 2018 को ही भास्कर ने खुलासा कर दिया था कि नक्सली माचकोट-तिरिया इलाके में सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

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