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न पेंशन मिली और न ही आवास, अब भीख मांगकर गुजारा करना मजबूरी

दुर्गूकोंदल| शरीर में ताकत थी तब सबके घर मजदूरी मदद करता था। बुढ़ापा आया तो गांव में कोई भी पनाह नहीं दे रहा है जिसके...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
दुर्गूकोंदल| शरीर में ताकत थी तब सबके घर मजदूरी मदद करता था। बुढ़ापा आया तो गांव में कोई भी पनाह नहीं दे रहा है जिसके चलते मजबूरी में शेखनाथ जैन को भीख मांग गुजारा करना पड़ रहा है।

केन्द्र और राज्य सरकार गरीबों के लिए मकान तथा पेंशन की बहुत सी योजनाएं चला रही है लेकिन उसे इनमें से किसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। राशन कार्ड, पेंशन, आवास की मांग को लेकर जनदर्शन में आवेदन दिया पर कहीं कोई फायदा नहीं हुआ। बुजुर्ग शेखनाथ जैन ने बताया वह अंतागढ़ विकासखंड के ताड़ोकी गांव का है। कई सालों से गांव छोड़ भानुप्रतापपुर के विक्रमगंज घोटिया में लोगों के घर मजदूरी कर जीवन यापन चलाता था। कुछ दिनों से शरीर कमजोर होने कारण मजदूरी नहीं कर पा रहा है और नौबत भीख मांगने की आ गई। रहने कोई ठिकाना नहीं है जिसके चलते कभी बाजार शेड के नीचे तो कभी पेड़ के नीचे रात गुजारनी पड़ती है। शेखनाथ ने बताया कि हाथ पांव मजबूत थे शरीर में ताकत थी तो काम के बदले उसे पनाह मिल जाती थी।

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