बिलासपुर

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हमर समाज मा मित्यु भोज के हवय परंपरा

हमर पूरा छत्तीसगढ़ समाज मा मित्यु भोज ला बन्द कर देना चाही। जे परिवार मा विपदा आए हे ओकर संग ए संकट के घड़ी म जरूर तन मन...

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:20 AM IST
हमर पूरा छत्तीसगढ़ समाज मा मित्यु भोज ला बन्द कर देना चाही। जे परिवार मा विपदा आए हे ओकर संग ए संकट के घड़ी म जरूर तन मन धन ले सहयोग करा, लेकिन मित्यु भोज के बहिष्कार करा। जब खाना खवाने वाला के मन परसन्न हो, आउ खाने वाला के भी मन परसन्न हो तभेच भोजन करना चाही। ना कि खिलाने वाला के मन म वेदना हे अाउ व्यथित हे तब तो कदापि भोजन नई करना चाही। महाभारत के अनुसासन परव म लिखे हावय कि मित्यु भोज खाने वाला के उरजा नस्ट होथे। लेकिन जेहर जीवन पर्यत मित्यु भोज खाए हे अोकर भगवान मालिक हे। एकरे खातिर महरसि दयानंद सरस्वती, पं. श्रीराम शर्मा, स्वामी विवेकानंद जइसे महान मनीसि मन मित्यु भोज के जोरदार ढंग ले विरोध करे हे। जे भोजन ला बनाए के हर काम आंसु ले भीगे हो अइसे निकृस्ट भोजन के पूरन रूप से बहिष्कार होना चाहिए। अाउ समाज ला एक नया दिसा देना। बड़ही, मित्यु भोज पीड़ा देने वाला एक सामाजिक कुरीति हे। मानव विकास के रास्ता ले ए गंदगी साफ करे बर पड़ही।

पिछले बहुत दिन ले साेसल मीडिया के मंच म मित्यु भोज के ऊपर सारथक बहस छिड़े हे जहां समाज के सबे वर्ग के मन एकर खिलाफ हे सब एकर विरोध म खड़े नजर आथें। लेकिन समाज म ए कुरीति के खिलाफ अतका रोस हे तभो ले ए परम्परा काबर बंद नहीं हाेवत हे? एकर कारण हे हमन स्वयं। जब तक हमन स्वयं एकर खिलाफ खड़े नइ होबो तब तक एहर बंद नई होवय। हमर प्रियजन, परिवार जन के वियोग के घड़ी म तिहार बराबर भोजन करके ओकर मौत के मजाक उड़ाथन। हमन अपन स्वजन के मृत्यु म पकवान खाना कब छाेड़े सकबो? ए बारे म गम्भीरता ले विचार करें के आवस्यकता हावय। अनावश्यक पुराना परम्परा ल पकड़के पिछड़ापन के सबूत काबर पेश करबो। ए असोमनीय आउ अनुचित परम्परा मित्यु भोज के बहिस्कार करना चाहिए।

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