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5वीं और 8वीं के विद्यार्थी अपने ही स्कूलों में जिलास्तर पर देंगे सालाना परीक्षाएं

माशिमं की हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्तर की परीक्षाओं की समय सारिणी तय होने के बाद शिक्षा विभाग ने 5वीं और 8वीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:05 AM IST

माशिमं की हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्तर की परीक्षाओं की समय सारिणी तय होने के बाद शिक्षा विभाग ने 5वीं और 8वीं कक्षाओं की परीक्षाओं की रूपरेखा भी तय की है। यह तो पहले से ही फाइनल हो चुका है कि इस बार ये दोनों परीक्षाएं जिला स्तर पर आयोजित कराई जाएंगी। वहीं यह भी तैयारी अब की जा रही है कि इन परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ब्लाक बदलकर करवाया जाए।

हालांकि परीक्षाओं के दौरान केंद्र नहीं बदलेंगे। छात्र उन्हीं शालाओं में परीक्षा देंगे जहां वे पढ़ते हैं। इसके लिए उन्हें दूसरे स्कूलों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन कापियां दूसरे स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक चेक करेंगे। बस्तर जिले के सातों ब्लाक में यह व्यवस्था बीईओ के माध्यम से कराई जाएगी। 10,12वीं बोर्ड की मुख्य विषयों के पर्चे होने के बाद मार्च के दूसरे पखवाड़े में 5,8वीं क्लास की सालाना परीक्षाएं करवाई जाएंगी। इनके नतीजे अप्रैल में घोषित किए जाने हैं।

रिजल्ट सतत मूल्यांकन से बनेगा : पढ़ाई के स्तर को ऊंचा उठाने और परीक्षा प्रणाली को सुधारने इन दोनों क्लास की परीक्षा विभाग ने जिला स्तर पर आयोजित करने का फैसला लिया है। वहीं शिक्षा के अधिकार के तहत इन कक्षाओं का रिजल्ट सतत् मूल्यांकन के सिस्टम से ही तैयार होना है। इसमें विद्यार्थियों के फेल होने का चांस नहीं रहता। जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र झा ने बताया कि छात्र हित को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला स्तर पर ये परीक्षाएं होंगी। प्रश्न पत्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के द्वारा सेट करके दिए जाएंगे। डीईओ कार्यालय से इन्हें स्कूलों को दिया जाएगा।

ये है वजह: पढ़ाई की जमीनी हकीकत पता चलेगी

ब्लाक बदलकर 5-8वीं के विद्यार्थियों की कापियां चेक करवाने के पीछे वजह यह है कि इन कक्षाओं के नतीजों में पारदर्शिता आएगी। विद्यार्थियों ने जितना पेपर हल किया होगा उतने नंबर उन्हें मिल जाएंगे। इससे प्राइमरी और मिडिल स्तर की पढ़ाई की जमीनी हकीकत अपने आप सामने आ जाएगी। बड़ा फर्क यह पड़ना है कि यदि किसी छात्र को डी ग्रेड मिलता है तो गर्मी की छुट्टियों में अध्यापकों को उन्हें फिर से उन विषयों की तैयारी करानी होगी। इसका फायदा बच्चों को उनकी अगली कक्षाओं में मिलेगा।

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