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सेमी के पत्ते, पालक, लाल भाजी और फ्लॉवर्स से बना रहे हैं नेचुरल कलर्स

Bastar News - स्किन इंफेक्शन से बचने के लिए रायपुरियंस अब नेचुरल कलर्स से ही होली सेलिब्रेट करने में इंट्रेस्ट ले रहे हैं। शहर...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:10 AM IST
सेमी के पत्ते, पालक, लाल भाजी और फ्लॉवर्स से बना रहे हैं नेचुरल कलर्स
स्किन इंफेक्शन से बचने के लिए रायपुरियंस अब नेचुरल कलर्स से ही होली सेलिब्रेट करने में इंट्रेस्ट ले रहे हैं। शहर में ही गेंदा, गुलाब, सेमी और केले के पत्ते, लाल भाजी, पालक भाजी और चुकंदर सहित कई फ्लॉवर्स, सब्जियों और फ्रूट्स से नेचुरल कलर्स तैयार किए जा रहे हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अलावा दंतेवाड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र में भी बड़ी मात्रा में रंग और गुलाल बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसके पाटिल ने बताया कि हर्बल गुलाल बनाने के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। आने वाले समय में दूसरे सेंटर्स में भी रंग गुलाल बनाने का काम शुरू किया जाएगा। सिटी भास्कर की इस रिपोर्ट में जानिए नेचुरल कलर्स बनाने की प्रोसेस और उनके फायदे। साथ ही जानिए केमिकल मिक्स कलर्स के नुकसान।

जानिए किस गुलाल में कौन-सा केमिकल मिलाया जाता है : मार्केट में मिलने वाले ग्रीन कलर के गुलाल में कॉपर सल्फेट, लाल गुलाल में बुध सल्फाइट, बैगनी गुलाल में क्रोमायम आयोडाइड, सिल्वर गुलाल में एल्युमिनियम ब्रोमाइड के अलावा लेड ऑक्साइड मिलाया जाता है। इससे आंखों में एलर्जी, स्किन कैंसर, अस्थमा होने की आशंका होती है।

एक किलो हर्बल गुलाल तैयार करने में लगते हैं तीन दिन : दंतेवाड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट डाॅ. नारायण साहू पिछले साल से सब्जियों, पत्ते और फूल से गुलाल बना रहे हैं। इससे बस्तर की महिलाओं को रोजगार और लोगों को स्किन फ्रेंडली हर्बल गुलाल मिल रहा है। एक किलो गुलाल तैयार करने में लगभग तीन दिन लगते हैं। लागत आती है 114 रुपए। ये हर्बल गुलाल छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों में भी सप्लाई किया जा रहा है।

कृषि विवि के केंद्र में ऐसे बनाया जाता है नेचुरल गुलाल।

जानिए कैसे बनाते हैं नेचुरल कलर्स और गुलाल

टेसू और पलाश से : टेसू और पलाश से रंग बनाने के लिए बड़ी बाल्टी में पानी गर्म किया जाता है। खौलते पानी में टेसू और पलाश के सूखे फूल डाले जाते हैं। पानी तब तक उबाला जाता है जब तक वो सिर्फ चौथाई न हो जाए। जानकारों के अनुसार इस फूल से बने रंगों से होली खेलने पर स्किन में निखार आता है। चिकन पॉक्स से पीड़ित लोगों के लिए भी पलाश के फूल का पेस्ट अच्छा माना जाता है। इस रंग से स्किन को काफी ठंडकता मिलती है।

इन सब्जियों से भी बना रहे हैं रंग-गुलाल : चुकुंदर, हल्दी, भिंडी, धनिया और गेंदे के फूलों से भी आलू और तिखूर पाउडर मिलाकर रंग तैयार किए जा रहे हैं। आलू में मैग्निशियम, जिंक, पोटेशियम के अलावा बी कॉम्पलेक्स और विटामिन सी होता है, जो स्किन के मुहांसे और दाग धब्बे दूर करता है।

पालक और लाल भाजी से : पालक और लाल भाजी को बारीक काटते हैं। फिर अलग-अलग बर्तन में 18 घंटे के लिए पानी में डुबोकर रखते हैं। इनका रंग पानी में आ जाता है। इस पानी को गाढ़ा करने अरारोट या आलू पाउडर मिलाते हैं। पालक में विटामिन ए, बी 2, ई और लौह अयस्क होते है, जो आंख, स्किन और बालों के लिए फायदेमंद होते हैं। लिहाजा, इन भाजियों से बना रंग स्किन के लिए अच्छा माना जाता है।

सेमी और केले के पत्ते से : सेमी और केले के पत्ते से भी नेचुरल कलर्स बनाए जा रहे हैं। इसके लिए पत्तों को सुखाकर गर्म पानी में उबाला जाता है। इसे पानी चौथाई होने तक उबालते हैं, फिर छानकर ठंडा करते हैं। इस तरह रंग तैयार हो जाता है। गुलाल बनाने के लिए इस पानी में तिखूर का पाउडर डालकर सुखाया जाता है। तीन दिन में घोल सूखकर गुलाल बन जाता है।

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