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प्रदूषण रोकने उज्जवला गैस, जलाऊ लकड़ी पर लाखों खर्च

खाद्य विभाग और वन विभाग की दो ऐसी योजनाएं है जो एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी दिखाई दे रही है। हरियाली प्रसार योजना के तहत 52.50...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 02:20 AM IST

खाद्य विभाग और वन विभाग की दो ऐसी योजनाएं है जो एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी दिखाई दे रही है। हरियाली प्रसार योजना के तहत 52.50 लाख तो प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में 35 करोड़ 59 लाख, 92 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। इनमें से आधी रकम राज्य सरकार ने अनुदान के तौर पर दी है। करोड़ों खर्च होने के बाद अधिकारी न तो पौधे कहां है? ये बता पा रहे हैं और न ये कि 75 फीसदी लोग दोबारा सिलेंडर भराने क्यों नहीं आ रहे हैं?

एक तरफ लोग लकड़ी से खाना न पकाए इसलिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत करोड़ों खर्च कर गैस कनेक्शन दिया जा रहा है और वहीं दूसरी तरफ किसान जलाऊ लकड़ियों के लिए जंगल न काटे इसलिए वन विभाग हरियाली प्रसार योजना चला रहा है। इसके तहत किसानों को पौधे देकर पौधरोपण कराया जा रहा है। बीते दो वर्षों में जिले में वनमंडलाधिकारी कार्यालय ने 6 लाख पौधे लगाए गए हैं। इसमें जुलाई 2016 में नीलगिरी क्लोनल के दो लाख तो साधारण किस्म के 50 हजार सहित ढाई लाख पौधे लगाए गए। जबकि जुलाई 2017 में नीलगिरी क्लोनल के 2 लाख, कंजुरिना के एक लाख तो 50 हजार साधारण पौधे लगाए गए। इधर जिले में 1 लाख 27 हजार 140 परिवारों को उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिया गया है। इसमें से 54 हजार कनेक्शन इसी साल दिया गया है। 35.60 करोड़ रुपए में से 17.80 करोड़ रुपए राज्य शासन के खर्च हुए हैं जबकि लोगों ने भी प्रति कनेक्शन 200 रुपए दिया है। इतना खर्च होने के बाद भी 75 फीसदी लोग दोबारा रिफिल नहीं ले रहे हैं। इनमें से ज्यादातर ग्रामीण है। इसका मतलब ये कि वे फिर से जलाऊ लकड़ी में खाना पका रहे हैं। वहीं हरियाली प्रसार योजना के तहत लाखों पौधे बांटे जा रहे हैं ताकि लोगों को जलाऊ लकड़ी मिल सके। ऐसे में दोनों योजनाओं में विरोधाभास है। दोनों में से एक योजना की जरूरत है। क्योंकि एक तरफ तो हरियाली प्रसार के नाम पर गड़बड़ी हो रही है और दूसरी तरफ उज्जवला योजना में करोड़ों खर्च हो रहे हैं। अन्य जिलों में तो कैंपा के मद से सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। इस मामले में खाद्य नियंत्रक डॉ.जीडी पटेल शासन के निर्देश का पालन करते हुए उज्जवला योजना के तहत कनेक्शन दिए जाने की बात कह रहे हैं। वहीं बिलासपुर डीएफओ डीपी साहू के मुताबिक हरियाली प्रसार योजना का मकसद जलाऊ लकड़ी ही नहीं, किसानों की आय में वृद्धि करना भी है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि पौधे कहां-कहां लगाए गए हैं तो वे इस बारे में बाद में जानकारी देने की बात कहने लगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पौधे के लिए 8 रुपए 75 पैसे खर्च हुए यानी 6 लाख पौधे लगाने में 52 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए।

वन विभाग और खाद्य विभाग की दो योजनाओं में विरोधाभास, हो रहे करोड़ों रुपए खर्च

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Web Title: प्रदूषण रोकने उज्जवला गैस, जलाऊ लकड़ी पर लाखों खर्च
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