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7 में से 6 जिलों में सूखा, फिर भी बस्तर के 86,905 किसानों ने 590 करोड़ रुपए का धान बेच डाला

बस्तर संभाग के बस्तर जिले को छोड़कर बीजापुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव और सुकमा और नारायणपुर जिले के सूखाग्रस्त...

Danik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
बस्तर संभाग के बस्तर जिले को छोड़कर बीजापुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव और सुकमा और नारायणपुर जिले के सूखाग्रस्त होने के बाद भी इस साल यहां के 86 हजार 905 किसानों ने 590 करोड़ रुपए का धान 259 खरीदी केंद्रों में बेचा है। वहीं सारी कवायदों के बावजूद 40,446 किसानों ने पंजीयन के बावजूद खरीदी केंद्रों में धान लेकर हीं नहीं आए। सबसे अधिक 264 करोड़ का धान केवल कांकेर जिले के किसानों ने बेचा है। इसके बाद बस्तर जिले में 141 करोड़, कोंडागांव में 101 करोड़ और सुकमा में 26 करोड़ 29 लाख रुपए का धान बेचा गया है। वहीं बीजापुर में 39 करोड़ 61 लाख 62 हजार और दंतेवाड़ा में 6 करोड़ 73 लाख 9 हजार 45 रुपए का धान किसानों ने बेचा।

सूखे के बाद भी उम्मीद से अधिक हुई बिक्री को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती दौर में बारिश नहीं होने से किसान परेशान थे, लेकिन बाद में हुई बारिश ने उनको फायदा पहुंचाया। इसके चलते धान का उत्पादन बढ़ा और समय पर कर्ज पटाने की परंपरा का असर धान की बिक्री पर पड़ा। बैंक के विपणन अधिकारी आर बी सिंह ने बताया कि इस साल बस्तर संभाग में धान की खेती 6,76,473 हेक्टेयर में की गई थी।

134351 किसानों ने पंजीयन कराया था

इस तरह किसानों ने बेचा धान

जिला पंजीयन कराया धान बेचा

बस्तर 24488 18610

बीजापुर 9624 6332

दंतेवाड़ा 9145 3266

कांकेर 60561 44521

कोंडागांव 23340 17611

नारायणपुर 4771 2279

सुकमा 9221 4286

71 दिनों में वसूला गया 197 करोड़ का कर्ज

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने किसानाें को बिना ब्याज के 50 हजार से अधिक किसानों को 315 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। इस साल बैंक ने सहकारी समितियों के जरिए 71 दिनों में ही 197 करोड़ रुपए वसूल किए। सबसे अधिक 108 करोड़ 53 लाख का कर्ज कांकेर जिले के किसानाें को दिया गया था। बस्तर जिले में 103 करोड़ 44 लाख और कोंडागांव जिले में 57 करोड़ 84 लाख, बीजापुर में 23 करोड़ 92 लाख, दंतेवाड़ा में 4 करोड़ 95 लाख और नारायणपुर में 3 करोड़ 58 लाख तथा सुकमा में 8 करोड़ 94 लाख रुपए का कर्ज दिया गया था।

40446 किसानों ने पंजीयन के बाद भी धान नहीं बेचा

धान खरीदी में 12 लाख का घोटाला करने की फिराक में थे लैम्पस प्रबंधक व खरीदी प्रभारी

जगदलपुर | बकावंड ब्लाॅक के करीतगांव धान खरीदी केंद्र में एक बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। यहां धान खरीदी कर रहे प्रभारी ने सात किसानों के 860 क्विंटल धान केंद्र में पहुंचे बिना ही इसे पोर्टल में दर्ज कर दिया था। इसकी शिकायत के बाद तहसीलदार ने गुरुवार को खरीदी केंद्र पहुंचकर जांच की, इसमें 12 लाख का घोटाला किए जाने की कोशिश का पर्दाफाश हुआ।

मिली जानकारी के मुताबिक करीतगांव में बुधवार को धान खरीदी प्रभारी गजेंद्र पानीग्रही ने आपरेटर को खरीदी केंद्र में सात किसानों के नाम धान नहीं आने के बावजूद पोर्टल में दर्ज करने को कहा। आपरेटर के मना करने के बाद भी यह काम जबरन करवाया गया। इसकी जांच करने पहुंचे तहसीलदार आनंद नेताम ने इस मामले में जब आपरेटर से बात की तो उसने इसके लिए खरीदी प्रभारी को जिम्मेदार बताया। तहसीलदार के मुताबिक क्लोजिंग के समय खरीदी रजिस्टर व टोकन पर्ची का मिलान किया गया तो 29 जनवरी को मंचित पिता समदू और 30 जनवरी को 6 किसानाें का टोकन नहीं कटा था। इसके अलावा सातों किसानों का धान खरीदी केंद्र में नहीं आया। इसके बावजूद पोर्टल में खरीदी किए जाना दर्ज कर दिया गया। जांच के लिए पहुंचे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी आरबी सिंह ने बताया कि खरीदी प्रभारी और आपरेटर ने कोई आर्थिक गड़बड़ी नहीं की है। धान खरीदी में गड़बड़ी पाई गई है। इसकी जांच चल रही है। खरीदी प्रभारी और लैम्पस मैनेजर और आपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बकावंड के करीतगांव धान खरीदी केंद्र में गड़बड़ी की जांच के लिए पहुंचे अफसर

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