Hindi News »Chhatisgarh »Bilaspur» जलकुंभी को नष्ट करने छात्रों ने खोजा जीव, शोध की शुरुआत में मिली सफलता

जलकुंभी को नष्ट करने छात्रों ने खोजा जीव, शोध की शुरुआत में मिली सफलता

जलकुंभी के कारण नदी, तालाबों के पानी सूख जा रहे हैं। नदियों और तालाबों का पानी बचाने सेंट्रल यूनिवर्सिटी और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:25 AM IST

जलकुंभी को नष्ट करने छात्रों ने खोजा जीव, शोध की शुरुआत में मिली सफलता
जलकुंभी के कारण नदी, तालाबों के पानी सूख जा रहे हैं। नदियों और तालाबों का पानी बचाने सेंट्रल यूनिवर्सिटी और बिलासपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शोध कर रहे हैं। वहीं डीपी विप्र कॉलेज की छात्रा पूनम, भारतमाता स्कूल की देवो प्रियाे गांगुली, मोनिका व मो. समीर ने भी जलकुंभी के कारण नदी और तालाबों को हो रहे नुकसान को लेकर काम शुरू किया है। इसमें छात्रों ने डॉ. सुधीर चिपड़े के साथ रतनपुर स्थित लैब का भ्रमण किया। इसमें छात्रों को पता चला कि नियोचेटिना इर्कोनिया जीव ऐसा जीव है जो जलकुंभी को ही अपना भोजन बनाता है। छात्रों ने बताया कि इसे बायोलॉजिकल रिमूवल ऑफ वाटर हाट्सिंथ के नाम से जाना जाता है। नियोचेटिना इर्कोनिया जीव को जलकुंभी प्रभावित स्थानों पर डालने से यह 40 दिनों के अंदर इसे खाकर खत्म कर देते हैं। इन 40 दिनों में नियोचेटिना इर्कोनिया जीव प्रजनन कर बढ़ जाते हैं। जलकुंभी खत्म होने के बाद ये जीव अपने आप समाप्त होने लगता है। उनका कहना है कि जलकुंभी को नष्ट करने से बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।

पानी बचाने का प्रयास

जलकुंभी को लेकर शोध करने वाले छात्र-छात्राएं।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ग्रामीण एंड प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पराज सिंह ने बताया कि जलकुंभी में 94 प्रतिशत पानी और 6 प्रतिशत अन्य चीजें पाई जाती हैं। जलकुंभी एक एेसी वनस्पति है जिसे जितना ज्यादा टेम्प्रेचर मिलता है, वह उतनी ही तेजी से ग्रोथ करता है। इससे जहां जलकुंभी नहीं होती है, वहां वाष्पीकरण से 1 लीटर पानी वाष्पित होता है, तो जहां जलकुंभी होती है, वहां का पानी 10 लीटर वाष्पित होता है। इस कारण जलकुंभी पानी के स्रोत को सूखा देती है। जलकुंभी के ऊपर होने के कारण नीचे तक सौर ऊर्जा नहीं पहुंच पाती है।

जलकुंभी से नुकसान होता है पानी को

पानी को नहीं हाेता है नुकसान

शिक्षक पानू हालदार ने बताया कि नियोचेटिना इर्कोनिया जीव से पानी को भी कोई नुकसान नहीं होता है। इसका पता चलने के बाद इस आइडिया को इंस्पायर मानक में भेजा गया। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसका उपयोग बंधवापारा तालाब में किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरण कार्यक्रम में छात्र ईको जनरेशन में इस आइडिया को प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र डेवलपमेंट कार्यक्रम के देश प्रमुख परियोजना प्रमजोत सिंह सोढ़ी के नेतृत्व में इस वर्ष इंदौर में होने वाले थ्री आर फोरम में अपनी प्रस्तुति छात्र देंगे।

सप्ताहभर में खत्म हुए पत्ते

शिक्षक पानू हालदार के निर्देशन में छात्रों ने बंधवापारा तालाब में नियोचेटिना इर्कोनिया जीव का उपयोग किया। छात्रों ने 11 नियोचेटिना इर्कोनिया जीव तालाब में जलकुंभी प्रभावित क्षेत्र में डाले। छात्रों ने बताया कि एक सप्ताह में जलकुंभी के पत्ते खत्म होने लगे। 15 दिन में पूरी तरह पत्ते खत्म हो गए। 40 दिन में जड़ भी जलकुंभी की खत्म हो गई। वहीं जीव 48 दिन में खुद ही जल में घुल गए।

रतनपुर के तालाबों में भी है जलकुंभी

बिलासपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर प्राचीन ऐतिहासिक धार्मिक स्थल रतनपुर को तालाबों का शहर कहते हैं। यहां लगभग 157 तालाब थे, जो अब 120 हो गए हैं। लगातार हो रहे तालाबों की कमी और जल संरक्षण को देखते हुए तालाबों को बचाने शासन ने निर्णय लिया है। वहीं इन तालाबों में ज्यादा मात्रा में जलकुंभी पाई जा रही हैं। तालाबों को बचाने साइंस कॉलेज के बॉटनी एंड माइक्रोबॉयोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. डीके श्रीवास्तव को कोआर्डिनेटर बनाया गया है। वहीं टीसीएल कॉलेज जांजगीर के केमेस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. पीके सिंह, साइंस कॉलेज की माइक्रोबॉयोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. रश्मि परिहार, यूटीडी की माइक्रोबॉयोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सीमा बेलोरकर और डीपी विप्र कॉलेज की केमेस्ट्री की प्रोफेसर डॉ. रेनु नायर शोध कर रही हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Bilaspur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×