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तेंदूपत्ता संग्राहकों की सरकार को भी है चिंता: दुग्गा

भानुप्रतापपुर एवं दुर्गूकोंदल समितियों के लिए तेंदूपत्ता शाखकर्तन सह कार्यशाला प्रशिक्षण की आयोजन जिला लघु...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:05 AM IST
भानुप्रतापपुर एवं दुर्गूकोंदल समितियों के लिए तेंदूपत्ता शाखकर्तन सह कार्यशाला प्रशिक्षण की आयोजन जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित पूर्व भानुप्रतापपुर द्वारा वन मंडल प्रांगण में किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक देवलाल दुग्गा ने कहा भाजपा की सरकार रमन सिंह द्वारा बेहतर सुविधा एवं योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि समय-समय पर तेंदूपत्ता व 26 अन्य प्रकार के लघु वनोपज शासन द्वारा खरीदी किया जाता है। इससे आप सरकारी व्यापारी हो। संग्राहकों की चिंता भी सरकार को है इसलिए प्रतिभावन बच्चों को छात्रवृति, हितग्राहियों को बीमा लाभ, चरण पादुका का लाभ दिया जा रहा है। धान की खेती से कोई भी धनवान नहीं हुआ है इसके बजाए लघुवनोपज पर अधिक ध्यान देने की बात कही। खाली पड़े जमीन में कोदो का उत्पादन करें यह दो सौ से 5 सौ रुपए प्रतिकिलो तक बिकता है।

प्रदेश उपाध्यक्ष लघुवनोपज टीकम टांडिया ने कहा प्रदेश की 44 प्रतिशत लोग वनोपज संग्रहित कर जीविकोपार्जन करते हुए सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति की ओर अग्रसर हुए हैं। शाखकार्तन करने का उद्देश्य अच्छे गुणवतायुक्त तेंदूपत्ता का संग्रहण अधिक मात्रा में करना है। इसके लिए बूटा कटाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मध्यप्रदेश शासनकाल में प्रति मानक बोरा 450 रुपए थी जो अब बढ़कर 2500 रुपए मानक बोरा हो गई है। संग्राहक परिवार के लिए अनेक योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जा रही है।

भानुप्रतापपुर और दुर्गूकोंदल समिति के लिए हुआ तेंदूपत्ता शाखकर्तन पर आयोजन

भानुप्रतापपुर. तेंदूपत्ता शाखकर्तन पर दिया गया प्रशिक्षण।

15 मार्च तक हो जानी चाहिए बूटा कटाई

एसडीओ लक्ष्मण गायकवाड ने कहा शाखकर्तन तेंदूपत्ता से संबंधित है इसलिए फंड के साथ ही विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बूटा कटाई का कार्य 15 फरवरी से 15 मार्च की बीच हो जाना चाहिए। प्रदेश में पूर्व मंडल भानुप्रतापपुर गुणवता युक्त तेंदुपत्ता में अग्रणी है। सबसे अधिक बोनस 87 हजार तक की बोनस राशि संग्राहक को मिला है। एसडीओ पी सिंह ने तेंदूपत्ता से संबंधित जानकारी दी। तेंदूपत्ता के बंडल बनाने में रामदतुन का उपयोग न करते हुए खजुर के पत्ते को रस्सी के रूप में उपयोग करने कहा। खजूर के पत्तों में दीमक नहीं लगती, रामदातुन धीरे धीरे विलुप्त होती जा रही है, उसे बचाने की जरूरत है। कार्यक्रम में नरोत्तम सिंह चौहान, आयनु धु्रव, रैनसिंह कोठारी, रमेश बघेल, सोनसाय कोमरा, जोहन गावड़े, मानबाई उसारे, संतोष दुग्गा, परिक्षेत्र अधिकारी लखन नागेश, दुर्गूकोंदल रेंजर देवलाल दुग्गा आदि उपस्थित थे।