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शक्तिपीठ में मिट्टी के नए बर्तन में देवी ने ग्रहण किया नए अन्न का भोग, पोला पर्व भी मनाया

दंतेवाड़ा | पोला-पिठौरा पर्व पर शक्तिपीठ दंतेश्वरी मंदिर में मिट्टी के बैलों की पूजा-अर्चना हुई और देवी ने मिट्टी...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 02:10 AM IST
दंतेवाड़ा | पोला-पिठौरा पर्व पर शक्तिपीठ दंतेश्वरी मंदिर में मिट्टी के बैलों की पूजा-अर्चना हुई और देवी ने मिट्टी के नए पात्रों में नई फसल के अनाज का भोग ग्रहण कर नवाखानी पर्व की शुरुआत की। परंपरानुसार पोला पर्व की पूर्व संध्या पर यह कार्यक्रम हुआ। इसमें कुम्हाररास से कुम्हारों के लाए मिट्टी के कलशनुमा पात्रों में देवी-देवताओं को भोग अर्पित किया। इसके बाद मिट्टी के बर्तनों को मंदिर के सेवादारों, सेवकों और जन-सामान्य में बांट दिया। मंदिर के पुजारी सलिन्द्रनाथ ने बताया कि नई फसल के अनाज को ग्रहण करने के पर्व नवाखानी की शुरूआत सबसे पहले शक्तिपीठ दंतेश्वरी मंदिर से होती रही है। यहां देवी को नए अनाज का भोग लगने के बाद ही गांवों में अलग-अलग दिन नवाखानी पर्व मनाया जाता है। यह परंपरा करीब 700 साल से चली आ रही है। शक्तिपीठ दंतेवाड़ा में इस रस्म के बाद ही बस्तर दशहरा पर्व में राजपरिवार कुलदेवी के साथ नवाखानी पर्व मनाता है।

मिट्टी के खिलौने मिले बच्चों को : पोला पर्व के लिए कुम्हारों ने इस बार भी काफी संख्या में मिट्टी के बैल और खिलौने बनाए थे, जिन्हें खरीदने बच्चों में खासा उत्साह देखा गया।

कतियार लेकर आए नए अनाज

देवी की नवाखानी रस्म के लिए इस बार शिवचंद्र कतियार नया अनाज लेकर आए। इसके लिए उन्होंने काफी पहले से धान की कम अवधि वाली किस्म के पौधे उगाए थे, ताकि पोला पर्व की रस्म तक यह फसल पककर तैयार हो सके। बीते साल चंदेनार गांव से देवी के लिए नई फसल का अनाज आया था।

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