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काजीरंगा की तरह तस्करी रोकने जंगलों में तैनात होंगे स्निफर डॉग

कांजीरंगा नेशनल पार्क की तरह बस्तर में वन अपराधों पर रोक के लिए अब सरकार ने नई कवायद शुरू की है, जिसके तहत अब यहां...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

कांजीरंगा नेशनल पार्क की तरह बस्तर में वन अपराधों पर रोक के लिए अब सरकार ने नई कवायद शुरू की है, जिसके तहत अब यहां खोजी कुत्तों को तैनात किया जाएगा जो न सिर्फ लकड़ी के अवैध कारोबारियों पर नजर रखेंगे बल्कि वन्य जीवों के अवैध शिकार और खाल तस्करों को पकड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बस्तर में वन्यजीवों की खाल के लिए इसका बड़े पैमाने पर शिकार होता है, हर साल औसतन दर्जन भर से ज्यादा मामले पुलिस द्वारा खाल तस्करी के पकड़े जाते हैं जबकि जानकारों के मुताबिक वन्य जीवों के शिकार और खाल बेचने के कई मामले तो पकड़ में ही नहीं आते हैं। अब तक वन्यजीवों से संबंधित अपराध के मामलों में तेंदुए की खाल और भालू के नाखून व खाल की बरामदगी अक्सर की जाती है।

जंगल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पारद की प्रथा पर प्रतिबंध के बाद भी यह चोरी छिपे अब भी प्रचलित है जिसमें ग्रामीण सामूहिक तौर पर हाका लगाकर ग्रामीण वन्यजीवों का शिकार करते हैं। शिकार का मांस खाने के बाद इसकी खाल को बेच दिया जाता है जिसे तस्कर बाहर ले जाते हैं। मुख्य वन संरक्षक वी श्रीनिवास राव ने बताया कि ट्रॉफिक संस्था ने स्निफर डॉग और इसके हैंडलिंग के लिए वन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव किया था। छत्तीसगढ़ में पहली बार यह प्रयोग बस्तर में किया जा रहा है। बस्तर में वन्यप्राणी और वन के संवर्धन के लिए सुरक्षा प्रदान करने में खोजी कुत्तों की भूमिका अहम होगी। संवेदनशील क्षेत्र होने से लगातार गश्त के बाद भी अपराधी अपना काम कर जाते हैं, इस पर अब रोक लग सकेगी।

छत्तीसगढ़ में पहली बार हो रहा बस्तर से प्रयोग

एनजीओ ट्रॉफिक देगा प्रशिक्षण वनकर्मियों को

वन और वन्यजीवों से संबंधित अपराध पर नियंत्रण के लिए विश्वस्तरीय एनजीओ ट्रॉफिक वन कर्मियों को डॉग हैंडल करने का प्रशिक्षण देगी। इसके लिए दो वनरक्षकों का नाम फिलहाल भेजा गया है। इनके प्रशिक्षित होने के बाद संस्था वन विभाग को दो स्निफर डॉग उपलब्ध कराया जाएगा जिन्हें जंगल में तैनात किया जाएगा। ओडिशा के साथ ही महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा से लगे होने के कारण बस्तर समेत बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में वन्य जीवों के शिकार के अलावा इमारती लकड़ी की अवैध कटाई की जाती है और इसे सीमावर्ती राज्यों में भेजा जाता है।

पहली बार काजीरंगा नेशनल पार्क में किया था प्रयोग

ट्रॉफिक संस्था वन अपराधों की मॉनीटरिंग करने वाली एनजीओ है, इसके द्वारा सबसे पहले कांजीरंगा नेशनल पार्क में स्निफर डॉग को तैनात किया गया था। वहां गेंडे के सिंग के लिए इसका शिकार किया जाता था। इसके अलावा हाथी दांत, सांप और वन्यप्रणियो की खाल का अवैध कारोबारियों को पकड़ने में वहां काफी सफलता मिली थी।

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