बस्तर

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कॉलेजों में ग्रेजुएशन की पढ़ाई फिर पुराने कोर्स से

रविवि समेत राज्य के पांच विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में ग्रेजुएशन की पढ़ाई इस बार भी पुराने पैटर्न पर होगी।...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:15 AM IST
रविवि समेत राज्य के पांच विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में ग्रेजुएशन की पढ़ाई इस बार भी पुराने पैटर्न पर होगी। बीए, बीकॉम, बीएससी समेत ग्रेजुएशन की अन्य कक्षाओं के कोर्स में इस बार भी बदलाव की संभावना कम है। वहीं दूसरी ओर राज्य बोर्ड के तहत स्कूली पाठ्यक्रम बदलेगा। कक्षा नवमीं-दसवीं को छोड़कर शेष अन्य कक्षाओं में इस साल नए कोर्स के अनुसार पढ़ाई होगी।

रविवि, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा व बस्तर विश्वविद्यालय से करीब चार सौ कॉलेज जुड़े हैं। यहां बीए, बीकॉम व बीएससी समेत ग्रेजुएशन के अन्य कक्षाओं में छात्र क्या-क्या पढ़ेंगे इसका पूरा सिलेबस उच्च शिक्षा की देखरेख में तैयार करने का प्रावधान है। लेकिन पिछले दस बरसों से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। नए शिक्षा सत्र के तहत जुलाई से क्लास लगनी शुरू होगी। वहां फिर पुराने कोर्स से ही पढ़ाई होगी। क्योंकि इस बार भी बदलाव की संभावना कम है। कोर्स के लिए उच्च शिक्षा की देखरेख में सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक होती है। इसमें दिए गए सुझाव के अनुसार शासन स्तर पर बदलाव होता है। लेकिन बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक ही करीब सात-आठ साल में सिर्फ दो बार हुई है। इस बार भी इसकी बैठक होगी, इसकी संभावना भी कम है। सूत्रों के मुताबिक कुछ बरस पहले इसकी बैठक हुई थी। कोर्स में बदलाव के लिए सुझाव भी दिए गए थे, लेकिन मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। इससे यह साफ है कि न तो विश्वविद्यालयों को कोर्स में बदलाव को लेकर रुचि है और न ही उच्च शिक्षा को।

स्कूल में नवमीं-दसवीं को छोड़कर शेष कक्षाओं में नया पाठ्यक्रम

गुणवत्ता कैसे आएगी

शिक्षाविदों ने बताया कि कोर्स के प्रति बदलाव नहीं होने से गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। समय के साथ बहुत सारी चीजें बदली हैं, लेकिन उच्च शिक्षा में अब भी सब पुराना है। बरसों से कोर्स नहीं बदलने के कारण शिक्षक भी पढ़ाई को लेकर तैयारी नहीं करते। छात्र भी पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं लेते। सब कुछ सिर्फ परीक्षा तक ही सीमित रह गया है। कोर्स को लेकर विषय से संबंधित बोर्ड ऑफ स्टडीज के कुछ सदस्यों ने बताया कि बैठक कराने का काम उच्च शिक्षा का है, लेकिन वह ही इस पर ध्यान नहीं देता। इसमें सुधार नहीं हुआ तो आगामी कुछ बरसों तक पुराने कोर्स से ही पढ़ाई होगी।

नवमीं-दसवीं को छोड़कर सबमें बदलाव : स्कूली पाठ्यक्रम में इस साल बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू होगा। तब विद्यार्थी नए कोर्स के अनुसार पढ़ाई करेंगे। नवमीं-दसवीं में इस साल बदलाव नहीं होगा।

दसवीं का कोर्स पिछले साल बदला था। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में कई छोटे-बड़े बदलाव किए हैं। जैसे चौथी व छठवीं में वैदिक गणित। अंग्रेजी के तहत कक्षा तीसरी में छात्र वर्तमान काल, भूतकाल व भविष्य काल भी पढ़ेंगे। पहले यह पांचवीं से था। लेटर राइटिंग का पाठ भी चौथी-पांचवीं में होगा। पहले लेटर राइटिंग कक्षा छठवीं के बाद था। कक्षा ग्यारहवीं में पिछले साल आर्ट्स को छोड़कर अन्य विषयों में एनसीईआरटी को कोर्स लागू किया गया था। इस बार आर्ट्स की पढ़ाई भी इसी कोर्स से होगी। एनसीईआरटी की किताबों से इस साल बारहवीं की पढ़ाई भी होगी।

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