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मना करने पर भी हाथियों को देखने गया, हुआ एेसा कि लाश के टुकड़े समेटने पड़े

24 हाथी इलाके में है मौजूद, 3 और ग्रामीण साथ में वे चिंघाड़ सुनकर भाग गए।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 20, 2017, 09:27 AM IST

मना करने पर भी हाथियों को देखने गया, हुआ एेसा कि लाश के टुकड़े समेटने पड़े

बिलासपुर.रामानुजगंज रोड एक ग्रामीण पर दंतैल हाथी ने हमला कर उसे मार डाला। घटना सोमवार देर रात की है। 24 हाथियों का दल जब इलाके में पहंुचा तो उक्त ग्रामीण अपने घर से टार्च लेकर उन्हें देखने के लिए निकला। उसके पुत्र सहित घर के लोगों ने उसे वहां नहीं जाने कहा लेकिन वह नहीं माना। उसके साथ दो-तीन और ग्रामीण थे। झुंड की चिंघाड़ सुन ग्रामीण के साथ रहे बाकी लोग तो भाग गए लेकिन वह नहीं लौटा। इस दौरान ग्रामीण व झुंड की दूरी करीब दो सौ मीटर रही होगी। इसी बीच दंतैल हाथी अचानक पहंुचा और ग्रामीण को पटक-पटक कर मार डाला। दंतैल ने उक्त ग्रामीण को पटक-पटक कर मार डाला। मारने के बाद उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उसके शव का क्षत-विक्षत कर दिया।

झुंड की सुरक्षा के लिए दंतैल इलाके में करता है निगरानी

जिस ग्रामीण की हमले मे जान गई वह दंतैल की चपेट में आया था। एलिफेंट विशेषज्ञों के मुताबिक दंतैल हाथी झुंड से कुछ दूर रहकर आसपास की निगरानी करता है। यह उसके स्वभाव में है। बीती रात भी दंतैल अपने झुंड से करीब दो सौ वर्ग मीटर इलाके में ही घूम रहा था। इस दायरे में आने के बाद ही उक्त ग्रामीण दंतैल की चपेट में आया। आक्रामक दंतैल के अचानक हमले के बाद ग्रामीण को जान बचाने का मौका ही नहीं मिला।

अलर्ट जारी लेकिन देखने के चक्कर में जा रही है जान

हाथियों के दल के राजपुर के चांची सर्किल में आने के बाद से ही वन विभाग प्रभावित गांवों में जाकर लोगों को उनसे बचने व दूर रहने के लिए अलर्ट कर रहा है। वन विभाग की टीम सोमवार रात भी माइक लेकर गांवों में लोगों को अलर्ट करने गई थी। इसके बाद यह हादसा हो गया। वन विभाग का कहना है कि लगातार समझाइश के बाद भी ग्रामीणांे की लापरवाही व जानबूझकर हाथियों के सामने जाने से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से पिछले हफ्ते राजपुर इलाके में पहंुचा हाथियों का दल

अंबिकापुर-रामानुजगंज रोड में चांची बैरियर से करीब एक किमी दूर मेन रोड में फूलसाय उरांव 55 वर्ष सोमवार रात घर में सो रहा था। रात करीब साढ़े दस बजे उसका पुत्र दिलजीत गांव में घूम कर लौटा। वह सोने की तैयारी कर रहा था, इसी बीच पिता सोते से उठा और उसके टार्च को लेकर घर से निकला। पूछने पर उसने बताया कि वह हाथियों को देखने जा रहा है। पुत्र सहित घर के लोगों ने उसे वहां जाने मना किया लेकिन वह नहीं माना। वह बस्ती के दो-तीन और ग्रामीणों को लेकर जिधर हाथियोंे का झुंड था उसी ओर निकला। हाथी वहां से करीब के जंगल में थे। सभी ग्रामीण खुले मैदान में खड़े थे। हाथियों की चिंघाड़ पास मे सुनाई देने पर ग्रामीण के साथ आए उसके साथी भागने लगे। उन्होंने उसे भी साथ चलने कहा लेकिन इसके बाद भी वह वहीं पर टार्च लेकर डटा रहा। अचानक दंतैल वहां पहंुचा जिससे ग्रामीण को भागने का मौका ही नहीं मिला।

रोड क्रास होने के कुछ देर बाद ग्रामीण आया चपेट में

रेंजर अनिल सिंह ने बताया कि रात में विभागीय अमला व पुलिस टीम मौजूद थी। 10 बजे हाथी चांची बैरियर के पूर्व दिशा की ओर से आए और सड़क क्रास कर पश्चिम की ओर जंगल में बढ़ने लगे। रोड क्रास करने के दौरान आधे घंटे तक अंबिकापुर-रामानुजगंज रोड को ब्लॉक रखा गया था। वन अधिकारी यह सोचकर राहत महसूस कर रहे थे कि हाथी बिना किसी को नुकसान पहंुचाए जंगल में चले गए हैं, इधर बैरियर के पास रहने वाला ग्रामीण उन्हें देखने के चक्कर में जान गवां बैठा।

नया मेहमान आने के बाद दल हुआ ज्यादा आक्रामक
प्रतापपुर की ओर से नरसिंहपुर, दुप्पी चौरा होते हुए राजपुर के चांची सर्किल में आए 23 हाथियों के दल में एक हथिनी ने दो दिन पहले एक बच्चे को जन्म दिया है। इससे दल की संख्या 24 हो गई है। बच्चे के जन्म के बाद दल के बाकी सदस्य काफी संवेदनशील व आक्रामक हो गए हैं। बच्चे के कारण ही दल धीरे-धीरे मूवमेंट कर रहा है। फिलहाल हाथी जिस इलाके में हैं उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे प्रतापपुर की ओर वापस लौट जाएं।

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Web Title: mnaa karne par bhi haathiyon ko dekhne gaya, hua eesaa ki laash ke tukड़e smetne pड़e
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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