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‘अंगरेजी के भूत ह हमन ला कतिबर ले जाही’ नइ हे ठिकाना

संगवारी हो! जेन समय छत्तीसगढ़ राज्य बनिस। अऊ लगातार छत्तीसगढ़ राज बनाये बर जगह-जगह, दिल्ली तक गिरफ्तारी दे के अपन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:20 AM IST

‘अंगरेजी के भूत ह हमन ला कतिबर ले जाही’ नइ हे ठिकाना
संगवारी हो! जेन समय छत्तीसगढ़ राज्य बनिस। अऊ लगातार छत्तीसगढ़ राज बनाये बर जगह-जगह, दिल्ली तक गिरफ्तारी दे के अपन गुहार ल सरकार के आघू म संघर्स करत रहेन, वो समय मन के अंतस ले एक ठन हुंकार घेरी-बेरी आवय, अऊ वो पीरा ह करेजा म समा के जम गे रहय। के छत्तीसगढ़ राज बनही त हमन अजाद हो के जइसे बंगाली मन बंगला भासा, गुजराती मन गुजराती भासा पंजीबी मन पंजाबी भासा, मराठी मन मराठी भासा अऊ जम्मे राज के मनखे जन अपन-अपन भासा म बोल के अपन राज के चिन्हारी बने हे, ओही ढंग म अनुमान छत्तीसगढ़ी भासा म गोठिया के अपन राज के चिन्हारी बनबो। अऊ अइसे ठान के रखे रहन के सरकारी विभाग हावय, ओमा जम्मे बुता लिखा-पढ़ी सरकारी काम-काज रिति-निति के जानकारी बताय बर ऊहां बैइठे अधिकारी मन हमरे बोली भासा म गोठियाही अऊ जम्मे सरकारी योजना ल हमरे भासा म लिख-पढ़ बताही।

हमर मेहनत बुता ह कई बछर म रंग लाइस ओ 1 नम्वबर 2000 के छत्तीसगढ़ नवा राज के सुरूज ह ऊगिस। पहली मुख्यमंत्री हमर राज के मुखिया बनके बागडोर ल अपन हाथ म लेहिस। सब्बे छत्तीसगढ़िया मन नवा राज के तिहार, अऊ राज ल सुघ्घर बनाये के सपना ल देखे लगेन। हमर सपना के सौदागर बनके हमर संग म आदिवासी बाहुल्य छेत्र म जन्मे, इंहा के जून्ना परम्पर, संस्किरिति म रचे-बसे, खेले-खाय पनपे-बाढ़े हमन ल विस्वास होगे, के जेइसे हमन सपना देखे रहेन ओइसने हकीकत मन येकर सांचा ह बनही। अऊ अढ़ाई बछर पुरिसत ओ सांचा के रूप ह नजर आये लगिस। अनुकुल के जगह म प्रतिकूल देखाये लागिस। लगातार फरमान हो लागिस, लइका मन ल पहली कक्छा ले अंगरेजी भासा म पढ़ाना जरूरी हे। जम्मे स्कूल म पढ़ाई कराना हे अंगरेजी म। हमन ला अंगरेजी ल परहेज नइहे नइहे, फेर हमन अपन लइका के आदत-व्यवहार ल अब्बड़ गहराई म डूब के सोचे ल परही। धरम जम्मे परिवार छत्तीसगढ़ी म बोलथन, बाहिर म जाथन ल हिन्दी म बोलथन, स्कूल म अंग्रेजी काश!

अब सवाल उठत हे, के जऊन रफ्तार म अंगरेजी स्कूल के विस्तार फैलाव बाढ़़त हवय, ओही रफ्तार कुछ अंस परतिसत संस्किरिति माध्यम के पाठसाला खुल जातिस त हमर छत्तीसगढ़ राज ह संस्कृति राज बन जातिस। ये समे जऊन छत्तीसगढ़िया मन के संग होवत हे, कुछ घटना ल बताये के 3 दिन कर थव। जेकर से हमन सबक सीख सकत हन। मय हर सिनेमा देखे एक सिनेमा हाल गयेव, ऊहा मोर आघू के कुरसी म एक परिवार बैइठे रहिस, उखर संग म दुझन लइका सात-आठ बछर के लइका घलऊ रहिन, मध्यान्तर म संग कुछ घर ले बने नास्ता खाई-खनेजा रखे रहिन। अऊ आपस म अंगरेजी भासा म गोठियात रहय, मन सुनत-गुनत रहेव, छत्तीसगढ़िया मन घलऊ अंगरेज होथे, अऊ वाे समय अचम्भित हो गयव, जेन समे, खाई-खनेजा म खुरमी-ठेठरी ल देखेव, अऊ अंगरेजी म गोठियात रहय, प्लीज माई सन, नो माॅम मां आई जन्ट लाइक दीस, खुरमी। ये घटना ह मोला मजबूर विवस कर देहिस के हमर अतका सुघ्घर गुरतूर बोली-भासा छत्तीसगढ़ी म अंग्रेजी के भूत सवार हो गय हे। एखर परिनाम हमर आने वाला समय के लइका पीढ़ी के दुरदसा के रद्दा म आघू बढ़त हावय। काय? हमन सत्तर बछर म अंगरेजी के वकालते करत रहिबो येखर जगह म थोड़कन हिस्सा संस्कृत भासा के प्रसार-प्रचार म अपन भागीदारी निभाई त सायद हमर अाने वाला पीढ़ी दुरगति ल बाच जाही।

इतिहास गवाह हावय-स्वामी विवेकानंद जी अंगरेज मन ल कई बार कहिस के संस्कृत-स्कूल, कॉलेज खोले पर जमीन देहे के मांग करिस, फेर अंगरेज मन जमीन भूमि देहे बर इन्कार कर देहिस अऊ अाजाें ले ओही अंगरेज के बनाये नक्सा म चलत हावन। अऊ अपने हाथ म अपने पीठ ल थप थपावत हन।

हमर मेहनत बुता ह कई बछर म रंग लाइस अउ 1 नवंबर 2000 के छत्तीसगढ़ नवा राज के सुरूज ह ऊगिस

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