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कृषि क्षेत्र के विस्तार के लिए 30 % महिलाओं की हिस्सेदारी लानी होगी

अभा शुष्क खेती परियोजना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कार्यशाला शुरू भास्कर न्यूज | जगदलपुर शहीद गुंडाधूर...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
अभा शुष्क खेती परियोजना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कार्यशाला शुरू

भास्कर न्यूज | जगदलपुर

शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कुम्हरावंड में गुरुवार को अखिल भारतीय शुष्क खेती परियोजना की 16वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पांच दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। पहले दिन कृषि वैज्ञानिक आदिकांत प्रधान ने शुष्क खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जाने वाले उपायों और कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने कहा बस्तर में सालों से महिलाएं खेती-किसानी में जुटी हैं, लेकिन यह अब भी 15 फीसदी है। जब तक 30 फीसदी महिलाएं कृषि से नहीं जुड़ेंगी, तब तक कृषि क्षेत्र के विस्तार में सफलता नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बस्तर में सिंचाई सुविधाओं की कमी के चलते 65 फीसदी किसान अब भी एक फसल ले रहे हैं। किसानों को जागरूक कर शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाते हुए उन्हें हर मौसम में खेती करने की समझाइश दी जा रही है। पांच साल में इसका असर यह रहा कि बस्तर जिले में रबी की खेती 25 हजार हेक्टेयर से बढ़कर करीब 40 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रबंधन मंडल के सदस्य एवं सहायक महानिदेशक डॉ. एस भास्कर, डॉ. एमबी चेट्टी, छग शासन कृषि सचिव अनूप श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एसके पाटिल, काॅलेज के डीन एससी मुखर्जी, पूर्व विधायक दिवस बैदूराम कश्यप, लच्छूराम कश्यप समेत 120 कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे।

सांसद दिनेश कश्यप ने कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, उन क्षेत्रों में छोटे-छोटे बांध एवं वर्षा का पानी संग्रहण करने की योजना से निश्चित ही किसानों को खेती में मदद मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने कृषि वैज्ञानिकों से वर्षा आधारित खेती को डेवलप करने और इसके लिए योजनाएं बनाने के बारे में पूछा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डाॅ. एसके पाटिल ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा जो भी आधुनिक कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान किए गए हैं, उनका उपयोग किसानों के लिए किया जा रहा है। बस्तर में साल दर साल खेती का रकबा बढ़ रहा है।

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