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बारसूर आए तेलंगाना से सैलानी, जो हिंदी न समझ सके उन्हें अंग्रेजी में बताया गया धरोहरों के बारे में

जिले की ऐतिहासिक नगरी बारसूर में रविवार को हेरिटेज ड्राइव एंड वॉक का आयोजन कर सैलानियों को ऐतिहासिक धरोहरों के...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 02:10 AM IST
जिले की ऐतिहासिक नगरी बारसूर में रविवार को हेरिटेज ड्राइव एंड वॉक का आयोजन कर सैलानियों को ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में बताया गया। सुबह से शुरू हुए इस कार्यक्रम में बत्तीसा मंदिर, मामा-भांजा मंदिर, युगल गणेश प्रतिमा और चंद्रादित्येश्वर मंदिर के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व की जानकारी दी गई। मंदिरों के इतिहास के अलावा इनसे जुड़ी किवदंतियों, संरक्षण के उपायों के बारे में भी बताया गया। हिंदी नहीं समझ पाने वाले दूसरे राज्यों के सैलानियों को अंग्रेजी में जानकारी देने की भी व्यवस्था की गई थी। बस्तर भ्रमण पर पहुंचे तेलंगाना के हैदराबाद से आए सैलानी श्रीधर और उनके परिवार ने काफी जानकारियां जुटाई और मामा-भांजा मंदिर से जुड़ी किवदंती और इसके इतिहास में काफी दिलचस्पी दिखाई। इसी तरह बिलासपुर से आए शिखर जैन और उनके साथी युवाओं ने बत्तीसा मंदिर के दोहरे गर्भगृह और इसके खंभों की कलात्मकता को सराहा।

जिला प्रशासन और अनएक्सप्लोर्ड बस्तर ग्रुप की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद निशुल्क बारसूर की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पहचान दिलाना है। ग्रुप की ओर से बिंदु ब्लॉसम ने बताया कि पहली बार आयोजित हेरिटेज ड्राइव में शामिल लोगों की संख्या कम जरूर थी, लेकिन इसके उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। इसी महीने 17 सितंबर को फिर से यह आयोजन बारसूर में किया जाएगा, ताकि विश्वकर्मा जयंती पर छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों व देश के दूसरे प्रांतों से आने वाले सैलानियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जा सके। स्थानीय युवा नितेश नेगी ने बताया कि अगली बार इस आयोजन में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की कोशिश होगी।

दंतेश्वरी मंदिर और सोलह खंभा मंदिर तक भी पहुंचा दल

केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित दंतेश्वरी मंदिर में भी आयोजक दल ने लोगों को भ्रमण कराकर जानकारियां दी। इसके अलावा खंडहर में तब्दील हो रहे सोलह खंभा मंदिर तक जाकर फोटोग्राफी की और इसके बारे में जानकारियां जुटाई, ताकि इसके संरक्षण के लिए शासन स्तर तक जानकारी पहुंचाई जा सके।

मामा-भांचा मंदिर के बारे मे सैलानियों को जानकारी देते ग्रुप के सदस्य