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पीडब्ल्यूडी में करोड़ों का घोटाला, पांच बड़े मामलों की फाइल दबाने का खेल, सीई बोले- छुट्‌टी पर हूं

पीडब्ल्यूडी बिलासपुर सर्किल में घोटालों को दबाने का खेल चल रहा है। बड़े अफसर सबकुछ जानकार कार्रवाई की बजाय मामलों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:20 AM IST

पीडब्ल्यूडी बिलासपुर सर्किल में घोटालों को दबाने का खेल चल रहा है। बड़े अफसर सबकुछ जानकार कार्रवाई की बजाय मामलों को नजरअंदाज कर रहे हैं। यही वजह है कि घोटाले में फंसे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। आरोप है कि इन्हें बकायदा प्रमोशन और इंक्रीमेंट मिल रहा है। गड़बड़ी करने वाले ठेकेदारों को नए टेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके चलते मामले में उन अधिकारियों की भूमिका संदेह के दायरे में है, जिन्हें सरकार ने इसकी जांच और कार्रवाई करने की जिम्मेदारी साौंपी है।

अब तक इन पांच मामलों में बड़े घोटालों की जांच पूरी नहीं हुई है और न ही कोई कार्रवाई की गई है। इनमें रायल्टी चोरी, स्टेडियम और सड़क के नाम पर गड़बड़ी का खेल, अफसरों की मिलीभगत से सरकारी पैसों की हेराफेरी सहित कई मामले शामिल हैं। हैरानी यह कि पीडब्ल्यूडी बिलासपुर सर्किल में चीफ इंजीनियर समेत अन्य इन मामलों में बात करने तक को तैयार नहीं है। जो बात करते हैं उनका भी रटा-रटाया जवाब कि अभी तो हमने नोटिस दिया है। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से जवाब नहीं आया है। जवाब आने पर उनकी समीक्षा की जाएगी और उसके बाद फैसला लिया जाएगा। इन सभी मामलों में सर्किल के सीई एके मंधान ने तब कहा था कि वे पूर्व में चल रही जांच में गंभीरता दिखाएंगे और कार्रवाई भी करेंगे लेकिन उनके यहां आने के छह माह से अधिक का समय होने के बाद भी सब यथावत है।

रायल्टी चोरी, छत्तीस टेंडर घोटाले, बहतराई स्टेडियम के नाम पर मनमर्जी पैसे खर्च करने सहित कई मामले, अफसर निभा रहे औपचारिकता, किसी पर कार्रवाई नहीं

आरोपी अफसरों को मिल रहा इंक्रीमेंट और प्रमोशन का लाभ

पौने दो करोड़ की चोरी में सिर्फ जांच

रायल्टी चोरी मामले में पौने दो करोड़ की रायल्टी चोरी कर सरकार को नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में विभाग के अफसरों ने सिर्फ एक बाबू को निलंबन कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं की। कार्रवाई के सवाल पर हर बार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।

केस-1

जांच में लेट लतीफी के ये कारण

हर मामले में गड़बड़ी के खुलासे के बाद अफसराें ने गंभीरता नहीं दिखाई।

सरकार को नुकसान होता रहा और अफसर जांच की जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालते गए।

संज्ञान नहीं लेने का असर यह हुआ कि जांच अधिकारी भी ढीले पड़ चुके हैं।

एक भी कार्रवाई नहीं होने से दागी अफसर लगातार काम करते रहे। उन्हें कई तरह का लाभ मिलता गया।

करोड़ों की गड़बडिय़ां सामने आने के बाद भी विभागीय मंत्री ने कोई संज्ञान नहीं लिया।

सीई के बयान के चलते अटकी जांच :विभागीय चल रहे अन्य मामलों के अलावा हाईकोर्ट के आॅडिटोरियम की छत गिरने की न्यायिक जांच भी वर्ष 2016 से चल रही है लेकिन यह न्यायिक जांच जिला प्रशासन मे अपर कलेक्टर कर रहे हैं। इसकी जांच भी पूर्व सीई के बयान पर अटकी हुई है। यह बयान सीई वीके भतपहरी के यहां पदस्थ रहते नहीं हो पाया और अब वे अंबिकापुर में सीई हैं।

