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पड़ोसियों ने घोला शक का जहर, पति पत्नी की हत्या कर 2 दिन गांव में घूमता रहा

लोगों को इस हत्या के बारे में पता था लेकिन पुलिस तक कोई नहीं पहुंचा।

Dainik Bhaskar

Dec 21, 2017, 02:20 AM IST
पूरी वारदात एक फोटो में: दाएं क पूरी वारदात एक फोटो में: दाएं क

बिलासपुर. 18 दिसंबर को हुई महिला की हत्या के बारे में नया खुलासा हुआ है। दरअसल शख्स अपनी पत्नी की हत्या 2 दिन पहले ही कर चुका था और इस बात की जानकारी उसके घरवाले और मोहल्ले के लोगों को भी थी, लेकिन किसी ने पुलिस को नहीं बताया। हत्या के बाद वह खुद को पुलिस से बचाने के लिए सबसे मदद मांगता रहा। फंसने के डर से किसी ने उसका साथ नहीं दिया तो आखिरकार उसने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

- रूपदास मानिकपुरी (45) ने 18 दिसंबर को ही अपनी पत्नी गुलाबा बाई (40) की हत्या कर दी थी। उस रात प्लांट से अचानक काम छोड़कर घर पहुंचा तो पत्नी से विवाद हुआ फिर वह लाठी लेकर आया और उसके सिर पर वार कर दिया।

- इस दौरान दोनों के बीच में संघर्ष हुआ। मौके पर महिला की टूटी हुई चूड़ियां मिलीं। हत्या करने के बाद वह अपने तीन चार साथियों के पास गया और घटना की जानकारी दी।

उसने इन लोगों से पुलिस से बचने के लिए मदद मांगी। सभी ने मना कर दिया। इतना ही नहीं रूपदास ने जिससे भी हत्या की बात की थी वह मोहल्ला छोड़कर भाग निकले। उन्हें मामले में फंसने का डर सता रहा था। दैनिक भास्कर ने इस बात की पड़ताल की तो यह सही निकली।


बता दें, सिरगिट्टी के रूपदास मानिकपुरी ने अपनी पत्नी गुलाबा बाईकी डंडे से वार कर हत्या कर दी और खुद भी फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना के समय घर पर कोई माैजूद नहीं था।

रूपदास की छोटी बेटी रीना अपने मामा के घर शांतिनगर गई हुई थी और पिता घांसीदास अपने भाई के घर लोको काॅलोनी में था। पति-पत्नी ही केवल घर पर मौजूद थे।

रूपदास के पिता घांसीदास का कहना है कि जब वह बुधवार की सुबह घर पहुंचा तो रूपदास के मकान का दरवाजा भीतर से बंद था। वह काफी देर तक खटखटाया पर कोई जवाब नहीं आया। इसकी जानकारी उसने फोन पर रूपदास की दोनों बेटियाें और बेटे के अलावा पड़ोसियों को बताया।

पड़ोसियों ने शक का जहर घोला था, उजड़ गया परिवार

- भास्कर ने इस घटना के पीछे के कारणों का पड़ताल की तो घटना के पीछे रूपदास के उन पड़ोसियों की भूमिका नजर आई जो आए दिन रूपदास से उसकी पत्नी गुलाबा बाई की चरित्र को लेकर शिकायत करते थे।

- गुलाबा बाई महिला समूह की सदस्य थी। उसने शराबबंदी के लिए महिलाओं के साथ मिलकर काम किया था। मोहल्ले के गरीब लोगों को बैंक से लोन दिलवाने के साथ अन्य तरह से उनकी मदद करती थी और काफी लोगों से मिलना जुलना था।

- एवज में गुलाबा बाई को उनसे कुछ रुपए पैसे मिल जाते थे और इन पैसों का उपयोग घर बनवाने में कर रही थी। पड़ोसियों को उसकी तरक्की से जलन थी।

- गुलाबा बाई की बड़ी बेटी अनिता दास के मुताबिक, पड़ोसी अक्सर उसके पिता के मन में मां के चरित्र के बारे में उल्टा सीधा बात करके दोनों के बीच जहर घोलने का काम कर रहे थे। मना करने पर उन्होंने अनिता से मारपीट भी की थी और इसकी शिकायत जब थाने में की तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।

- 18 दिसंबर को को रूपदास अचानक काम से जल्दी घर लौट आया। रात 2 बजे तक वह ड्यूटी पर रहता था पर उस दिन 11-12 बजे ही आ गया। गुलाबा बाई ने उसे जल्दी आने का कारण पूछा तो रूपदास भड़क गया। गाली गलौज करने लगा। उनके बीच झगड़ा हुआ।

- महिला ने परेशान होकर सामाजिक बैठक बुलाने का फैसला किया। इसको लेकर दो दिन बाद मीटिंग होनी थी। रूपदास दो दिनों तक काम पर नहीं गया। उनके बीच बातचीत बंद थी। घटना के बाद गुलाबा बाई व उसका परिवार तबाह हो गया। बूढ़े-ससुर को वह खाना बनाकर देती थी। बेटी की अगले साल शादी करने वाली थी। खुद के रहने के लिए उसने घर बनवाया था।

पुलिस के पास भी पहुंच चुकी थी खबर, फिर भी इंतजार करती रही

गुलाबा बाई की हत्या की खबर काफी लोगों को पता चल चुकी थी इसमें पार्षद भी शामिल था। पुलिस को भी घटना की जानकारी मिल गई थी वह नहीं पहुंची। सूचना पर पुलिस आकर मकान में घुसी होता तो शायद रूपदास खुदकुशी नहीं कर पाता।

नींबू-मिर्ची के रूप में लटका मिला अंधविश्वास

गुलाबा बाई की बेटी रीना ने बताया कि जिस दिन झगड़ा शुरू हुआ वह घर पर ही थी और उसकी मां घर में शांति बनी रहने के लिए दरवाजे पर नींबू मिर्च बांधकर टोटका किया था। लेकिन यह अंधविश्वास भी काम नहीं आया। जिस दरवाजे पर यह बंधा हुआ था उसके एक ओर के कमरे में गुलाबा बाई की हत्या हो गई और दूसरे कमरे में उसके पति ने खुदकुशी कर ली।

पुष्टि का यह है आधार

- महिला के सिर से निकला खून जमीन पर जमकर पपड़ी बन चुका था। रात की हत्या होती तो खून ही सूखता।

- गुलाबा बाई की लाश से दुर्गंध उठने लगी थी जबकि रूपदास के शरीर से किसी तरह कोई बदबू नहीं आ रही थी।

- परिवार का मुखिया रूपदास का पिता घासीराम भी 19 दिसंबर की सुबह अचानक बेटे के घर से चला गया था।

- रूपदास ने यदि हत्या के बाद खुदकुशी की होती तो उसके शरीर पर खून लगा होता पर कहीं पर इसके निशान भी नहीं थे।

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