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स्कूलों का हाल: जर्जर भवन में बैठकर पढ़ रहे बच्चे, पद होने के बाद भी टीचरों की भर्ती नहीं, 32 हजार स्कूलों का मेंटेनेंस रुका

छत्तीसगढ़ के अलावा बिलासपुर जिले में स्कूलों का हाल बेहाल है। मस्तूरी, बिल्हा सहित कई जगहों पर पढ़ने वाले बच्चे...

Danik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:25 AM IST
छत्तीसगढ़ के अलावा बिलासपुर जिले में स्कूलों का हाल बेहाल है। मस्तूरी, बिल्हा सहित कई जगहों पर पढ़ने वाले बच्चे जर्जर भवन में बैठने को मजबूर हैं। ऐसा सालों से चल रहा है। इसकी मूल वजह प्रदेशभर में 32 हजार स्कूलों के मेेंटेनेंस का काम अटकना है। अफसर मामले में खुद को मजबूर बताते हैं। कहते हैं स्कूलों से मिली जानकारी के बाद उन्होंने इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इसके अलावा उनके हाथ में कुछ भी नहीं है। इसके चलते दिक्कत बरकरार है।

यही अव्यवस्था टीचर और खेल गुरु की भर्ती को लेकर है। जिले में इसके सैकड़ों पद स्वीकृत हैं। पर भर्ती प्रक्रिया सालों से अटकी पड़ी है। दावा है कि बिलासपुर जिले के एजुकेशन में 129 हायर सेकेंडरी स्कूल में पीटीआई के लिए 94 पद स्वीकृत हंै। जिन स्कूलों में पद स्वीकृत है, उसमें भी भर्ती नहीं हुई है। पद खाली पड़ा हुआ है। इसके कारण खेल गतिविधियां रुकी हुई हैं। इसी तरह शहर के कई स्कूलों की पड़ताल में सामने आया है कि ज्यादातर स्कूल के छत का मेंटेनेंस नहीं जा रहा है। कहीं पंखे काफी समय से बंद हैं। कहीं दूसरी परेशानी है। गर्मी करीब होने के बादवजूद उन स्कूलों में हैंडपंप नहीं लगवाए गए हैं, जहां इसकी कमी है। बताया जा रहा है कि हर साल वित्तीय वर्ष में मेंटेनेंस की राशि दे दी जाती थी, लेकिन पिछले साल खर्च करने में गड़बड़ी होने पर इस साल जुलाई महीने में राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा सरकार ने भी फंड रोक दिए है, जबकि जुलाई में इसका भुगतान स्कूलों को कर दिया जाना था। इसके चलते ही कई स्कूलों में मरम्मत का काम अटका पड़ा है। स्कूल प्रबंधन ये मानता है कि उनके स्कूल में कई तरह की असुविधाएं हैं, पर सरकारी कर्मचारी होने के चलते वे कुछ भी बताने से बचते हैं। कई स्कूलों में छत, कमरे के टाइल्स, स्टूडेंट्स टॉयलेट, इलेक्ट्रॉनिक सामान, स्कूल के रंग-रोगन करने में खानापूर्ति की गई है। यानि इतनी राशि मिलने के बावजूद खर्च करने में लापरवाही की गई है।

पानी की कमी, परिसर में कचरा सहित तमाम दिक्कतें, बाउंड्रीवाल भी नहीं, इसलिए असुरक्षा

मस्तूरी के एक गांव में स्कूल की तस्वीर। यहां भी भवन जर्जर हो चुका है। इसी हाल में बैठकर छात्र पढ़ाई करते हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है।

कहीं परिसर में कचरा डंप, कहीं दूसरी परेशानी

सरकारी स्कूलों के हालात इतने खराब हैं कि किसी स्कूल में आसपास के लोग कचरा डंप कर रहे हैं तो कहीं दूसरी अव्यवस्थाएं हावी हैं। लिंगियाडीह के स्कूल परिसर में कचरा रखने का काम महीनों से चल रहा है। इसकी बदबू से बच्चों और स्कूल प्रबंधन को परेशानी होती है। इसके बावजूद कोई इसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। मस्तूरी के कई गांवों में बच्चे जर्जर भवनों में बैठ रहे हैं। देखकर पता चलता है स्कूल की दीवार किसी भी वक्त गिरकर छात्रों को घायल कर सकता है।

