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कमजोरियों रूपी होलिका का करें दहन: बक्रु मंजू

एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर कहते हैं जैसा संग वैसा रंग। दुनिया में सबसे अच्छा रंग भगवान के संग का रंग है। इस रंग...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:25 AM IST
एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर

कहते हैं जैसा संग वैसा रंग। दुनिया में सबसे अच्छा रंग भगवान के संग का रंग है। इस रंग में रंगने से आपसी दुर्भावनाएं समाप्त हो जाती हैं और भाईचारे व आत्मिक प्रेम का भाव जागृत हो जाता है। वर्तमान कलियुग अंत और सतयुग आदि के संगम युग का समय ही है जहां आत्मा और परमात्मा का मिलन होता है और आत्माएं परमात्मा के गुणों को धारण करने के रंग में रंगने लगती हैं। इसी के यादगार स्वरूप हम यह पर्व मनाते हैं। होली के तीन आध्यात्मिक अर्थ हैं एक तो पुराने मतभेद, दुख, अशांति दिलाने वाली बातों को भूल जाना अर्थात् हो-ली कर देना। दूसरा, होली का अंग्रेजी में शाब्दिक अर्थ पवित्रता है और तीसरा, आत्माएं परमात्मा के रंग में रंग जाती हैं। और होली मनाने से पूर्व अपने दृढ़ संकल्प रूपी अग्नि से स्वयं की कमजोरियों रूपी होलिका को पहचान कर उसका दहन अवश्य करना है। तब हमारा होली मनाना सही मायने में सार्थक होगा। उक्त बातें ब्रह्माकुमारी टिकरापारा सेवाकेन्द्र के हार्मनी हाॅल में होली के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रकु मंजू दीदी ने कही। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत गौरी व प्रीति ने होली खेले रघुवीरा अवध में.... व क्यूं आगे-पीछे डोलते हो भंवरों की तरह....गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। सभी बहनों की विशेषताअों पर आधारित स्लोगन्स बनाए गए। अंत में सभी को गुलाल का तिलक लगाकर ईश्वरीय वरदान और भोग वितरित किया गया। कार्यक्रम में रेलवे के सीनियर सेफ्टी आॅफिसर पीएन खत्री, सीएसईबी के अधिकारी भूषण वर्मा सहित अनेक साधकगण उपस्थित हुए।

योग-साधना मेंे कुमारों ने की 9 घंटे की तपस्या

पांच दिवसीय योग-साधना कार्यक्रम के दूसरे दिन पंद्रह ब्रह्माकुमार भाईयों ने दिनभर की दिनचर्या में 9 घंटे की तपस्या की। इसमें गहन तपस्या, दृष्टि योग, मौन अभ्यास के साथ प्रेरणादायी उद्बोधन व ईश्वरीय ब्राह्मण जीवन की मर्यादाओं की क्लास शामिल थे। इस अवसर पर ब्रकु. मंजू दीदी ने कहा कि जिस तरह ऊंचाइयों पर जाते समय सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट बांधना जरूरी होता है, उसी प्रकार इस जीवन की मर्यादाएं आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर जाने के लिए सीट बेल्ट का कार्य करती हैं।