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बैचेन मां ने बच्चों को देख लोगों को गिरते-पड़ते बुलाया, तब तक उजड़ चुका था परिवार

हादसे में महिला का परिवार उजड़ गया अब उसके अलावा परिवार में उसका पति रह गया है।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 02, 2018, 05:28 AM IST

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    3 मासूमों ने मामूली सी गलती की कीमत जान देकर चुकाई।

    अंबिकापुर(छत्तीसगढ़).ग्राम गुमगरा में कमरे में बुधवार-गुरुवार की रात सिगड़ी को बुझाए बिना एक महिला अपने बच्चों के साथ सो रही थी। कोयले की जहरीली गैस से जब महिला को बैचेनी हुई तो वह उठी। बच्चों को बेहोश देख वह पड़ोसियों को बुलाने गिरते-पड़ते बाहर निकली लेकिन तक बच्चों की मौत हो चुकी थी। वहीं महिला को हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    ऐसे उजड़ गया महिला का परिवार
    ग्राम गुमगरा के रहने वाले मोहर साय हादसे के दौरान वह शहर से बाहर था। घर में उसकी पत्नी हीरा बाई (35) और बेटा प्रेमचंद (13), प्रीतम (11) और बेटी आरती (10) थे। बुधवार की रात हीरा बाई कमरे में ही कोयले की जलती सिगड़ी छोड़कर बच्चों के साथ सो गई। दोनों बेटे एक चारपाई पर सोए हुए थे। हीरा बाई बेटी आरती को लेकर एक अलग सोई हुई थी। सुबह हीरा बाई को बेचैनी लगने लगी। उसकी नींद खुली तो बेटी आरती चारपाई से नीचे गिरी हुई थी। उसने किसी तरह उठकर पड़ोसी को जाकर बताया कि उसकी बेटी उठ नहीं रही है। पड़ोसी ने कमरे में जाकर देखा तो महिला की बेटी और दोनों बेटों की मौत हो गई थी।

    हादसे में हीरा बाई का उजड़ गया परिवार, गांव में पसरा मातम

    हादसे में हीरा बाई का परिवार उजड़ गया है। अब हीरा बाई के अलावा उसके परिवार में उसका पति मोहर साय रह गया हैं। दूसरे शहर में होने के कारण उसे बच्चों की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। उसे बच्चे के बीमार होने की बात कहकर रिश्तेदारों ने बुलाया है। वह घर आने के लिए वहां से लौट गया है। उसके आने के बाद ही उसके बच्चों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। घटना से गांव में मातम पसर गया है।

    छोटे कमरे में पटाव की है छत, खिड़की भी थी बंद

    हीरा बाई जिस कमरे में बच्चों के साथ सोई थी वह काफी छोटा है। कमरे की छत पटाव वाली है। उसमें एक खिड़की है जो रात में ठंड के कारण उन्होंने बंद कर दी थी। इससे कोयले के जलने से कमरे में भरे कार्बन मोनो आक्साइड गैस को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। कम उम्र होने के कारण कमरे में सो रहे तीनों बच्चों पर इसका असर ज्यादा हुआ जिससे उनकी मौत हो गई।

    खाना बनाकर रोज कमरे से निकाल देती थी सिगड़ी

    हीराबाई के यहां कोयले की सिगड़ी पर भी खाना बनता है। आस-पास के लोगों के मुताबिक, खाना बनाने के बाद हीरा बाई कमरे से सिगड़ी बाहर निकाल दिया करती थी। बुधवार की रात उसने बच्चों के साथ ही कमरे के अंदर ही कोयले की सिगड़ी पर खाना बनाया था। इसके बाद खाना खाकर आठ बजे के आस-पास सभी सो गए थे लेकिन बुधवार को वह सिगड़ी नहीं निकाल पाई थी। इससे इतना बड़ा हादसा हो गया।

    लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया तो बच गई जान
    लोगों ने हीरा बाई को एंबुलेंस से तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखनपुर में ले जाकर भर्ती कराया। वहां डाॅक्टरों ने भी तत्परता दिखाई। उसका इलाज शुरू हुआ जिससे उसकी जान बच गई। उसका लखनपुर अस्पताल में ही इलाज चल रहा है। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। डाॅक्टरों के मुताबिक कोयले के जहरीली गैस के असर से महिला को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। यदि अस्पताल लाने में देर होती तो उसकी भी जान जा सकती थी।

    कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा बढ़ने से मौत

    सीनियर एफएसएल साइंटिस्ट के मुताबिक, बंद कमरे में कोयला जलने से उससे निकले कार्बन मोनोआक्साड की मात्रा बढ़ गई। कमरे में आक्सीजन के आने की जगह नहीं होने से उसमें सो रहे लोग कार्बन मोनाआक्साडड ही सांस से लेते रहे। यह जहरीली गैस है। शरीर में आक्सीजन खत्म हो गया और धीमे श्वसन से बच्चों की मौत हो गई। महिला पर भी इसका असर हुआ लेकिन बड़ी होने के कारण उसकी जान बच गई।

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    तीनों बच्चे महज 13 से 10 साल के बीच के थे।
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    हादसे में मरने वाले तीनों बच्चों की मां अस्पताल में इलाज के लिए एडमिट है।
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    तीनों मासूमों की यादें केवल तस्वीरों में सिमट कर रह गई।
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