ईएनसी ने कहा क्या करें जानकारी नहीं भेजते अफसर

छत्तीस टेंडर घोटाले की फाइल दबाई

पिछले विधानसभा चुनाव के पूर्व छत्तीस टेंडर का घोटाला हुआ था। पूर्व कार्यपालन अभियंता आरके खांबरा ने टेंडर रिलीज कराए थे। वीरेंद्र सिंह टेंडर लगवाए थे। भुगतान आरके खांबरा ने कराया था। यह मामला अभी भी चल रहा है। जांच की फाइल दबा दी गई । जांच अधिकारी पूर्व सीई वीके भतपहरी थे।

केस-2

रायल्टी चोरी , बहतराई स्टेडियम समेत अन्य मामलों पर आप जो पूछ रहे हैं उसकी जानकारी मुझे नहीं है। इन मामलो की जांच कहां तक पहुंची यह भी मुझे नहीं मालूम है। यह तो जांच अधिकारी और सीई ही बता सकते हैं कि संबंधित मामलों की जांच कहां तक पहुंची है। हम क्या करें जांच अधिकारी व सीई मामलों की जानकारी नहीं भेजते हैं। - डीके प्रधान, ईएनसी, पीडब्ल्यूडी

एफडीआर जब्त, पर कोई कार्रवाई नहीं

कुछ समय पहले सीपत बलौदा मार्ग पर बनी सड़क में जीएसबी में चार इंच की मात्रा कम मिली थी। अफसरों ने जांच की और ठेकेदार द्वारा कम फिलिंग करना पाया गया। वर्तमान में डिवीजन वन के ईई मधेश्वर प्रसाद ने ठेकेदार की एफडीआर भी जब्त कर ली थी। जिसकी शिकायत ठेकेदार ने सीई से की थी। मामला यथावत है।

केस-3

आरोपियों को मिल रहा ये फायदा

अब तक एक से अधिक आरोप में ईई आरके खांबरा का नाम सामने आ चुका है। कार्रवाई नहीं होने के कारण वे अभी भी काम कर रहे हैं।

कई अफसरों को प्रमोशन, इंक्रीमेंट और सरकार से मिलने भत्तों का लाभ अफसरों को मिल रहा है।

कार्रवाई नहीं होने के पीछे उच्चाधिकारियों पर लेनदेन और मिलीभगत का आरोप लगा। ऐसा कई मामलों में देखा गया कि कोई बोलने को तैयार नहीं।

ठेकेदारों को ब्लेक लिस्ट करने की बजाय लगातार ठेके देते मिलते गए और अभी भी मिल रहे हैं।

सड़क निर्माण में घपला, जांच जारी

मुंगेली-पथरिया मार्ग पर टू-लेन रोड का निर्माण कुछ ही समय पहले किया गया था। जीएसबी मटेरियल में गड़बड़ी हुई थी। ठेकेदार ने मिक्स जीएसबी मिलाकर सड़क में डाली। इसकी जांच पूर्व सीई वीके भतपहरी ने की थी और पूरा मटेरियल उखड़वाया था। इस मामले का भी कुछ नहीं हुआ है।

केस-4

2.81 करोड़ की राशि खर्च, सिर्फ नोटिस

बहतराई स्टेडियम मामले में 2.81 लाख की राशि पूर्व के दो ईई और डीए ने मिलीभगत कर खर्च की। इस मामले में सीई और एसी का कहना है कि हमने उन्हें नाेटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अफसरों का कहना है कि हमने लिखकर दे दिया है। अफसर इसके आगे बताने को कुछ तैयार नहीं। ऐसे में बड़ी गड़बड़ी कासंदेह है।

केस-5

सीधी बात

एक हफ्ते बाद ड्यूटी पर लौटूंगा तब मिलेगी जानकारी

एके मंधान, चीफ इंजीनियर, बिलासपुर सर्किल

पूर्व में जिन मामलों की जांच चल रही है उनका क्या हुआ?

- आप किन मामलों की बात कर रहे हैं।

रायल्टी चोरी, सीपत बलौदा, छत्तीस टेंडर आदि।

- आपको तो मालूम होगा उन मामलों का।

हमें नहीं मालूम, आपसे ही जब पूछते हैं तो जवाब मिलता है जांच चल रही है?

- मैं अभी अवकाश पर हूं। ड्यूटी में लौटने पर आप जो मामले पूछेंगे उसकी जानकारी मिल जाएगी।

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Web Title: पीडब्ल्यूडी में करोड़ों का घोटाला, पांच बड़े मामलों की फाइल दबाने का खेल, सीई बोले- छुट्‌टी पर हूं
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