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2 प्रोफेसरों पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप: स्टूडेंट ने नेम प्लेट पर पोती कालिख

आरोप है कि 2015 से लगातार आरोपी प्रोफेसर्स विक्टिम पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव बना रहे हैं।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 08:54 AM IST
मामला समाने आने के बाद छात्रों मामला समाने आने के बाद छात्रों

बिलासपुर. डीपी विप्र कॉलेज की महिला सहायक प्राध्यापक के शिकायत के बाद दो प्रोफेसरों के खिलाफ पुलिस ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कर लिया। मामला समाने आने के बाद शनिवार को छात्रों ने कॉलेज परिसर में हंगामा मचाया। छात्रों ने प्रोफेसर सुबीर सेन और दुर्गा शरण चंद्रा को सस्पेंड करने की मांग की। साथ ही छात्रों ने प्रोफेसर सुबीर सेन के कक्ष में नारेबाजी करते हुए उनके नेम प्लेट को उखाड़ा। उस पर कालिख पोती और उसे तोड़ दिया। वहीं इस मामले में कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि गर्वनिंग बॉडी की एमरजेंसी बैठक बुलाई गई। उसमें निर्णय लिया जाएगा कि प्रोफेसर क्या कार्रवाई की जाए।

पीएम ऑफिस तक भेजी जा चुकी है शिकायत
- बिलासपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध डीपी विप्र कॉलेज में लगातार महिला उत्पीड़न का मामला समाने आ रहा है। डीपी विप्र कॉलेज की महिला सहायक प्राध्यापक ने वाणिज्य संकाय के प्रोफेसर सुबीर सेन व भौतिक विभाग के प्रोफेसर दुर्गा शरण चंद्रा की शिकायत की है।

- सहायक प्राध्यापिका ने प्रोफेसरों पर आरोप लगाया है कि 2015 से लगातार उनके साथ अभद्र टिप्पणी और शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। पीड़िता ने सैनिक कल्याण बोर्ड से मदद मांगी थी। वहां से शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी गई थी। पीएमओ से आए पत्र के बाद प्रोफेसरों के खिलाफ सिटी कोतवाली थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।

छात्रों ने मचाया हंगामा

- वहीं इस मामले के सामने आने के बाद शनिवार को छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में हंगामा मचाया। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए वाणिज्य संकाय के प्रोफेसर सुबीर सेन के कक्ष में गए। वहां छात्रों ने नारेबाजी की।

- इसके बाद प्रोफेसर सेन के नेम प्लेट को उखाड़ा और उस पर स्याही पोती। पैरे से मारा। इसके बाद उसे तोड़ दिया।

- इसके बाद छात्र भौतिक विभाग के प्रोफेसर दुर्गा शरण चंद्रा के कक्ष में गए। उनका कक्ष बंद था। यहां नारेबाजी की। नारेबाजी करने के बाद छात्र प्राचार्य डॉ. सुनंदा तिजारे के पास पहुंच प्रोफेसरों को सस्पेंड करने की मांग की। - प्राचार्य डॉ. तिजारे ने चेयरमैन अनुराग शुक्ला से फोन पर चर्चा की। चेयरमैन शुक्ला ने एमरजेंसी गर्वनिंग बॉडी की बैठक बुलाने कहा।

- छात्रों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि ऐसे प्रोफेसरों को तुरंत कॉलेज से हटाया जाए। इससे अभी महिला प्रोफेसरों के अलावा छात्राओं को भी समस्या हो सकती है। कॉलेज में छात्रों से ज्यादा छात्राएं अध्ययनरत हैं।

मैं उस महिला प्राध्यापक को पहचानता तक नहीं हूं

- भौतिक विभाग के प्रोफेसर दुर्गा शरण चंद्रा ने कहा कि मैं तो उस महिला प्रोफेसर को पहचानता तक नहीं हूं। अगर हम लोग 2015 से ऐसा कर रहे थे, तो वह आती ही क्यों थीं। अगर ऐसा हो रहा था तो कॉलेज प्रबंधन और महिला सेल में तो शिकायत करनी थी। वहां भी नहीं कीं।

मौखिक शिकायत की थी
डीपी विप्र कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सुनंदा तिजारे ने कहा कि सहायक प्राध्यापिका ने मुझसे मौखिक शिकायत की थी। लिखित में नहीं की इसलिए जांच नहीं कराई गई। पुलिस ने मुझसे बुलाकर पूछा है।

महिला को कॉलेज प्रशासन इसीलिए रखी है
"प्रोफेसर सुबीर सेन ने बताया कि 2015 से 17 के बीच उस महिला प्रोफेसर से बात तक नहीं हुई है। इस सहायक प्राध्यापिका को कॉलेज प्रशासन ने इसी कार्य के लिए रखा है। 2012 में बैठक हुई थी, उस समय यह सहायक प्राध्यापिका अयोग्य पाई गईं थी। इसके बाद उन्हें निकाल दिया गया था। जैसे ही प्रशासन हटा, उसके बाद कॉलेज प्रशासन इसे तुरंत रख लिया। एडहॉक प्रोफेसर की 9 हजार वेतन देती है, पर इन्हें 14 हजार दिया जा रहा है। मेरे पास भी बहुत सारे एविडेंस हैं, उसे लेकर कोर्ट जाऊंगा। मुझे षडयंत्र पूर्वक फंसाया गया है, क्योंकि 2016 में प्रोफेसरों के वेतन में कटौती की गई। सीनियारिटी भी कम कर दिया गया था। इसके बाद 7 प्रोफेसर कोर्ट गए हैं। इसमें मैं लीड कर रहा था और चंद्रा मेरा साथ दे रहे थे। कॉलेज प्रबंधन ने कोर्ट में फर्जी डॉक्यूमेंट दिए थे।"