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संसार में पाप का प्रवेश और व्यापक प्रभाव

मसीहियों द्वारा श्रद्धा से मनाए जाने वाले लेंट पर्व में मनन चिंतन के लिए आज का बाईबिल पाठ भजन संहिता 19:7-14, उत्पत्ति...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:25 AM IST
मसीहियों द्वारा श्रद्धा से मनाए जाने वाले लेंट पर्व में मनन चिंतन के लिए आज का बाईबिल पाठ भजन संहिता 19:7-14, उत्पत्ति 3:6-13, रोमियो 5: 12-19 एवं मत्ती 15:10-20 नामक किताबों से लिया गया है। रेव्हरेंड राजेश मसीह ने प्रवचन में बताया कि परमेश्वर ने आदम और हव्वा को अपनी समानता अर्थात पवित्रता में सृजा था, परंतु उन दोनों ने परमेश्वर के वचन पर संदेह किया और शैतान की बातों पर यकीन कर परमेश्वर द्वारा वर्जित वृक्ष के फल को खाकर पाप किया और वे परमेश्वर की दृष्टि में पापी एवं पतित होकर उसकी संगति से विमुख हो गए, इस प्रकार पाप ने इस जगत में प्रवेश किया। बाईबिल के अनुसार ऐसा कार्य करना जिसके द्वारा कोई परमेश्वर की आज्ञा का व्यवस्था का उल्लंघन करे। परमेश्वर द्वारा स्थापित लक्ष्य से चूक जाए। परमेश्वर द्वारा निर्धारित मार्ग पर चलने से विद्रोह करे, परमेश्वर के चारित्रिक विशेषताओं या गुणों के विरुद्ध आचरण करे वह पाप है। एक ऐसा समय था जब इस संसार में कोई पाप या बुराई नहीं थी, तब यह संपूर्ण सृष्टि पवित्रता के आवरण से ढकी हुई थी, लेकिन जैसे ही पाप ने प्रवेश किया वैसे ही इस जगत में निम्नांकित विध्वंसकारी और घातक परिणाम दिखने लगे और उनका प्रभाव आज तक कायम है। पहली बात यह है कि जैसे ही आदम और हव्वा ने पाप किया ( उत्पत्ति 3:6 )उसी समय उनकी आंखें खुल गईं और उन्हें अहसास हुआ कि वे दोनों नग्न हैं ( उत्पत्ति 3:7 )।