ऐसे बढ़ाई थी प्रक्रिया, आरोप है कि कई जगहाें का सत्यापन भी नहीं किया गया

स्कूल शिक्षा विभाग ने जिले में 27 भवनविहीन हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल और 15 जर्जर स्कूलों की सूची बनाकर नए भवन निर्माण के लिए लोक शिक्षण संचालनालय को प्रस्ताव भेज दिया था। पर कई स्कूलों के लिए नए भवन बनकर तैयार हैं और शिक्षा विभाग को पता नहीं है। कई जगह तो नई बिल्डिंग में भी क्लॉस लग रही है और शिक्षा विभाग के दस्तावेज में जर्जर भवन में ही पढ़ाई चल रही है। कुछ स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उनके यहां सत्यापन करने कोई नहीं आया है।

बिल्हा में भी 641 स्कूल, कइयों में ऐसी दिक्कत बकरार

बिल्हा ब्लॉक की स्कूलों में भी पानी की कमी बनी हुई है। यहां कुल 641 स्कूल हैं। और बिल्हा बीईओ एमएल पटेल ने भी जिन स्कूलों में पानी की कमी है वहां की दिक्कत दूर करने के लिए चिटि्ठयां लिखी हैं। उन्होंने टंकी की सफाई के लिए पीएचई और क्रेडा को पत्राचार किया है। उनके मुताबिक सफाई हुई है या नहीं इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। वे अगली बार जब स्कूलों का दौरा करेंगे तब प्रबंधन से पूछकर फिर से उन्हें इसकी सूचना भेजी जाएगी। तब समस्या से राहत मिलने की बात कही जा रही है।

कई स्कूलों में बांउड्रीवाल भी नहीं, पढ़ रहे बच्चे असुरक्षित, रसूखदारों का कब्जा भी बरकरार

जिले के सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्रीवाल ही नहीं है। ऐसे में अधिकांश स्कूलों के परिसर में जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों का कब्जा है। वे स्कूल प्रबंधन की इजाजत के बगैर स्कूल परिसर का इस्तेमाल करते हैं। शासन से फंड नहीं मिलने के कारण जिले के प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बाउंड्रीवाल ही नहीं बन सका है। बाउंड्री नहीं होने से स्कूल के शिक्षकों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ऐसे स्कूलों के परिसर में रसूखदारों का कब्जा है।

टंकी की सफाई नहीं, कीड़े पनप रहे, पर अफसरों को इससे सरोकार नहीं

बिलासपुर जिले में कुल 2800 स्कूल हैं। इनमें 1659 प्राइमरी। 756 मिडिल और 385 हाईस्कूल शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां सालों बाद साढ़े चार सौ स्कूलों में अधिकारी पीने के पानी का इंतजाम नहीं करवा सके हैं। इसके कारण छात्र और कर्मचारियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जिन स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था है वहां भी सालों तक टंकी की सफाई नहीं हुई है। इसके चलते इनमें कीड़े पनप रहे हैं। इन सारी बातों को लेकर अफसरों ने सरकार को चिट्‌ठी लिखी है। फिर भी सबकुछ यथावत है। अफसरों का कहना है कि वे फिर से इसके संदर्भ में बातचीत करेंगे

जिले में इन स्कूलों के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, हालात बेकार

हाईस्कूल के लिए बैमा, बहतराई, लिंगियाडीह, सेलर, कन्या सीपत, झलमला, सोन, हिर्री, बेलपान, दैजा, कन्या सकरी, लिम्हा, जूनापारा, तेंदुआ, धूमा, धौराभाठा, करैहापारा, कर्रा।

हायर सेकेंडरी: परसदा, सारधा, बिटकुली, भटचौरा, सोंठी, मल्हार, दर्राभांठा, भरनी, पोंड़ी

जर्जर स्कूल (हायर सेकेंडरी): सूरजमल बिल्हा, कन्या स्कूल बिल्हा, चांटीडीह, बिजौर, डंगनिया, बालक मस्तूरी, खम्हरिया, गतौरा, बालक सीपत, बालक सकरी, गनियारी, करगीकला, खोंगसरा, डीकेपी कोटा, कन्या। इनमें कई स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है।

शिकायत मिलने पर प्रस्ताव बनाकर भेजते हैं


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