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फसल बीमा कंपनी ने पिछले साल बगैर समिति को जानकारी दिए बांट दिए थे क्लेम

Bilaspur News - प्रशासनिक रिपोर्टर | बिलासपुर फसल बीमा करने वाली कंपनी ने पिछले साल समिति को जानकारी दिए बिना ही किसानों को...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:15 AM IST
फसल बीमा कंपनी ने पिछले साल बगैर समिति को जानकारी दिए बांट दिए थे क्लेम
प्रशासनिक रिपोर्टर | बिलासपुर

फसल बीमा करने वाली कंपनी ने पिछले साल समिति को जानकारी दिए बिना ही किसानों को क्लेम का भुगतान कर दिया। बाद में कम क्लेम मिलने की शिकायत कृषि विभाग से की गई। यही कारण है कि इस बार कृषि विभाग ने पहले ही आंकलन रिपोर्ट तैयार कर उसे बीमा कंपनी के मूल्यांकन रिपोर्ट से मिलान करने का निर्णय लिया है।

बीते खरीफ सीजन में जिले के 62 हजार 550 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया। 6 करोड़ 63 लाख 76 हजार 331 रुपए प्रीमियम इफको टोकियो कंपनी को दिया। कम बारिश की वजह से जिले के अधिकांश इलाकों में सूखे का अंदेशा जताया गया। तब जिला प्रशासन ने नजरी आनावारी के आधार पर जिले को सूखा घोषित किया। फसल कटाई प्रयोग और आनावारी से सूखे की पुष्टि हो गई। पता चला कि जिले में 45 पैसा आनावारी है। इनमें 267 गांवों में आनावारी 37 पैसे से कम तो 275 गांवों में 0.38 पैसे से 0.50 पैसे के बीच रही। इस तरह प्रभावित गांवों की संख्या 542 रही। मुंगेली जिले के 184 गांव भी सूखे की वजह से सर्वाधिक प्रभावित रहे। बिलासपुर जिले के 84,803 किसान सूखे की चपेट में आए और 60,908 हेक्टेयर में लगी धान की फसल को क्षति पहुंची। किसानों को 47.85 करोड़ रुपए मुआवजा देना तय किया गया। अधिकांश किसानों को मुआवजा मिल चुका है लेकिन बीमा कंपनी अब तक क्लेम की रकम तय नहीं कर पाई है। इस कारण कृषि विभाग को लोक सुराज के शिविरों के दौरान मिले सैकड़ों आवेदन पेंडिंग हैं। कृषि विभाग के उप संचालक आरजी अहिरवार ने बताया कि जिला स्तर पर प्रधानमंत्री बीमा योजना की एक कमेटी है। अपर कलेक्टर केडी कुंजाम उसके पदेन अध्यक्ष है जबकि वे सचिव हैं। लेकिन पिछले साल कंपनी ने कमेटी को रिपोर्ट दिए बगैर ही किसानों का क्लेम निर्धारित कर उनके बैंक खाता में जमा करवा दिए गए। इस बार भी अब तक रिपोर्ट नहीं मिली है। इस बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। बीमा कंपनी से मूल्यांकन रिपोर्ट लेने का प्रयास किया जा रहा है। इधर, बीमा कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम मिश्रा के मुताबिक कंपनी के बड़े अधिकारियों के निर्देश पर वे काम करते हैं। इसलिए वे इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।

7.66 करोड़ लिए, क्लेम दिया 6.72 करोड़

पिछले साल किसानों से अक्टूबर-नवंबर में प्रीमियम रकम ली गई और हर्जाना मई-जून में दिया गया। 54 हजार 293 ऋणी तो 16 हजार 842 अऋणी सहित कुल 71 हजार 135 का बीमा किया गया। 1 लाख, 9 हजार 734 हेक्टेयर का बीमा हुआ। किसानों से 7.66 करोड़ रुपए लेकर उन्हें क्लेम के तौर पर 6.72 करोड़ रुपए लौटाए गए।

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