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तीन हजार किमी का सफर कर दंतेवाड़ा पहुंचीं 20 लाख मधुमक्खियां

कर्नाटक के मल्लाड कुर्क जंगल से निकली 20 लाख मधुमक्खियां करीब 3000 किमी का सफर तय कर दक्षिण बस्तर पहुंची। अब ये...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

तीन हजार किमी का सफर कर दंतेवाड़ा पहुंचीं 20 लाख मधुमक्खियां
कर्नाटक के मल्लाड कुर्क जंगल से निकली 20 लाख मधुमक्खियां करीब 3000 किमी का सफर तय कर दक्षिण बस्तर पहुंची। अब ये मक्खियां बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के आस-पास डेरा जमाकर शहद इकट्ठा करेंगी। इन मधुमक्खियों को लाने के लिए खास तरह के 200 बाक्सों का इस्तेमाल किया गया। हरेक बाक्स में औसतन 10000 मधुमक्खियां होती हैं।

इन बाक्सों में पैक कर पहुंचाई गई मधुमक्खियों को रविवार को जिले के कमेली गांव में उतारकर बी-बाक्सों में शिफ्ट किया गया। पहुंचने से पहले 9 दिन के पूरे सफर के दौरान खास सावधानियां बरती गईं। रात के अंधेरे में ही गाड़ी को आगे चलाया गया, ताकि मधुमक्खियां सूरज की रोशनी पाकर बिदक न जाएं। मधुमक्खियों की खेप के साथ कर्नाटक के बेंगलूर से आए एक्सपर्ट लोहित कुमार ने बताया कि कर्नाटक में एपिस सिराना इंडिका मक्खियों की ब्रीडिंग का काम मल्लाड कुर्क जंगल में चल रहा है, जहां से ये लेकर आए है। परिवहन के वक्त खास सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। भारतीय प्रजाति की ये मधुमक्खियां बस्तर की जलवायु के अनुकूल हैं।

छत्तीसगढ़ विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद और जिला प्रशासन की ओर से मधुमक्खी पालन के लिए ग्रामीणों को प्रेरित कर रहे रामनरेंद्र ने बताया कि अब तक जिले में 300 लोग मधुमक्खी पालन से जुड़े हैं, और मानसून आगमन तक 800 से 1000 लोग इस काम में लग जाएंगे। मंगाई गई मधुमक्खियों को बाक्सों के जरिए मधुमक्खी पालक किसानों को सौंपा जाएगा।

विदेशी मधुमक्खी को रास नहीं आई आबो हवा

इसके पहले इटालियन मूल की मधुमक्खी एपीस मिलिसेरा को बस्तर में लाकर पालने की कोशिश की गई थी, लेकिन यहां की जलवायु इन विदेशी मधुमक्खियों के अनुकूल नहीं पाई गई।

इस वजह से भारतीय प्रजाति की एपीस इंडिका सिराना को कर्नाटक से लाकर यहां पर पालन किया जा रहा है। हालांकि बीजापुर जिले में एपीस मिलिसेरा मधुमक्खियों का इस्तेमाल शहद उत्पादन में किया जा रहा है।

मधुमक्खी पालन

कमेली समेत जिले के अन्य गांवों के ग्रामीणों की बढ़ाएंगी आमदनी, 200 बाॅक्सों में मधुमक्खियों आईं, हरेक बाॅक्स में औसतन 10000 मधुमक्खियां मौजूद

बस्तर की मधुमक्खियों को भी काबू में करने की तैयारी

रामनरेंद्र के मुताबिक स्थानीय स्तर पर पाई जाने वाली मधुमक्खियों को भी काबू में कर उनसे शहद उत्पादन कराया जाएगा। अभी यहां पर सबसे बड़ी प्रजाति बाघ ओंडार यानि डोसाल्टा के अलावा दीमक की बांबी और पेड़ की कोटर में पाए जाने वाले मधुमक्खियों के स्वभाव पर नजर रखी जा रही है। जल्द ही इन छत्तों की रानी मधुमक्खियों की पहचान कर छत्ते और अन्य मधुमक्खियों के साथ बी-बॉक्स के फ्रेम में लाया जाएगा। 60 लोग इस कार्य में लगे हैं।

कर्नाटक से लाई गई मधुमक्खियों को हरे रंग के बी-बॉक्स में शिफ्ट करते तकनीशियन।

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