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6 साल पहले शुरू किया था बेसबॉल खेलना, 17 की उम्र में बन गई इंटरनेशनल प्लेयर

इस इंटरनेशनल खिलाड़ी का लक्ष्य है बेसबॉल में देश के लिए खेलना।

Danik Bhaskar | Feb 07, 2018, 09:02 AM IST
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अंजलि ख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अंजलि ख

बिलासपुर. यहां की अंजलि खलखो बेसबॉल मेें विश्व स्तर पर चमक बिखेर रखी है। वह उसमें और चमक लगाने के लिए 2020 टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों में जुटी है। उसकी यह खूबी तब पता चली जब उसे छत्तीसगढ़ स्कूल मैदान में अभ्यास करते देखा। इस इंटरनेशनल खिलाड़ी का लक्ष्य है बेसबॉल में देश के लिए खेलना। इस लक्ष्य को पाने के लिए वह प्रतिदिन 6 घंटे बेसबॉल की बारीकियां सीख रही है। 17 साल की अंजलि ने दैनिक भास्कर को विशेष बातचीत में बताया िक उन्होंने 6 साल पहले बेसबॉल की दुनिया में कदम रखा। इससे पहले वे हॉकी में हाथ आजमा चुकी हैं।


स्पोर्ट्स टीचर के कहने पर बेसबॉल खेलना शुरू किया
मेरा जन्म बलरामपुर के कुसमी ब्लॉक में हुआ। अच्छी पढ़ाई कर सकूं, इसलिए मेरे पापा मुझे बिलासपुर ले आए। बर्जेस स्कूल में मेरा एडमिशन कराया। जहां मुझे स्पोर्ट्स टीचर हेमलता मैडम मिलीं। जिनके कहने पर मैंने बेसबॉल खेलना शुरू किया। पास के ही छत्तीसगढ़ स्कूल मैदान में बेसबॉल के गुर सीखने जाने लगी। 2012 में पुलिस ग्राउंड में बेसबॉल बालक वर्ग का एशिया कप कैंप चल रहा था। उस कैंप में बिलासपुर के दो खिलाड़ी अंकुर रजक और शिशिर निषाद शामिल थे। जिनके बारे में अंजलि के कोच ने बताया। जिसे सुन और देखकर उनके मन में आया कि मैं भी बेसबॉल में देश के लिए खेलूंगी। वहीं से उन्होंने जी तोड़ मेहनत और स्टेट लेवल पर ट्रायल देना शुरू कर दिया।

कई अवार्ड मिल चुके हैं

वर्ष 2013 में नेशनल खेल के लिए प्रदेश की टीम में अंजलि को चुना गया। ओपन सब जूनियर चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता। साल 2014 में भुनवेश्वर में हुई सब जूनियर चैम्पियशिप में अंजलि ने स्वर्ण पदक जीता। साथ ही उन्हें बेस्ट पिचर और बेस्ट प्लेयर के अवार्ड से नवाजा गया था। 2015 रांची में हुए अंडर-14 स्कूल गेम्स में रजत पदक जीता। इसी वर्ष धमतरी में अंडर-17 नेशनल गेम्स में भी वह टीम का हिस्सा थीं। वहां उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

विश्व कप टीम में अंजलि शामिल थीं

जून 2016 बेंगलुरु में हुए पहले विश्वकप कैंप के लिए अंजलि सहित प्रदेश की तीन बेटियां पायल, एकता जंघेल और नेहा जयसवाल को चुना गया था। विश्व कप का दूसरा कैंप चंडीगढ़ में हुआ। इसमें छत्तीसगढ़ से इकलौती अंजलि को शामिल किया गया। कैंप में शानदार प्रदर्शन कर देश की विश्व कप टीम में जगह बनाई। 2016 साउथ कोरिया में हुए वुमेन विश्वकप में प्रदेश की इकलौती को अंजलि देश के लिए खेलने का मौका मिला।

8 मेेें सात मैंचों में मिली प्लेइंग
पहली बार इंटरनेशनल खेलने उतरी अंजिल ने बताया कि आठ में सात मैचों में मुझे प्लेइंग मिली। पहला मैच नीदरलैंड से हुआ। मैच ड्रा रहा। दूसरे मैच में कनाडा से हार का सामना करना पड़ा। हांगकांग से तीसरा मैच हारे। चौथे मैच में भारत को यूएसए से हार मिली। आस्ट्रालिया ने भी देश की टीम को हराया। एकमात्र मैच पड़ोसी देश पाकिस्तान से भारत ने मैच जीता। अंतिम मैच कुबा की टीम से था। उसमें भी देश को हारना पड़ा। विश्व कप में देश की टीम को आठवां स्थान मिला। अंतिम बार प्रदेश की टीम से उन्होंने अंडर-19 स्कूल नेशनल चंडीगढ़ में खेला। जहां टीम को कांस्य पदक मिला।

शुरू से ही खेल के प्रति ईमानदार थी अंजलि

कोच अख्तर खान ने बताया कि जब अंजलि मेरे पास कोचिंग के लिए आई तब उसकी उम्र 10 साल थी। वह खेल के प्रति शुरू से ही सिंसियर थी। बड़े-छोटे सभी टूर्नामेंट में वह टीम को जिताने के लिये खुद के दम पर मैच खेलती है। इस समय वह 8 फरवरी को होने वाली सीनियर ओपन चैम्पियनशिप के लिए मैदान में जी तोड़ मेहनत कर रही है।

कोच ही हैं आदर्श खिलाड़ी
पुलिस लाइन निवासी एसआई रिजू खलखो की पुत्री अंजलि ने बताया कि उनके कोच ही उनके आदर्श खिलाड़ी हैं। इंटरनेशनल तक खेलने का श्रेय मेरे माता-पिता मेरे कोच और छत्तीसगढ़ बेसबॉल संघ की महासचिव मिताली मैडम को जाता है। उन्हीं के सहयोग से मैं देश के लिए पहली बार खेली। मुझे खेल मेंे बचपन से ही रुचि थी। मेरे पापा और मम्मी हमेशा से मेरी सुरक्षा को लेकर परेशान रहते हैं। अगला लक्ष्य क्या है इस सवाल पर अंजलि ने हंसकर कहा, बेसबॉल में देश के लिए खेलकर नाम कमाना है।