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नक्सलियों के खंडहर किए भवन में रहते और पढ़ते हैं बच्चे, अधीक्षक आते हैं 10-15 दिन में

बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा ब्लाॅक के पिच्चीकोडेर बालक आश्रम में पढ़ने वाले बच्चे सुविधाओं को मोहताज जरूर हैं,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:10 AM IST

नक्सलियों के खंडहर किए भवन में रहते और पढ़ते हैं बच्चे, अधीक्षक आते हैं 10-15 दिन में
बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा ब्लाॅक के पिच्चीकोडेर बालक आश्रम में पढ़ने वाले बच्चे सुविधाओं को मोहताज जरूर हैं, लेकिन इन बच्चों की आंखों में पढ़-लिखकर कुछ कर दिखाने के सपने जरूर पल रहे हैं। भास्कर की टीम जब गांव पहुंची तो नक्सलियों के ध्वस्त भवन के एक बरामदे में कक्षाएं चल रही थीं। 100 में से 31 बच्चे ही मौजूद थे। पूछताछ पर यह भी पता चला कि आश्रम अधीक्षक इस आश्रम में 10 से 15 दिनों में एक बार ही आते हैं। 100 सीटर के आश्रम में 61 बच्चे रहकर कक्षा पहली से पांचवी तक की पढ़ाई करते हैं। इतने अंदरुनी गांव में इनका ध्यान रखने रसोइया बुधराम ही इनके पास रूकता है लेकिन हड़ताल के चलते वह भी यहां नहीं रूक पा रहा है । ऐसे में घने जंगल के बीच ध्वस्त आश्रम में बच्चे अकेले रहने को मजबूर हैं।

पीने के पानी की किल्लत, नहाने नदी जाते हैं बच्चे

नक्सलियों के ध्वस्त किए खंडहर की तरह पड़े आश्रम में बच्चे रहते हैं। पीने के पानी के लिए एक हैंडपंप जरूर है, लेकिन पानी कम निकलता है। आश्रम में शौचालय भी नहीं हैै। ऐसे में नहाने के लिए बच्चे आश्रम से करीब आधा किलोमीटर दूर बहने वाली नदी व शौच के लिए जंगल जाते हैं। ऐसे में हादसे का खतरा भी इनके सिर पर मंडराता है। इस हाॅस्टल का जायजा लेने अफसर भी आ चुके हैं। लेकिन अब तक नतीजे में कुछ भी नहीं मिल पाया।

विधायक को नहीं जानते...

जब विधायक कौन है पूछा गया तो सभी बच्चे एक-दूसरे की ओर देखने लगे, इस प्रश्न का उत्तर जानने दिलचस्पी इसलिए ज्यादा बढ़ गई क्योंकि इस संस्था में पदस्थ अधीक्षक रमेश बैज के भाई दीपक बैज ही इस क्षेत्र के विधायक हैं लेकिन मजे की बात यह रही कि ये बच्चे विधायक का नाम नहीं बता पाए।

दंतेवाड़ा. बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा ब्लाॅक के पिच्चीकोडेर बालक आश्रम में पढ़ाई करते बच्चे।

असुविधाओं के बीच भी पढ़ाई में आगे हैं बच्चे

इतनी विसंगतियों के बाद भी बच्चे पढ़ाई में होशियार दिखे। यहां पदस्थ तीन शिक्षकों में एक अतिथि शिक्षक महेश कुमार बच्चों को पढ़ा रहे थे। चंद मिनटों बाद दूसरे शिक्षक धनेश्वर बढ़ई भी पहुंचे जबकि शिक्षक कमलजीत कोसरिया अवकाश पर बताए गए। यहां भास्कर टीम ने जब बच्चों से बातचीत की तो छात्र गोविंद हो या मुकेश कोई बच्चा शिक्षक, कोई डाॅक्टर तो कोई सचिव बनने की चाह रखे हुए था। यहां बच्चे हर एक सवाल का जवाब फर्राटे से दे रहे थे, बच्चों ने प्रधानमंत्री से लेकर जिले के कलेक्टर तक का नाम बता दिया।

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Web Title: नक्सलियों के खंडहर किए भवन में रहते और पढ़ते हैं बच्चे, अधीक्षक आते हैं 10-15 दिन में
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